भोपाल, 26 अक्टूबर 2026: भोपाल विकास योजना-2047 (ड्राफ्ट) में प्रस्तावित परागमन उन्मुख विकास (TOD - Transit Oriented Development) नीतियों को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। 'नगर विकास मंच, मध्य प्रदेश' द्वारा संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) को सौंपी गई आपत्ति में आरोप लगाया गया है कि विकास योजना का वर्तमान प्रारूप राष्ट्रीय TOD नीति के नियमों के विरुद्ध है। संगठन ने मांग की है कि इस प्रारूप को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर शून्य घोषित किया जाए।
Bhopal Master Plan 2047 Objection: Why MP TOD Policy Faces Cancellation Demand
मास्टर प्लान 2047 पर उठा बड़ा विवाद भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट में शामिल TOD नीति को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। नगर विकास मंच ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि योजना में शामिल किए गए प्रावधान राष्ट्रीय स्तर पर तय मानकों से मेल नहीं खाते हैं। मंच के अनुसार, वर्तमान प्रारूप में नगर नियोजन के मूलभूत सिद्धांतों की अनदेखी की गई है, जिससे भोपाल के नागरिकों के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति निर्मित हो रही है।
National vs MP TOD Policy Difference: Corridor Width and Square vs Horizontal Model
राष्ट्रीय और राज्य TOD नीति में जमीन-आसमान का अंतर आपत्ति में मुख्य रूप से केंद्रीय और राज्य की नीतियों के बीच के अंतर को रेखांकित किया गया है। राष्ट्रीय TOD नीति (बिंदु 2.2) के अनुसार, TOD का प्रभाव क्षेत्र किसी ट्रांजिट स्टेशन से केवल 500 से 800 मीटर की पैदल दूरी तक सीमित रहता है, जो कि एक वर्गाकार क्षेत्र (500 मी. × 500 मी.) के रूप में विकसित किया जाता है। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश की TOD नीति (मसौदा)-2018 के तहत मेट्रो या मोनोरेल कॉरिडोर की केंद्र रेखा से दोनों ओर 500 मीटर और अन्य सार्वजनिक परिवहन मार्गों पर 300 मीटर चौड़ी पट्टी के रूप में horizontal तरीके से 5 से 10 किलोमीटर या उससे भी अधिक लंबे क्षेत्र को TOD घोषित करने का प्रावधान किया गया है।
Bhopal TOD Area Discrepancy: Narmadapuram Road and Berasia Road Master Plan Issues
अव्यावहारिक प्रस्ताव और 'गुप्त एजेंडे' का अंदेशा मास्टर प्लान 2047 के प्रारूप में नर्मदापुरम रोड और बैरसिया रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर की लंबाई तक TOD क्षेत्र प्रस्तावित कर दिए गए हैं। नगर विकास मंच ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए अंदेशा जताया है कि ये प्रस्ताव किसी छिपे हुए उद्देश्य (Hidden Agenda) को ध्यान में रखकर तैयार किए गए प्रतीत होते हैं। इसके अलावा, पूरे ड्राफ्ट में मेट्रो स्टेशनों की सटीक लोकेशन अंकित नहीं की गई है; सुभाष नगर, भोपाल, रानी कमलापति और मिसरोद जैसे प्रमुख स्टेशनों को केवल प्रतीकों (Symbols) से दर्शाया गया है।
TOD Policy in Developed Bhopal Areas: Nadra Bus Stand and Bairagarh Urban Planning Concerns
पूर्व से विकसित क्षेत्रों में नीति के क्रियान्वयन पर सवाल ड्राफ्ट में शहर के पहले से ही अत्यधिक निर्मित और घनी आबादी वाले क्षेत्रों जैसे नादरा बस स्टैंड, बौरागुलिया (बैरागढ़), करोंद और मंडी क्षेत्र में भी TOD लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है। आपत्ति में प्रश्न उठाया गया है कि जो क्षेत्र पहले से पूरी तरह विकसित हो चुके हैं, वहां उच्च घनत्व और मिश्रित भू-उपयोग वाली TOD नीति को व्यावहारिक रूप से कैसे लागू किया जाएगा, इसकी कोई स्पष्ट कार्ययोजना ड्राफ्ट में नहीं दी गई है।
Bhopal Land Use Plan Demand: Section 14 and 15 Act Rules for Development Plan 2047
अधिनियम की धाराओं का पालन और वर्तमान भू-उपयोग मानचित्र की मांग नगर विकास मंच ने मांग की है कि नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 14 एवं 15 का कड़ाई से पालन किया जाए और भोपाल का वास्तविक वर्तमान भू-उपयोग मानचित्र (Existing Land Use Plan) जारी किया जाए। इससे शहर की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और एक व्यावहारिक व कार्यात्मक विकास योजना तैयार की जा सकेगी। संस्था ने आग्रह किया है कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक वर्तमान भोपाल विकास योजना-2047 (ड्राफ्ट) को शून्य (Null & Void) घोषित किया जाए।

