MP NEWS: प्रत्येक शिक्षक ने औसत 1 लाख रुपए रिश्वत दी, EOW एवं ED की जांच का निष्कर्ष

Updesh Awasthee
भोपाल, 1 अक्टूबर 2026
: ई-अटेंडेंस के लिए ₹300 के रिचार्ज की मांग करने वाले मध्य प्रदेश के सरकारी शिक्षक, अपने ही स्कूल शिक्षा विभाग के बाबू को अपने सेवा काल में कम से कम 1 लाख रुपए की रिश्वत देते हैं। यदि उनके बैंक अकाउंट में वेतन आने में एक दिन की देरी हो जाए तो आसमान सिर पर उठा लेते हैं लेकिन इनके डिपार्टमेंट का बाबू, रिंग मास्टर बनकर इनको बंदर की तरह नचाता है और यह नाचते रहते हैं। सामान्य तौर पर शिकायत ही नहीं करते, यह हम नहीं कह रहे हैं EOW और ED की जांच का निष्कर्ष है। एक बाबू के पास से 1.64 करोड़ की अवैध संपत्ति कुर्क की गई है, उसके पास लगभग 150 शिक्षकों का हिसाब किताब था। बाबू की दहशत ऐसी कि, शिकायत करना तो दूर की बात, किसी ने चुपके से किसी पत्रकार तक को नहीं बताया। फिर एक अज्ञात व्यक्ति ने शिकायत की, तब कहीं जाकर मामले का खुलासा हुआ।

रिश्वतखोरी से क्लर्क कितना पैसा कमा लेता है 

इस मामले को पढ़ने के बाद आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएगी। 25000 स्क्वायर फीट में मकान बनाया है। मतलब मकान क्या है पूरा महल है। अनुकंपा नियुक्ति मिली थी मतलब पिता की मृत्यु के बाद घर में खाने के लिए दाने भी नहीं थे। अब अपने बेटे के लिए 30000 स्क्वायर फीट में प्राइवेट स्कूल बनवाया है ताकि यदि उनको महेंद्र भैया को कुछ हो जाए तो बेटे को अनुकंपा नियुक्ति के लिए किसी के सामने हाथ ना फैलाना पड़े। काली कमाई से पैदा हुए स्वाभिमान में अहंकार भी है, सवारी के लिए फॉर्च्यूनर कर खरीदी है और दो बुलडोजर (JCB) भी है। इसके अलावा भी बहुत कुछ है, पढ़िए।

EOW की FIR के बाद ED की जांच

ईडी ने इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b) सहपठित धारा 13(2) के तहत महेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद ईओडब्ल्यू, भोपाल ने रीवा (मध्य प्रदेश) स्थित माननीय विशेष न्यायालय के समक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 120B तथा भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत अंतिम रिपोर्ट/आरोप पत्र दाखिल किया था। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि 13 फरवरी 1995 से 09 सितंबर 2020 की जांच अवधि (check period) के दौरान, महेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से लगभग 1.64 करोड़ रुपये की असमान संपत्ति अर्जित की। 

रीवा में महेंद्र प्रताप सिंह एवं रीति सिंह की संपत्ति कुर्क

सार्वजनिक सेवक के पद पर रहते हुए अवैध रूप से अर्जित अपराध की आय (Proceeds of Crime) का उपयोग बीमा पॉलिसियों, वाहनों, भूमि के टुकड़ों की खरीद तथा स्कूल भवन के अधिग्रहण व निर्माण में किया गया था। आरोपी अपनी इन संपत्तियों के आय स्रोत को सिद्ध करने में विफल रहे। इसके आधार पर, ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत रीवा (मध्य प्रदेश) स्थित भूमि के टुकड़े और स्कूल भवन सहित लगभग 1.64 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है। ईडी के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है। 

गोपनीय शिकायत के बाद सामने आई भ्रष्टाचार की कहानी 

EOW द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, महेंद्र प्रताप सिंह के पिता स्व. भैयालाल सिंह की मृत्यु के पश्चात् वर्ष 1994-95 में जिला रीवा के शिक्षा विभाग में उसकी सहायक ग्रेड-3 के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति हुई थी। वह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहाड़ी (पहाड़ी संकुल, जिला रीवा) में पदस्थ था। पहाड़ी संकुल के अंतर्गत लगभग 150 शिक्षक आते हैं। संकुल का क्लर्क होने के नाते महेंद्र प्रताप सिंह ही शिक्षकों के प्रॉविडेंट फंड (PF), ग्रेच्युटी के पैसे निकालने, छुट्टी मंजूर कराने और वेतन वृद्धि लगाने का काम संभालता था। इसी पद और अधिकारों का दुरुपयोग करके उसने शिक्षकों से अवैध कमीशन और रिश्वत के जरिए भारी संपत्ति अर्जित की। गोपनीय शिकायत सत्यापन के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल ने उप-निरीक्षक गरिमा त्रिपाठी की जांच रिपोर्ट पर 08 सितंबर 2020 को धारा 13(1)(b), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और 120B भादवि के तहत मामला दर्ज किया। 

महेंद्र प्रताप सिंह की कमाई और खर्चों का विवरण

ज्ञात स्रोतों से कुल वैध आय: ₹46,80,656/- (छियालीस लाख अस्सी हजार छह सौ छप्पन रुपये)।
कुल व्यय और संपत्ति अर्जन: ₹2,80,98,125/- (दो करोड़ अस्सी लाख निन्यानवे हजार एक सौ पच्चीस रुपये)।
आय से अधिक संपत्ति: आरोपी ने अपनी ज्ञात वैध आय से लगभग 600% अधिक संपत्ति अर्जित की थी।

काली कमाई से खरीदी गई संपत्तियों की सूची

एफआईआर दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2003 से 2020 के बीच आरोपी महेंद्र प्रताप सिंह, उसकी पत्नी रीता सिंह और पुत्र हिमांशु सिंह के नाम खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा:
क. कृषि भूमि (ग्राम गनिगवां, तहसील हनुमना, जिला रीवा)
वर्ष 2003-04: खसरा नं. 21/1/ख (रकबा 0.5880 हेक्टेयर) - गाइडलाइन मूल्य: ₹1,45,530/-
वर्ष 2009-10: खसरा नं. 112/7 (रकबा 0.0890 हेक्टेयर) - गाइडलाइन मूल्य: ₹41,919/-
वर्ष 2014-15: खसरा नं. 113/2, 192/4, 114/5 (स्वयं) तथा खसरा नं. 117/5 (पत्नी रीता सिंह के नाम, कुल रकबा 1.282 हेक्टेयर) - गाइडलाइन मूल्य: ₹11,08,289/-
वर्ष 2017-18: कुल 07 खसरों की भूमि (रकबा 0.511 हेक्टेयर) - गाइडलाइन मूल्य: ₹4,85,450/-
(कुल कृषि भूमि क्रय मूल्य: ₹17,81,188/-)

ख. आलीशान मकान व स्कूल भवन
भव्य आवासीय भवन: ग्राम गनिगवां में लगभग 25,000 वर्गफिट भूमि पर बाउंड्रीवॉल बनवाकर उसके भीतर 8,000 वर्गफिट क्षेत्र में एक मंजिला आलीशान मकान, अनुमानित निर्माण लागत: ₹72,000,000/- (72 लाख रुपये)।
ब्रॉड विजडम पब्लिक स्कूल: रीवा-हनुमना सोनौरी मुख्य मार्ग पर वर्ष 2019 में लगभग 30,000 वर्गफिट क्षेत्र में स्कूल भवन का निर्माण कराया, अनुमानित निर्माण लागत: ₹81,000,000/- (81 लाख रुपये)।

ग. वाहनों का काफिला (स्वयं, पत्नी व पुत्र के नाम)
  • लोडर/जे.सी.बी. (MP-17 DA 0661): ₹24,59,200/-
  • फॉर्च्यूनर कार: ₹22,23,000/-
  • जे.सी.बी. मशीन: ₹23,00,000/-
  • कमांडर जीप (MP-17 T 3280): ₹9,71,004/-
  • बोलेरो (MP-17 TA 3271): ₹9,28,529/-
  • ट्रैक्टर (MP-17 S 0122): ₹5,30,000/-
  • मोटरसाइकिल (MP-17 MX 2678): ₹60,588/-
(सभी 07 वाहनों का कुल क्रय मूल्य: ₹94,72,321/-)

घ. अन्य निवेश एवं खर्चे
पुत्र एवं पुत्री की शिक्षा पर किया गया भारी व्यय।
बैंक खातों में जमा, शेयर बाजार और बीमा पॉलिसियों (Insurance Policies) में किया गया निवेश।

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