आदिवासियों को टारगेट कर रहे हैं भाजपाई भूमाफिया: भूरिया

shailendra gupta
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने कहा है कि प्रदेश के आदिवासी अब केवल खेती पर ही निर्भर रह गये हैं। ऐसी दशा में यदि उनको उनके कब्जे की भूमि से भी बेदखल किया जाता है तो उसका सीधा-सीधा अर्थ यही है कि उनके लिए सरकार द्वारा भूखों मरने के हालात पैदा किये जा रहे हैं। 

जैसे-जैसे विधान सभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं-सत्तारूढ़ भाजपा के चहेते भूमाफियाओं ने प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर आदिवासियों और दलितों की भूमि छीनने की अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। भूरिया ने कहा कि जबलपुर जिले की पनागर तहसील में भूमाफियाओं ने सरकारी जमीन पर वर्षों से काबिज आदिवासी परिवारों को अपनी रसूखदारी और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिली भगत के दम पर बेदखल कर जमीन पर कब्जा कर लिया है। भूमाफियाओं में इन दिनों इस तरह आदिवासियों की पट्टे की जमीनें और अस्थाई कब्जे की सरकारी जमीनें हड़पने की होड़ सी लगी हुई है और जिला प्रशासन अंधा-बहरा बन चुप्पी साधे बैठा है।

श्री भूरिया ने कहा है कि पनागर तहसील के ग्राम डोंगरबडेरा में कई एकड़ जमीन म.प्र. शासन के नाम दर्ज है। इस जमीन पर दर्जनों आदिवासी परिवार कई वर्षों से बसे हुए हैं और खेती कर अपना भरण-पोषण कर रहे हैं। जिला प्रशासन को भी इसकी जानकारी है, लेकिन कुछ दिन पूर्व कुछ भूमाफियाओं ने आदिवासियों को वहां से खदेड़ कर अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर वह जमीन राजस्व रिकार्ड में अपने नाम करवा ली है। 

बेदखल आदिवासी परिवार अपनी फरियाद लेकर यहां-वहां भटक रहे हैं। वे प्रभारी कलेक्टर, जबलपुर के पास भी गुहार कर चुके हैं, किंतु उन्हें जमीन वापस नहीं मिली है। पीडित आदिवासियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर जबरिया कब्जा करने का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। विरोध करने पर मूल कब्जाधारियों को भूमाफियाओं द्वारा जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। 

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि जिला प्रशासन भी गरीब आदिवासियों की मदद में खड़ा होने की बजाय रसूखदार भूमाफियाओं की मदद करता हुआ दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों बेदखल आदिवासी परिवारों ने प्रभारी कलेक्टर से मुलाकात कर ऐसे 33 रसूखदारों की सूची सौंपी है, जिन्होंने आदिवासी परिवारों को बेदखल कर सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। आपने कहा है कि सरकारी जमीन पर जबरिया कब्जा करने वाले लोग रांझी, ग्वारीघाट और तिलवारा घाट के बताये गए हैं। प्रभारी कलेक्टर ने पनागर के तहसीलदार को जांच सौंपी है। आपने राजस्व मंत्री से मांग की है कि वे किसी उच्च प्रशासनिक अधिकारी से मामले की जांच कराएं तथा राज्य के अन्य जिलों में इस तरह के बेजा कब्जे न हो सकें, उसके लिए सख्त आदेश कलेक्टरों को दें।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!