डिण्डौरी में दो सिर वाली बेटी का जन्म

shailendra gupta
इन्दीवर कटारे/डिण्डौरी। जिले में एक ऐसी बेटी ने जन्म लिया है जिसने अपने जन्म के साथ ही ढेर सारी सुर्खियां बटोर ली हैं। जिले की जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत एक ग्रामीण आदिवासी परिवार के लोग उस समय आश्चर्यचकित रह गये जब उन्होंने बच्ची के जन्म के बाद देखा कि बच्ची के सिर के पीछे उसी आकार का एक और अंग जुड़ा हुआ है जिसे देखकर उपस्थित चिकित्सक और प्रत्यक्षदर्शी भी दंग रह गये।

आखिर बच्ची के दो सिरों का वैज्ञानिक रहस्य क्या है ? यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन डॉक्टर इसे विज्ञान की भाषा में जीन्स परिवर्तन का ही हिस्सा मान रहे हैं। अप्रत्याशित रूप से जन्मी बच्ची की हालत देख उसे समनापुर के  सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से जबलपुर रेफर कर दिया गया है। डॉक्टर के अनुसार बच्ची पूरी तरह स्वस्थ्य है। डॉ. अशोक बैनर्जी का कहना है कि नवजात बच्ची के दो सिर नहीं है। सिर के पीछे जो उसी आकार का हिस्सा है वह टयूमर हो सकता है। बाकी पूरा मामला जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। 


क्या है मामला


जनपद क्षेत्र समनापुर की ग्राम पंचायत पड़रिया अंतर्गत ग्राम धनौली के आदिवासी परिवार की कलमवती पति कन्हैया ने  ३० जनवरी बुधवार को एक बच्ची को जन्म दिया है, जिसके दो सिर बतलाये जा रहे हैं। हालांकि डॉक्टर इसे दूसरा सिर न कहते हुए सिर्फ मांस का एक हिस्सा ही बता रहे हैं। बच्ची के परिजनों को उसकी ऐसी अवस्था को देख कोई खास चिंता नहीं है। चिकित्सकों द्वारा बच्ची को स्वस्थ करार दिये जाने के बाद परिजन प्रसन्न है, लेकिन वहीं चिकित्सक किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहते। उन्होंने फौरन ही बच्ची को जबलपुर रेफर करना ही बेहतर समङाा है। उल्लेखनीय है कि आदिवासी बहुल इस जिले के अलावा भी समीपवर्ती जिलों से इस प्रकार के जन्म लेने की जानकारियां प्राप्त हुई थीं लेकिन शायद यह पहला अवसर है जब जिले में इस प्रकार की घटना हुई है। 


उठाना होगा जोखिम


सूत्रों की माने तो विशेषज्ञ चिकित्सकों के अधीन नवजात बच्ची का उपचार किया जायेगा। सूत्र यह भी बताते हैं कि उपचार की प्रक्रिया कुछ जोखिम भरी हो सकती है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. चंद्रशेखर धुर्वे के मुताबिक बच्ची के सिर के पीछे एकदम सिर जैसा आकार बना हुआ है। संभवत: ऑपरेशन के पश्चात् ही स्थिति सामान्य हो सकेगी। उन्होंने बतलाया है कि किन्हीं शारीरिक परिवर्तनों की वजह से ऐसा संभव है फिलहाल अभी कुछ भी साफ नहीं कहा जा सकता। डॉ. धुर्वे ने बतलाया कि हमने अपनी ओर से सभी व्यवस्थायें कर नवजात को जबलपुर रेफर किया है, जहां उसे उचित उपचार मुहैया हो सकेगा। जानकारों की माने तो नवजात के ऑपरेशन पर ही अब उम्मीदें टिकी हुई हैं क्योंकि नवजात को जन्म लिए अभी एक दिन भी  पूरा नहीं हो सका है तो ऑपरेशन करना डॉक्टरों के लिये चुनौतीपूर्ण रहेगा, जो जानकार जोखिम भरा कदम बताते हैं। 

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