भोपाल, 15 सितंबर 2026: लगता नहीं है लेकिन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी पॉलिटिक्स के ऐसे पहलवान हैं जो दुनिया को दिखाने के लिए नहीं बल्कि अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए लड़ते हैं। लेटेस्ट उदाहरण देखने को मिला जब एक सरकार होने के नाते धर्म संकट की स्थिति बन गई थी। फिर उमा भारती से एक बयान दिलवाया गया। खुद मिलने के लिए घर गए, और हो गया काम। भारत माता की जय।
सोमवार को श्री गणेश चतुर्थी की अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती के बीच हुई मुलाकात की चर्चा सर्वत्र हो रही है, होना भी चाहिए। लोग कह रहे हैं कि कोई प्रोग्राम नहीं था, अचानक घर गए थे, शायद लोग नहीं जानते कि प्रोग्राम यही था। शेड्यूल में जारी नहीं करेंगे और अचानक जाएंगे ताकि ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाए। मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री इतने हो गए कि अपने आप में एक पार्टी की ताकत रखते हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को केवल विपक्ष की पार्टी से मुकाबला नहीं करना पड़ता बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री के क्लेश का सामना भी करना पड़ता है। जितने भी जीवित हैं, सब स्वस्थ हैं और राजनीति में गजब की सक्रिय हैं। मतलब सबका अपना वोट बैंक है और सबके अपने फॉलोवर्स भी है। यदि यह सब मिल जाए तो मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री जनता पार्टी बन सकती है और कोई बड़ी बात नहीं की सरकार बना लें। खैर यह तो वह पॉलिटिकल गॉसिप, अब मुद्दे की बात।
तो मुलाकात हुई, बंद कमरे में दोनों की बात हुई। सिर्फ राखी बांधनी होती तो 15 मिनट में काम हो जाता है लेकिन यहां तो किसी बड़े मुद्दे पर बात हो रही थी। जब दोनों भाई बहन घर से बाहर आए, तो जितने भी लोगों ने चश्मा लगाया हुआ था, उन सबको वही दिखा जो उनके मन में था, लेकिन एक्चुअल में वह हो गया था जो इन दोनों भाई बहन के मन में था। काम भी हो गया और सरकार पर कलंक भी नहीं लगा। बस लोग इतना ही तो कहेंगे कि भाई, बहन के दबाव में आ गया।

