राजू नामदेव (शिवपुरी). कोलारस से राजू नामदेव ने 26/06/2013 को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जे.एन. कंसोटिया को शासकीय महाविद्यालय कोलारस के अव्यवस्था एवं भ्रष्टाचार से संबंधित तथ्यों की फाइल दी, तो कंसोटिया जी ने इसे मार्क कर आयुक्त उच्च शिक्षा को भेज दी लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एक माह में जाँच नहीं कर पाये हैं।
इस द्वौरान सम्बंधित प्रचार्य द्वारा जाँच को रूकवा कर लगातार शिकायत को वापस लेनें हेतु दबाब डाला जा रहा है,धमकियाँ दिलवायी जा रही हैं किन्तु विभाग को इससे कोई लेना देना नहीं है। दरअसल जब लोक पंचायत की टीम ने पूरे मामले की खोजबीन कर जानकारी जुटाई तो अव्यवस्था एवं भृष्टाचार से जुडे कई चैकाने बाले तथ्य सामने आए जैसे- शासकीय रिकार्ड से छेडछाड़, अतिथि विद्वानों को अनुचित भुगतान, ओवर राइटिंग, बिल आने से पूर्व बिल का भुगतान, नियमों की अनदेखी कर बकीलों को परीक्षक बनाना जिसके विरूद्ध कार्यवाही तत्कालीन एस0डी0एम अशोक काम्ठान ने की थी, कूटरचित प्रमाण पत्र का उपयोग, एक ही समय में दो-दो जगह उपस्थिति वह भी अवकाश लेने के पश्चात आदि ऐसे अनेक मामले हैं।
एक मामले को ही देखें तो स्पस्ट हो जाएगा। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डा आर.एस. ठाकुर गोपनीय कार्य ( परीक्षा)से दिनांक 20/03/1012 को साथी सहायक प्राध्यापक को प्रभार सौंप कर म.प्र. लोकसेवा आयोग इन्दोर गये तथा 29/03/2012 के बाद लौटे। जिसकी पुष्टि 28.29 मार्च को महाविद्यालय में आयोजित विवेकानन्द कैरियर मेला में डा. आर .एस. ठाकुर की अनुपस्थिति से होती है। मजे की बात तो यह है कि इस दौरान श्री ठाकुर 350 किलोमीटर दूर परीक्षा संबंघी कार्य भी करते रहे और कोलारस महाविद्यालय में बिलों तथा कैश बुक पर हस्ताक्षर भी करते रहे। जब सुचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गयी।
तो इन 22/03/2012 का 21/03/2012 किया गया लेकिन शायद जल्दी जल्दी तथ्यों की लीपापोती के फेर में कुछ स्थानों पर 22का 21 करना भूल गये। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब श्री ठाकुर अवकास पर थे तो इन्होने उन्हीं तारीखों में हस्ताक्षर कैसे किए ? दूसरा मामला कमला कम्प्यूटर पाॅइन्ट एण्ड स्टेशनरी का है जिसमें कमला कम्प्यूटर द्वारा बिल तो 25/03/2012 को दिया गया लेकिन श्री ठाकुर द्वारा बिल आने से एक सप्ताह पूर्व ही 19/03/2012 को ट्रेजरी भुगतान के लिए भेज दिया गया। तीसरा मामला एकेडमिक स्टाफ कालेज देवी अहिल्या वि.वि.इन्दौर 22/10/1990 से 17/11/1990 के दिशा निर्देशन कार्यक्रम का प्रमाणपत्र जिसके संदर्भ में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में ए.एस.सी./161/2013 दि.08/02/2013 को वि.वि. के लोक सूचना अधिकारी ने बताया कि ऐकेडमिक स्टाॅफ काॅलेज के रेकार्ड के अनुसार दिनांक 20/10/1990 से 17/11/1990 तक कोई भी ओरिएन्टेशन / रिफ्रेशर कोर्स आयोजित नहीं हुआ है। सच जो भी हो यह जाॅच का विषय है। ऐसे अनेक मामले हैं जिनकी जाॅच होनी आवश्यक है । यदि जाॅंच होती भी है तो अधिक से अधिक लीड काॅलेज के प्रचार्य या अतिरिक्त संचालक द्वारा गठित प्रोफेसर की टीम से । जहाँ निष्पक्षता की उम्मीद करना बेमानी होगा। क्योंकि यहाँ कार्य आज तुम्हारी तो कल मेरी बारी की तर्ज पर होता है।
ऐसा नहीं है कि लीड काॅलेज के प्राचार्य ,अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ग्वालियर चम्बल संभाग , आयुक्त उच्च शिक्षा सतपुडा भवन भोपाल को को इनकी जानकारी नहीं ,किन्तु श्री ठाकुर का प्रभाव नही ंतो और क्या है नीचे से लेकर ऊपर तक के सभी अधिकारी तमाम शिकायतों के बाद कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।
इसके अलावा महाविद्यालय से सूचना के अधिकार के तहत माँगी गयी जानकारी 7माह पश्चात भी नहीं मिल पायी। प्रथम अपील ,एवं द्वितीय अपील में भी जिम्मेदार अधिकारी जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए।
सीधी बात -
मैं कुछ नहीं कर सकता आप मुझे देंगें मैं इसे ऊपर भेज दूंगा। इसमें आयुक्त भी कुछ नहीं कर सकते वह भी फाइल प्रमुख सचिव को भेजेंगें । क्योंकि नियुक्ति करता अधिकारी ही इस मामले पर कार्यवाही कर सकता है । डा. आई. बी. सिंह
अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ग्वालियर चम्बल संभाग
इस द्वौरान सम्बंधित प्रचार्य द्वारा जाँच को रूकवा कर लगातार शिकायत को वापस लेनें हेतु दबाब डाला जा रहा है,धमकियाँ दिलवायी जा रही हैं किन्तु विभाग को इससे कोई लेना देना नहीं है। दरअसल जब लोक पंचायत की टीम ने पूरे मामले की खोजबीन कर जानकारी जुटाई तो अव्यवस्था एवं भृष्टाचार से जुडे कई चैकाने बाले तथ्य सामने आए जैसे- शासकीय रिकार्ड से छेडछाड़, अतिथि विद्वानों को अनुचित भुगतान, ओवर राइटिंग, बिल आने से पूर्व बिल का भुगतान, नियमों की अनदेखी कर बकीलों को परीक्षक बनाना जिसके विरूद्ध कार्यवाही तत्कालीन एस0डी0एम अशोक काम्ठान ने की थी, कूटरचित प्रमाण पत्र का उपयोग, एक ही समय में दो-दो जगह उपस्थिति वह भी अवकाश लेने के पश्चात आदि ऐसे अनेक मामले हैं।
एक मामले को ही देखें तो स्पस्ट हो जाएगा। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डा आर.एस. ठाकुर गोपनीय कार्य ( परीक्षा)से दिनांक 20/03/1012 को साथी सहायक प्राध्यापक को प्रभार सौंप कर म.प्र. लोकसेवा आयोग इन्दोर गये तथा 29/03/2012 के बाद लौटे। जिसकी पुष्टि 28.29 मार्च को महाविद्यालय में आयोजित विवेकानन्द कैरियर मेला में डा. आर .एस. ठाकुर की अनुपस्थिति से होती है। मजे की बात तो यह है कि इस दौरान श्री ठाकुर 350 किलोमीटर दूर परीक्षा संबंघी कार्य भी करते रहे और कोलारस महाविद्यालय में बिलों तथा कैश बुक पर हस्ताक्षर भी करते रहे। जब सुचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गयी।
तो इन 22/03/2012 का 21/03/2012 किया गया लेकिन शायद जल्दी जल्दी तथ्यों की लीपापोती के फेर में कुछ स्थानों पर 22का 21 करना भूल गये। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब श्री ठाकुर अवकास पर थे तो इन्होने उन्हीं तारीखों में हस्ताक्षर कैसे किए ? दूसरा मामला कमला कम्प्यूटर पाॅइन्ट एण्ड स्टेशनरी का है जिसमें कमला कम्प्यूटर द्वारा बिल तो 25/03/2012 को दिया गया लेकिन श्री ठाकुर द्वारा बिल आने से एक सप्ताह पूर्व ही 19/03/2012 को ट्रेजरी भुगतान के लिए भेज दिया गया। तीसरा मामला एकेडमिक स्टाफ कालेज देवी अहिल्या वि.वि.इन्दौर 22/10/1990 से 17/11/1990 के दिशा निर्देशन कार्यक्रम का प्रमाणपत्र जिसके संदर्भ में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में ए.एस.सी./161/2013 दि.08/02/2013 को वि.वि. के लोक सूचना अधिकारी ने बताया कि ऐकेडमिक स्टाॅफ काॅलेज के रेकार्ड के अनुसार दिनांक 20/10/1990 से 17/11/1990 तक कोई भी ओरिएन्टेशन / रिफ्रेशर कोर्स आयोजित नहीं हुआ है। सच जो भी हो यह जाॅच का विषय है। ऐसे अनेक मामले हैं जिनकी जाॅच होनी आवश्यक है । यदि जाॅंच होती भी है तो अधिक से अधिक लीड काॅलेज के प्रचार्य या अतिरिक्त संचालक द्वारा गठित प्रोफेसर की टीम से । जहाँ निष्पक्षता की उम्मीद करना बेमानी होगा। क्योंकि यहाँ कार्य आज तुम्हारी तो कल मेरी बारी की तर्ज पर होता है।
ऐसा नहीं है कि लीड काॅलेज के प्राचार्य ,अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ग्वालियर चम्बल संभाग , आयुक्त उच्च शिक्षा सतपुडा भवन भोपाल को को इनकी जानकारी नहीं ,किन्तु श्री ठाकुर का प्रभाव नही ंतो और क्या है नीचे से लेकर ऊपर तक के सभी अधिकारी तमाम शिकायतों के बाद कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।
इसके अलावा महाविद्यालय से सूचना के अधिकार के तहत माँगी गयी जानकारी 7माह पश्चात भी नहीं मिल पायी। प्रथम अपील ,एवं द्वितीय अपील में भी जिम्मेदार अधिकारी जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए।
सीधी बात -
मैं कुछ नहीं कर सकता आप मुझे देंगें मैं इसे ऊपर भेज दूंगा। इसमें आयुक्त भी कुछ नहीं कर सकते वह भी फाइल प्रमुख सचिव को भेजेंगें । क्योंकि नियुक्ति करता अधिकारी ही इस मामले पर कार्यवाही कर सकता है । डा. आई. बी. सिंह
अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ग्वालियर चम्बल संभाग