कहीं गुजरात चुनाव में तो नहीं लगा वालमार्ट की घूस का पैसा: विजयवर्गीय

shailendra gupta
वालमार्ट घूसखोरी मामले में 125 करोड़ का हिसाब भले नहीं मिला हो पर आज मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ट केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस राशि का ज़िक्र गुजरात चुनाव से जोड़ कर नया रुख दे दिया है, उनका कहना है की गुजरात चुनाव से ठीक पहले रिटेल FDI की हड़बड़ी और गुजरात चुनाव में कांग्रेस द्वारा बेहिसाब पैसा बहाना जांच का विषय है जिसपर चुनाव आयोग को नज़र रखना चाहिए,125 करोड़ की राशि काफी बड़ी होती है.


कांग्रेस के वरिष्ट नेताओं ने इसपर टिपण्णी करने से मना कर दिया है,साथी ही जांच रिपोर्ट आने पर ही कुछ कहने को कहा.केन्द्रीय संसदीय कार्यमंत्री ने कहा की 125 करोड़ की राशि की जांच करवाई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया गया तो सख्त कार्यवाही की जायेगी समय सीमा के बारे में अभी कुछ भी नहीं बताया.

इससे पहले भारती वॉलमार्ट ने मुख्य वित्त अधिकारी पंकज मदान समेत अपने पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। खुदरा दुकानदारी करने वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट कुछ देशों के अपने प्रतिष्ठानों के अधिकारियों पर कारोबार के लिए भ्रष्ट तरीके अपना ने के आरोपों की आंतरिक स्तर पर जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई उसी जांच के सिलसिले में की गयी है। उसका यह थोककारोबार करने वाला उपक्रम स्थानीय भारतीय समूह के साथ 50:50 की हिस्सेदारी में है। जांच आगे बढ़ने के साथ कंपनी के कुछ और अधिकारी इसकी चपेट में आ सकते हैं। निलंबन की पुष्टि करते हुए भारती वॉलमार्ट के प्रवक्ता ने कहा हम पूरी जांच करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जांच पूरी होने से पहले इस पर कोई टिप्पणी करना हमारे लिए अनुचित है।सूत्रों ने बताया कि भारत और कुछ अन्य देशों में वालमार्ट पर रिश्वत देने के आरोपों की जांच के मद्देनजर मंगलवार को भारती वालमार्ट के मुख्य वित्त अधिकारी मदान और कंपनी के कानून विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

भारत के बहु ब्रांड खुदरा बाजार में प्रवेश के लिए सालों से बेकरार दुनिया की प्रमुख रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने 2008 से अमेरिकी सांसदों के बीच लॉबिंग पर 2.5 करोड़ डालर (लगभग 125 करोड़ रुपये) खर्च किए. वॉलमार्ट ने लॉबिंग पर खर्च के बारे में अमेरिकी सीनेट को दी गयी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में निवेश तथा अन्य लॉबिंग गतिविधियों पर उसने 2008 से 2.5 करोड़ डालर खर्च किए हैं.कंपनी ने 30 सितंबर, 2012 को समाप्त तिमाही में विभिन्न लॉबिंग पर 16.5 लाख डालर (लगभग 10 करोड़ रुपये) खर्च किए. इसमें भारत में एफडीआई पर चर्चा से संबंधित मुद्दा भी शामिल है.

तिमाही के दौरान वॉलमार्ट ने अमेरिकी सीनेट, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) और अमेरिकी विदेश विभाग के समक्ष अपने मामले में लॉबिंग की.अमेरिका में कंपनियों को किसी मामले में विभायों या एजेंसियों के समक्ष लॉबिंग की अनुमति है, लेकिन लॉबिंग पर हुए खर्च की रिपोर्ट तिमाही आधार पर सीनेट में देनी होती है.

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