भोपाल। भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष के बदल जाने के बाद मध्यप्रदेश सरकार के समीकरण भी बदल रहे हैं। चैहरे पर मुस्कान, हाथ में गुलदस्ता लिए शिवराज सिंह दिल्ली में राजनाथ सिंह की तजपोशी के समय लगातार मुस्तैद रहे, लेकिन राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में उनका नाम तक नहीं लिया।
राजनैतिक पंडित बताते हैं कि शिवराज सिंह के राजनाथ सिंह से रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं। पिछली दफा भी जब वो राष्ट्रीय अध्यक्ष हुआ करते थे, तब भी उन्होंने शिवराज को ज्यादा हाईट नहीं दी थी, इसके इतर मध्यप्रदेश में कुछ अन्य नेताओं से उनके संपर्क बहुत अच्छे हैं।
मध्यप्रदेश के मंत्रियों में पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के नजदीकी रहे कैलाश विजयवर्गीय के रिश्ते भी राजनाथ सिंह से बहुत बेहतर नहीं हैं, जबकि लक्ष्मीकांत मिश्रा, अर्चना चिटनिस एवं ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह तीन ऐसे मंत्री हैं जो राजनाथ के सबसे ज्यादा नजदीकी माने जाते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में कैलाश कमजोर हो जाएंगे, जबकि इन तीनों मंत्रियों की पॉवर ज्यादा बढ़ेगी।
सन्निकट विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनाथ सिंह का आना मध्यप्रदेश में कई मायने रखता है। टिकिट वितरण को लेकर भी किसकी मनमानी चलेगी और कौन किनारे हो जाएगा इसके अंदाज भी लगाए जा रहे हैं। प्रभात झा समर्थकों के लिए बुरी खबर यह है कि अब केन्द्र में भी झा साहब की पकड़ उतनी मजबूत नहीं रह जाएगी, जितनी कि गड़करी के समय में हुआ करती थी।
सूत्र बोलते हैं कि नरेन्द्र सिंह तोमर और राजनाथ सिंह की ट्यूनिंग बहुत अच्छी है। अत: मध्यप्रदेश में एक बार फिर भाजपा का संचालन भाजपा कार्यालय से ही शुरू होने की उम्मीद है। सनद रहे कि अभी तक भाजपा का संचालन सीएम हाउस से किया जा रहा था और प्रभात झा ने अपनी विदाई के वक्त इसका खुलासा भी कर दिया था।