भोपाल, 31 अक्टूबर 2026: लोगों को लगता है कि 108 इमरजेंसी सेवा में काम करने वाले लोग मक्कार हैं, इसलिए उनको सेवा नहीं मिल पा रही है लेकिन असलियत यह है कि सिस्टम सड़ गया है। प्रमाण यह है कि, 108 एंबुलेंस सेवा में इमरजेंसी रिस्पांस ऑफिसर के पद पर काम करने वाले एक युवक का एक्सीडेंट हो गया। उसने 108 को कॉल करके एंबुलेंस भेजने के लिए कहा, पूरे 7 मिनट तक गिड़गिड़ाता रहा लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। 108 सेवा का अधिकारी घायल स्थिति में 4 घंटे तक तड़पता रहा। फिर उसके दोस्त आए और उसे अस्पताल ले गए।
अनिल की अपनी टीम उसके लिए एंबुलेंस नहीं भेज पाई
108 एंबुलेंस सेवा के इमरजेंसी रिस्पांस ऑफिसर अनिल ओंठ ने अब वीडियो जारी कर अपनी आपबीती बताई है। 17 अक्टूबर को नादरा रोड पर अभिनव हॉल के पास हादसा हुआ। सड़क पर खड़े साइकिल सवार को बचाने के दौरान उनकी बाइक फिसल गई। हादसे में उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया और आंखों पर भी चोट आई। अनिल ने बताया कि उन्होंने तुरंत 108 पर कॉल किया। करीब सात मिनट तक बातचीत चली। उन्होंने अपनी पहचान ईआरओ के रूप में बताई। उनके मुताबिक, शिफ्ट मैनेजर और टीम लीडर ने उन्हें पहचान लिया, लेकिन बताया कि आसपास की एंबुलेंस व्यस्त हैं। उन्हें निजी वाहन करने या 112 से संपर्क करने की सलाह दी गई। आखिरकार चार घंटे बाद उनके दोस्त आए और उन्हें अस्पताल ले गए।
वीडियो हटाने का दबाव
अनिल ने वीडियो में सवाल उठाया कि जब 108 सेवा में काम करने वाले ईआरओ को ही जरूरत के वक्त एंबुलेंस नहीं मिली, तो आम लोगों को कितनी मदद मिलती होगी। उनका आरोप है कि अधिकारी उन पर वीडियो हटाने और शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में शिकायत दर्ज कराई है। अनिल का कहना है कि वे शिकायत वापस नहीं लेंगे, क्योंकि समय पर मदद नहीं मिलने का मामला सिर्फ उनका नहीं, आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है।
भोपाल में 42 एंबुलेंस, 10 से ज्यादा खराब
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, भोपाल में कंपनी 42 एंबुलेंस के संचालन का दावा करती है, लेकिन 10 से ज्यादा गाड़ियां खराबी के कारण इस्तेमाल नहीं हो पा रही हैं। अक्टूबर में एंबुलेंस सेवा के भोपाल प्रभारी अवधेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे से पहले उन्होंने कंपनी के सामने 10 एंबुलेंस के मेंटेनेंस की मांग रखी थी।
उनका कहना था कि खराब व्यवस्था के कारण संचालन मुश्किल हो रहा था और कई मामलों में मरीजों तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही थी। अवधेश ने कहा कि एंबुलेंस आपातकालीन सेवा है। गाड़ियों का सही रखरखाव नहीं होने पर मरीजों तक समय पर मदद पहुंचाना मुश्किल है। उन्होंने इसी परिस्थिति में काम जारी रखने में असमर्थता जताई।
ब्रेक, स्टीयरिंग और इंजन तक में खराबी उपलब्ध सूची में खराब गाड़ियों की समस्याएं भी दर्ज हैं। इनमें CG04NZ1427 में ब्रेक की समस्या, CG04NV6405 में ब्रेक और ड्राई सॉफ्ट से जुड़ा काम, CG04NW2553 में स्टीयरिंग की खराबी, CG04NE3601 में क्लच की समस्या, CG04NZ1349 में बेयरिंग की खराबी, CG04NZ1311 में इंजन का काम और MP13AJ6112 में यूरिया पंप की समस्या बताई गई है। ये गाड़ियां खराबी के कारण ऑफ रोड बताई गई हैं।
गर्भवती की हालत बिगड़ी, एक घंटे नहीं मिली एंबुलेंस
समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने का एक और मामला गोविंदपुरा का है। यहां एफसीएम इंजेक्शन देने के बाद गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ गई। उसका ब्लड प्रेशर 50/29 एमएमएचजी तक गिर गया, पल्स 150 से 180 प्रति मिनट रही और ऑक्सीजन का स्तर 85% हो गया।
महिला को प्राथमिक उपचार और ऑक्सीजन दी गई, लेकिन संबंधित कर्मचारियों के अनुसार करीब एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली। गंभीर हालत देखते हुए डॉ. पार्थ, डॉ. संदीप और नर्सिंग ऑफिसर अनुराधा व पूजा उसे निजी वाहन से एम्स लेकर गए। डीएचओ-1 डॉ. दिलीप हलमाडे भी अस्पताल पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महिला की हालत अब स्थिर है और वह डॉक्टरों की निगरानी में है।
कंपनी बोली- उस दिन एंबुलेंस व्यस्त थीं
108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने कहा कि अनिल से बात की गई है। उनका कहना है कि उन्हें 108 सेवा से कोई शिकायत नहीं है। घटना वाले दिन कई केस होने के कारण एंबुलेंस व्यस्त थीं।
अधिकारी बोले- जांच के बाद करेंगे कार्रवाई
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़ी शिकायतें लगातार मिल रही हैं। 10 एंबुलेंस के ऑफ रोड होने की शिकायत भी मिली है। मामले की जांच कराई जा रही है और जल्द कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के अनुसार, शिकायत प्राप्त हुई है। कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

