राकेश दुबे@प्रतिदिन। मध्यप्रदेश के बारे में कपिल सिब्बल की बात सही है तो देश के नागरिकों को उस सरकार के बारे में भी अपनी राय बनाने का हक है जिसके वजीर कपिल सिब्बल है। आम जनता की राय है कि अगर मध्यप्रदेश भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला है तो केंद्र तो बड़े मियां सुभानाल्लाह है । अब तक पूरे राज्यों में जितना भ्रष्टाचार नहीं हुआ उतना बड़े मियां ने अकेले कर कीर्तिमान स्थापित किया है ।
वैसे मध्यप्रदेश सरकार को ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है , क्योंकि यहाँ भी कई भांजे - भतीजे और यार -दोस्त तो मजे उडा रहे है । कई मंत्री परिवारों में नोट गिनने की मशीन लगी हुई है । ये मशीनें अहर्निश चलती है, ऐसी सूचना मंत्रियों के मोहल्लों से आती हैं ।
दोनों सरकारों में बड़े मियां और छोटे मियां का अंतर है । दोनों के बीच होड लगी हुई है कि मै बड़ा हो जाऊ । यह प्रमाणित हो गया है कि बड़े मियां ही सुभानाल्ल्लाह है । क्योंकि उनके पास सीबीआई है । और सरकार के इशारे पर वह किसी को भी नाप सकती है । सरकार के कहने पर देश की सबसे बड़ी अदालत में झूठा हलफ भी उठा सकती है । इस सब के बाद केंद्र सरकार यह भी कहने की हिम्मत जुटा लेती है कि उसके मंत्री दूध के धुले है और इस्तीफा नहीं देंगे ।
मध्यप्रदेश में तो नई परम्परा विकसित हुई है । केंद्र में पूछताछ का नाटक तो होता है यहां तो "तुम भी चुप और हम भी चुप" और दोस्त यार औ भांजे भतीजों की पौ -बारह। भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिया खुद पर नियन्त्रण जरूरी है । बईमानी के देवता के आराधक तो बेईमान बी बनेंगे ,मानिक सरकार नहीं।
