उपदेश अवस्थी@लावारिस शहर/ तमाम जनाक्रोश के बीच पूरे 48 घंटे गुजार कर शिवराज के सीहोर की 'गुड़िया' का गुनहगार पुलिस के पास सुरक्षित जा पहुंचा। इस घटना पर पूरा का पूरा प्रदेश शर्मशार है, लेकिन पुलिस इस गिरफ्तारी को ऐसे बयां कर रही है मानो युद्ध जीतकर आई हो।
सीहोर एसपी केबी शर्मा ने आज आष्टा में प्रेसवार्ता आयोजित की। फिर विस्तार से बताया कि किस प्रकार एक बेखौफ अपराधी ने एक 7 वर्षीय मासूम को अपनी बातों के झांसे में लिया और बलात्कार कर डाला। फिर बताया कि पुलिस ने किस संवेदनशीलता के साथ मामला दर्ज किया और बालिका के बयान के आधार पर सूझबूझ के साथ आरोपी की तलाश की और अंतत: आरोपी को उसी गांव से गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रेसवार्ता के दौरान यह भी बताया गया कि चूंकि सीहोर मुख्यमंत्री का गृहजिला है अत: घटना को राजनैतिक रंग मिलने की संभावना थी अत: रणनीति बनाकर काम किया गया।
कुल मिलाकर एक शर्मनाक घटनाक्रम में हुई गिरफ्तारी को कुछ ऐसे पेश किया गया जैसे कोई जासूसी सफल हो गई। अपराधी बहुत शातिर था, बावजूद इसके पकड़ा गया या कोई युद्ध जीत लिया गया हो।
जबकि जिक्र-ए-खास तो यह है कि सीहोर के लोगों में कानून का खौफ इतना कम हो चुका है कि अपराधी, वारदात करने से पहले एक मिनट भी ये नहीं सोचते कि इसका अंजाम क्या होगा। इस मामले में भी गिरफ्तार कमलेश ने वारदात से पहले कोई योजना नहीं बनाई थी। वो शातिर और पेशेवर अपराधी नहीं था। बस एक आम ग्रामीण है जिसे कानून का कोई डर नहीं था इसलिए उसने यह वारदात कारित कर डाली।
गिरफ्तारी के लिए पुलिस को कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी। पीड़िता ने बताया था कि आरोपी के आधे बाल काले और आधे सफेद थे। पुलिस ने गांव में जितने भी अधेड़ थे सबको धर लिया। एक कमलेश ही था जो नहीं मिला। पुलिस को उसे तलाशने में पूरे 48 घंटे लगे। इससे कम समय में तो पीड़िता के परिजन और गांववाले ही कमलेश तो ढूंढ निकालते।
इस मामले में पुलिस ने कोई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन नहीं की। जरा सी पूछताछ, वही पुरानी पुलिसिया छापामारी और हो गई गिरफ्तारी। जासूसी नहीं की। अपराधी पेशेवर नहीं था जिसने सबूत छिपा लिए हों। पुलिस तो उसे तलाशने आसपास के गांव में भी नहीं गई। बस घरवालों को धर लिया। आरोपी अपने आप पुलिस के पास चला आया।
सवाल यह उठता है कि फिर अपनी पीठ थपथपाते हुए प्रेसकान्फरेंस क्यों। क्षमा याचना करना चाहिए कि एक अदने से बदमाश को तलाशने में हमें 48 घंटे लगे। उन्हें कहना चाहिए था कि 'हम क्षमा प्रार्थी हैं जो सामान्य से ग्रामीण भी बलात्कार जैसी जघन्य घटनाएं करने का मन बना रहे हैं और उनमें कानून का कोई डर नहीं है।' इस मामले में सीहोर के कप्तान से लेकर सिपाही तक पूरे के पूरे विभाग को पीड़िता से क्षमा मांगनी चाहिए कि वो कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने में नाकाम हुए जिसके चलते एक मासूम की जिंदगी बर्बाद हो गई।
और यदि सच से आंख मिलाने की हिम्मत नहीं है तो कम से कम ऐसे मामलों में सामान्य की गिरफ्तारी पर अपनी पीठ तो मत थपथपाओ यारो।
