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भोपाल एनकाउंटर: पढ़िए चश्मदीदों के बयान

Tuesday, November 1, 2016

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मध्य प्रदेश की भोपाल सेंट्रल जेल से भागे सिमी के आठ आतंकियों के एनकाउंटर से जुड़े एक के बाद एक कई वीडियो सामने आ रहे हैं। इस बीच एनकाउंटर के कथित चश्मदीद गवाह भी अपनी अपनी कहानियां बता रहे हैं। मामला काफी उलझ गया है परंतु एक बात तय है कि आतंकवादी मारे गए। फिलहाल पढ़िए, चश्मदीदों की बयानी: 

अचारपुर गांव निवासी किसान ललित मीणा ने बताया कि,' मैंने सबसे पहले आतंकियों को खेत के पास देखा था, जहां वो आराम से नमकीन और ड्राई फ्रूट्स खा रहे थे। जेल से भागे आतंकियों के बारे में मुझे भी सूचना मिल चुकी थी। खेत के पास बैठे आठ लोगों पर शक हुआ तो मैंने उनसे सवाल किए, जिस पर आतंकियों ने कोई जवाब नहीं दिया। शक हुआ तो तुरंत गांव वालों को इस बारे में बताया, जिसके बाद पुलिस को भी सूचित किया गया।

मीणा लाल की मानें तो 'आतंकी भागते हुए खेत से करीब एक-डेढ़ किलोमीटर दूर पहाड़ी तक आए थे और बार-बार नारे लगा रहे थे। पुलिस के पहुंचने के कुछ देर बाद सेना भी आ गई, जिसके बाद आतंकियों का एनकाउंटर हुआ। 

खेजड़ा गांव के सरपंच मोहनसिंह मीणा भी आतंकवादियों के बारे में पुलिस को सूचित करने वालों में से एक थे। मोहनसिंह ने बताया कि 'सुबह पुलिसकर्मी मेरे पास सिमी आतंकियों के फरार होने के बारे में सूचना लेकर आए थे। उन्होंने किसी भी संदिग्ध के दिखाई देने पर तुरंत सूचना देने के लिए कहा था। टीवी पर आतंकवादियों के चेहरे देखे तो मैंने फोन कर पास के गांव में अपने एक दोस्त को भी इस बारे में सूचित किया। मेरे दोस्त ने बताया कि उसे अभी पता चला है कि एक खेत में काम कर रहे एक किसान को संदिग्ध लोग दिखाई दिए हैं। 

ये जानकारी मिलते ही मैंने अपने एक अन्य दोस्त को गाड़ी लाने को कहा और हम दोनों बताए गए स्थान पर जा पहुंचे। नदी के पास पहुंचने पर हमें पानी में से एक शख्स निकलता नजर आया। हमें लगा कि वो सादी वर्दी में कोई पुलिसवाला है, लेकिन कुछ ही देर में एक-एक कर और आदमी पानी में से निकले, जिससे मुझे एहसास हो गया कि ये लोग आतंकवादी हैं।

मैंने तुरंत पुलिस को फोन किया, फिर आतंकियों को रोकने के इरादे से उन्हें आवाज देने लगा। नजदीक जाने की कोशिश की तो आतंकी भड़क गए और उन्होंने धमकी दी कि वो पास आए तो उन्हें गोली मार देंगे। 

पीछे हटते हुए मैंने अपने दोस्त से वापस गांव जाकर सभी आदमियों को इकट्ठा कर लाने को कहा। इस बीच आतंकी पहाड़ी पर चढ़ गए। करीब 25-30 मिनट में पुलिस भी आ गई और उन्होंने आतंकवादियों को घेर लिया। 

सरपंच मोहनसिंह ने बताया, 'पुलिस ने सिमी आतंकियों को सरेंडर करने के लिए कहा था. डराने के लिए पुलिस ने हवाई फायर भी किए थे, लेकिन आतंकी उन पर पत्थर फेंकने लगे। इस बीच पहाड़ी के पीछे से आई पुलिस की टीम आतंकियों के पास जा पहुंची, जिसके बाद मुठभेड़ हुई।

एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि उनके गांव में सुबह पुलिसवाले आए थे, जिन्होंने उन्हें आतंकवादियों के जेल से भागने के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने ये भी कहा था कि आतंकियों के दिखाई देने पर डायल 100 पर सूचना दी जाए। 

जब उन्हें पता चला की आतंकी गांव में दिखाई दिए हैं तो ग्रामीण भी वहां पहुंचे और उन्होंने मदद करते हुए आतंकवादियों को घेरा। इस घेरे के अंदर पुलिस का घेरा था, जिन्होंने बाद में एनकाउंटर किया। 
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