दतिया (नीरज सिंह)। दतिया में डाक्टरों की लापरवाही से बच्चों की जान खतरे में है। यहां 25 जनवरी को 11 माह के मासूम चेतन की मौत का गम लोग भूल भी नहीं पाए थे कि गुरुवार 31 जनवरी को फिर से एक और बच्चा डाक्टर की लापरवाही से मौत की आगौश में समां गया। इस बच्चे को उसके परिजन शाम को प्राईवेट डाक्टर की क्लीनिक पर ले गए थे जहां डाक्टर द्वारा उसे इंजेक्शन लगाया गया और बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत पर परिजनों ने कोतवाली पहुंचकर घेराव व हंगामा किया।
जानकारी के मुताबिक दतिया के होलीपुरा टौरिया निवासी संजीव अहिरवार के डेढ़ साल के बच्चे कार्तिक की गुरुवार की शाम तबियत बिगडऩे पर बच्चे की मां सरोज अपनी सास को लेकर शहर के गुगौरिया धर्मशाला के पास डा. आर सी नीखरा की क्लीनिक पर ले गए थे। बकौल सरोज उसके बच्चे को मामूली खांसी-जुकाम था डाक्टर ने रात 8 बजे के करीब उसे बेहोशी का इंजेक्शन लगाया उसके बाद कार्तिक की तबियत बिगड़ी। इसके बाद डाक्टर ने उसे एक ओर इंजेक्शन लगाया जिसके बाद बच्चे की मौत हो गई।
बच्चे की मौत के बाद डाक्टर ने यह कहकर चलता कर दिया कि इसे बड़े अस्पताल (जिला चिकित्सालय) ले जाओ। परिजनों के मुताबिक बच्चे की मौत के बाद ही डाक्टर क्लीनिक का ताला लगाकर भाग निकला। मासूम की मौत के बाद परिजन मां सरोज व बच्चे की दादी सहित होलीपुरा क्षेत्र के करीब आधा सैकड़ा लोग कोतवाली पहुंचे व मामल की जानकारी देते हुए डाक्टर पर कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली का घेराव किया। पुलिस ने बच्चे की मां सरोज की सूचना पर मर्ग कायम किया।
खबर लिखे जाने तक बच्चे का शव कोतवाली में उसकी मां रखकर विलाप कर रही थी। बताते चलें कि इससे पूर्व 25 जनवरी को भी दतिया में एक 11 माह के बच्चे की लापरवाही के चलते मौत हो गई थी जिसमे बच्चे के परिजनों ने सिविल सर्जन डा. प्रदीप उपाध्याय के साथ मारपीट व उनके चेबर मे तोडफ़ोड़ की थी। उक्त मामले में प्रशासन ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। इधर गुरुवार को फिर से एक डाक्टर की लापरवाही ने एक बच्चे की जान ले ली। लगातार हो रहीं बच्चो की मौतो से शहर के लोग खासे भयाक्रांत है।
मेरा बच्चा मरा नही बेहोश है
मासूम कार्तिक की मौत के बाद उसके परिजन कोतवाली में आपा खो बैठे। बच्चे की दादी का रोरोकर बुरा हाल था। वह कह रहीं थीं कि उसका बच्चा मरा नहीं बेहोश है उसे कुछ नहीं हुआ वह होश में आ जाएगा वहीं मां सरोज पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक अधिकारी है डाक्टर
डेढ़ साल के मासूम कार्तिक की मौत जिस डाक्टर की लापरवाही से हुई वह दतिया में ही जिला आयुर्वेद अधिकारी सह अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। दतिया में ही गुगौरिया धर्मशाला के पास वह एलोपेथी से इलाज करते हैं। बच्चे की मौत के बाद वह क्लीनिक पर ताला लगाकर भाग निकले।
मुझे नहीं पता सिविल सर्जन से पूंछे
बच्चे की मौत के बारे में सीएमएचओ डा.आर एस गुप्ता से बात की गई तो उनका कहना था कि मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं है आप सिविल सर्जन से पूंछे।