भोपाल, 28 अक्टूबर 2026: बंगाल विभाजन के समय शुरू हुआ स्वदेशी आंदोलन देश की स्वतंत्रता की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पहलू था। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार सरकार सीधे तौर पर नहीं कर सकती, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से स्वदेशी अपनाने का आह्वान कर रहे हैं। यह बात भाजपा विधायक अमरीश शर्मा ने स्वदेशी मेले के चौथे दिन आयोजित कार्यक्रम में कही।
स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के समन्वय से शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर, भोपाल में 24 अक्टूबर से 4 नवंबर तक स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले में देश में बने उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मंच दिया जा रहा है।
अमरीश शर्मा ने कहा कि चीन जैसे देश समय-समय पर भारत को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने और स्वदेशी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि पहले हम स्वयं स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करें। अपने जीवन में स्वदेशी को अपनाने के बाद आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
स्वदेशी केवल वस्तु नहीं, देश के प्रति भावना है: राघवेंद्र शर्मा
योग आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि स्वदेशी एक भावना, विचार और संकल्प है। अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने का भाव ही स्वदेशी है। अंग्रेजों ने जब बंगाल का विभाजन किया था, तब उसके विरोध में बड़ी संख्या में देशवासी खड़े हुए थे। यह भी स्वदेशी भावना का ही उदाहरण था।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम, महापुरुषों और ऋषि-मुनियों के आदर्शों से भी स्वदेशी की भावना को समझा जा सकता है। रावण को पराजित करने के बाद जब श्रीराम को सोने की लंका में रहने का सुझाव दिया गया, तब उन्होंने अपनी मातृभूमि लौटना उचित समझा। यह अपने देश के प्रति प्रेम का उदाहरण है। आज देश आगे बढ़ रहा है, लेकिन स्वदेशी की भावना को और मजबूत करने के लिए जरूरी है कि सामान खरीदते समय भी विचार करें कि वह स्वदेशी है या नहीं। देश के प्रति सच्चा प्रेम अपने व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
छोटे प्रयासों से बड़ी सफलता मिलेगी: संजीव अग्रवाल
सेज ग्रुप के चेयरपर्सन संजीव अग्रवाल ने कहा कि स्वदेशी शब्द में ही ऊर्जा का भाव है। भारत पहले बहुत विकसित था, लेकिन कुछ कारणों से पीछे रह गया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी की भावना को फिर से सामने लाने का प्रयास किया है। दूसरों को देखकर प्रसन्न होने के बजाय जरूरी है कि हम स्वयं अपने देश और उसके उत्पादों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें।
अग्रवाल ने कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करना जरूरी है। बार-बार असफल होने के बाद ही सफलता मिलती है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसका परिणाम बड़ा हो सकता है।
मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा ने कहा कि इस मेले के माध्यम से उन स्वदेशी कंपनियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलता है, जिन्हें बड़े मंचों पर पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से देश का पैसा देश में ही रहता है और घरेलू कंपनियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मेले से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा। मीडिया प्रभारी महेंद्र चौहान मुताबिक, मेले में कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलेगा। इसके जरिए युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों को भी स्वरोजगार व उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों की प्रतियोगिताएं भी 12 दिन चलने वाले मेले में प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। स्कूली बच्चों के कार्यक्रम के अलावा युवाओं को स्वदेशी विचार से जोड़ने के लिए नाटक और नृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है । आयोजकों का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
लोककलाओं और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां हुईं
मेले के चौथे दिन दिन में महापुरुषों पर नारा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने महापुरुषों के विचारों और उनके योगदान पर आधारित नारे प्रस्तुत किए। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद गणेश वंदना, महिला मंडल की ओर से भक्ति संगीत, कथक नृत्य और माता की स्तुति की प्रस्तुतियां दी गईं।
YGB की पहल – युवाओं को भक्ति से जोड़ने की एक नई पहल
स्वदेशी मेले में YGB की पहल के अंतर्गत युवाओं को भक्ति और आध्यात्मिकता से जोड़ने के उद्देश्य से भक्ति संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें गायक समीर नेगी, प्रभुत मिश्रा और सोनम ने ‘सांसों की माला पर’, ‘सियाराम-सियाराम’ सहित अन्य भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां दीं। भक्ति गीतों के माध्यम से कलाकारों ने श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बनाया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और भक्ति संगीत से जोड़ना है।
कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी और विनय कुमार सोनी, दत्तो पंत ठेंगरी शोध संस्था के निदेशक मुकेश मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। रिपोर्ट: महेंद्र सिंह चौहान, मीडिया प्रभारी, स्वदेशी मेला, भोपाल।

