झोलाछाप ने कर डाला आपरेशन

shailendra gupta
खिलचीपुर। शासन अपने स्तर पर झोलाछाप डाक्टरों के ईलाज से आम लोगों को बचाने के लिए कानून बना रहा है लेकिन आला अधिकारियों की अनदेखी से इन पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। वरन् इनके ईलाज से मरीजों को होने वाली घटनाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसी ही घटना नगर मे घटी जहां डाक्टर बंगाली शक्ति मालाकार ने एक व्यक्ति के हारनिया का आपरेशन कर दिया।

सूत्रों के अनुसार भोनीपुरा निवासी मानसिंह पिता माधोजी उम्र 40 साल को हारनिया की शिकायत थी जिसके उपचार के लिए झालावाड़ नाका स्थित डाक्टर बंगाली के क्लिनिक पर गया जहां डाक्टर ने उससे 9 हजार रूपये मे आपरेशन कर ठीक करने का ठेका लिया। 8-9 दिन पहले हुए इस आपरेशन के बाद परेशानी बढ़ने पर रोगी जिला चिकित्सालय गया जहां डाक्टरों ने उसे देखकर गलत आपरेशन होना बताया। इस पर पीडित ने स्थानीय पुलिस थाने खिलचीपुर पर मंगलवार शाम को रिपोर्ट दर्ज कराई।

इस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए तत्काल टी.आई. श्री पाठक ने संबंधित डाक्टर को थाने बुलवाकर पीढित का मेडिकल करवाया एवं चिकित्सक के प्रमाण पत्रों की जांच कर उसके विरूद्ध धारा 420, 324 म.प्र. रोगोपचार अधिनियम 1973 अंतर्गत धारा 8 क के (1 व 2) प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया। इस संबंध मे पीढित का मेडिकल करने वाले चिकित्सक एन.के.वर्मा से जब संवाददाता ने चर्चा की तो उन्होंने बताया कि पीढित के अंडकोस के नीचे लगभग दो इंच का चीरा लगा है एवं उसमे टांके तक नहीं लगाये गये हैं जिसकी वजह से घाव मे मवाद पड़ गया है। ये किसी प्रशिक्षित चिकित्सक का कार्य नहीं हो सकता।

यह चीरा लगभग 7-8 दिन पुराना है। पुलिस ने आरोपी चिकित्सक को गुरूवार को न्यायालय मे पेश किया जहां आरोपी चिकित्सक को पीढि़त के साथ समझौते के आधार पर जमानत पर छोड़ दिया गया।


पहले भी हो चुकी है घटनायें


झोलाछाप डाक्टर की चिकित्सा से होने वाली यह पहली घटना नहीं है। पूर्व मे भी समीपस्थ गांव ब्यावराकलां मे ऐसे ही एक चिकित्सक के लगाये इंजेक्शन से एक चार वर्षीय बालक की मृत्यु हो चुकी है। इसी प्रकार कुछ दिन पूर्व नवदुनिया ने ड्रेसर कर रहा है ईलाज शीर्षक से शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोमवारिया मे ड्रेसर द्वारा ग्रामीण मरीजों की चिकित्सा किये जाने का मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिस पर एस.डी.एम. माधवी नागेन्द्र द्वारा जिला चिकित्सा अधिकारी को संबंधित कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज तक संबंधित के विरूद्ध किसी प्रकार की ठोस कार्यवाही नहीं की गई।

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