नि:शक्त बच्चों से गद्दारी कर 18750 बेरोजगारों की नौकरी 'जीम' गई शिवराज सरकार

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भोपाल। तमाम नियम कायदों का जिक्र बाद में करेंगे, सबसे पहले यह कि मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख नि:शक्त बच्चे हैं जिन्हे स्पेशल एज्यूकेशन दिया जाना थी और इसके लिए 18750 शिक्षकों की नियुक्ति की जानी थी परंतु शिवराज सरकार ने ना तो विकलांग बच्चों की पढ़ाई के प्रबंधन किए और ना ही इस बहाने बेरोजागारों को नौकरी दी। वो सब कुछ जीम गई। हमारे गांव में जीम जाने का अर्थ होता है पचा जाना, खा जाना।

मध्यप्रदेश के जागरुक नागरिक अंसार खान 9479774468 ने भोपालसमाचार.कॉम को भेजे एक मेल में बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार स्कूलों में अध्ययनरत् निःषक्त बच्चों की शिक्षा से संबंधित आर.सी.आई नई दिल्ली और दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 2009 में जारी आदेश की अवहेलना कर रही है।

विदित हो भारत में निःषक्तता के क्षेत्र में कार्यरत् भारतीय पुनर्वास परिषद् (आर.सी.आई.) नई दिल्ली जो कि एक अधिनियम है जिसके अनुसार ही निःषक्त लोगों और इस क्षेत्र में कार्य करने वालों को मार्गदर्शन और पंजीकृत किया जाता है, और वही से निःषक्तजन संबंधी सारे नियम निर्धारित होते है। दिल्ली हाई कोर्ट का भारत के सभी राज्यों को आदेश है कि जिन स्कूलों में निःषक्त बच्चें अध्ययनरत् है उन्हें पढाने के लिए विशेष शिक्षक स्कूल स्तर या फिर संकुल केन्द्र स्तर पर स्थायी तौर पर पदस्थ होना चाहिए।

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश इस आदेश के अनुसार कार्य कर रहे है लेकिन म.प्र. में राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल के निर्देश पर इन निःषक्त बच्चों को सामान्य स्कूली शिक्षक या अप्रशिक्षित शिक्षक ही पढा रहे है। जिन शिक्षकों को ये नही मालूम कि विकलांगता कितने प्रकार की होती है उनसे आप इन बच्चों को शिक्षित करने की क्या अपेक्षा करेगें।

आर.सी.आई. नई दिल्ली के अनुसार निर्देश और नियम ये है कि निःषक्त बच्चों को पढाने के लिए 8 निःषक्त बच्चों पर 1  विशेष शिक्षक कार्यरत् होना चाहिए। म.प्र. में वर्तमान में लगभग 1.50 लाख निःषक्त बच्चें स्कूलों में दर्ज है, और इस आंकड़ों के अनुसार म.प्र. में लगभग 18750 विशेष शिक्षक कार्यरत होना चाहिए लेकिन वास्तुस्थिति ये है कि वर्तमान में निःषक्त बच्चों को पढाने के लिए एक भी विशेष शिक्षक नियुक्त नही है।

अंसार खान
9479774468

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