भोपाल, 8 सितंबर 2026: यदि आपके साथ कोई अन्य हो जाए तो क्या आपको निर्दोष नागरिकों के साथ अन्याय करने का अधिकार मिल जाता है? यह सवाल उन सभी MBBS इंटर्न्स से है, जिन्होंने कल शाम से भोपाल का ट्रैफिक डिस्टर्ब कर रखा है। वह स्वास्थ्य मंत्री से नाराज हैं, पुलिस के साथ उनका झगड़ा हुआ है लेकिन बदला लेने के लिए वह पब्लिक को परेशान कर रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की लाइन लगी है लेकिन MBBS इंटर्न्स ने जबरदस्ती OPD बंद करवा दी। भोपाल में हमीदिया अस्पताल का इमरजेंसी गेट नंबर 1 तक बंद कर दिया है। मतलब एंबुलेंस का रास्ता ब्लॉक कर दिया है। जिस एंबुलेंस को भारत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी रास्ता देते हैं, उसको एमबीबीएस स्टूडेंट्स ने बंद कर दिया है।
हड़ताल कर रहे MBBS स्टूडेंट क्या कर रहे हैं भोपाल में
- ट्रैफिक ब्लॉक कर दिया है जिसके कारण रोशनपुरा से लेकर रॉयल मार्केट तक ट्रैफिक जाम हो गया है। लोग अपनी दुकान, अपनी नौकरी पर टाइम से नहीं पहुंच पा रहे हैं। उनको डायवर्ट होकर जाना पड़ेगा। कुछ लोग तो लंच टाइम तक अपने ऑफिस या दुकान पहुंच पाएंगे।
- स्कूलों की छुट्टी का समय हो गया है लेकिन स्कूल बस को भी रास्ता नहीं दिया जा रहा है। पेरेंट्स परेशान है, बच्चों का क्या होगा। जो लोग पुलिस से लड़ सकते हैं, सरे आम ट्रैफिक ब्लॉक कर रहे हैं, वह कुछ भी कर सकते हैं।
- हमीदिया अस्पताल का इमरजेंसी गेट बंद कर दिया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों की एंबुलेंस को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। मतलब कोई गंभीर रूप से बीमार मेरी मर जाए तो, मर जाए, लेकिन उनकी मांग पूरी होनी चाहिए।
- स्टूडेंट्स ने धमकी दी है, जब तक हमारी मांगों पर बातचीत नहीं होगी, तब तक हम इसी सड़क पर बैठे रहेंगे।
- कमला पार्क की मुख्य सड़क शहर के केंद्र में है। इसके जाम होने से कमला पार्क के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में यातायात प्रभावित होता है। फिलहाल इसका असर कोहेफिजा सड़क तक पहुंच गया है। जल्द ही लालघाटी, जहांगीराबाद, जिंसी और बागड़ा पुल पर भी जाम की स्थिति बन सकती है।
- जवाहरलाल नेहरू कॉलेज सीएम हाउस के नजदीक है और वहां जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। मतलब अपना नहीं दूसरों का कॉलेज बंद कर दिया। इस इलाके में रहने वाले सैकड़ो परिवार अपने घरों में कैद हो गए हैं। रास्तों को इस तरह से बंद किया गया है कि पैदल चलने वाले लोग भी वहां से नहीं निकल पा रहे हैं। दूध, ब्रेड, स्कूल, ऑफिस, बाजार, अस्पताल कहीं भी आने जाने का रास्ता नहीं है।
- कमला पार्क का मुख्य गेट भी बंद कर दिया गया है। ऐसे में इलाके में रहने वाले सैकड़ों लोगों के लिए घर से बाहर निकलना और वापस लौटना मुश्किल हो गया है।
जीतू पटवारी ने आग में घी डाल दिया
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और पब्लिक को परेशान नहीं करने की अपील नहीं की बल्कि उनको और भड़का दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को खुद आकर आंदोलन कर रहे बच्चों से मिलना चाहिए और उनकी मांग सुननी चाहिए। पटवारी ने सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्ते पर लगाए गए बैरिकेड्स को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सीएम हाउस के रास्ते पर बैरिकेडिंग कर भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर बना दी गई है।
डॉक्टर नहीं इंटर्न है
मीडिया रिपोर्ट्स में एक बड़ी गलती की जा रही है। प्रदर्शन करने वालों को इंटर्न डॉक्टर कहा जा रहा है। जबकि इंटर्नशिप, स्टडी का एक हिस्सा होती है। अभी वह एमबीबीएस स्टूडेंट है, डॉक्टर नहीं बने हैं। इनको एमबीबीएस स्टूडेंट या एमबीबीएस इंटर्न्स कहा जाना चाहिए, लेकिन गलती मीडिया की नहीं है, क्योंकि जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के लेटर पैड पर प्रदर्शन करने वालों को डॉक्टर बताया गया है।
एमबीबीएस स्टूडेंट्स इतने नाराज क्यों है
वैसे तो इंटर्नशिप पढ़ाई का हिस्सा होता है लेकिन इस दौरान वह अपनी प्रोफेशनल सेवाएं देते हैं इसलिए प्रोत्साहन के रूप में उनका स्टाइपेंड दिया जाता है। स्टाइपेंड वेतन नहीं होता, स्टाइपेंड पारिश्रमिक भी नहीं होता, स्टाइपेंड किसी का अधिकार नहीं होता। यह एक प्रकार से पॉकेट मनी होता है। जैसे बच्चा करके काम में हाथ बताता है तो पेरेंट्स उसको पॉकेट में नहीं दे देते हैं, बिल्कुल वैसा ही है। स्टाइपेंड का निर्धारण, कोई भी संस्थान अपनी पॉकेट के अनुसार करता है और इंटर्नशिप के बदले स्टाइपेंड देने से मना भी कर सकता है। प्राइवेट सेक्टर में अफसर मना कर देते हैं, फ्री में इंटर्नशिप करनी पड़ती है। इनको सरकार ₹14,337 प्रतिमाह दे रही है। यह लोग ₹30000 प्रतिमाह की मांग कर रहे हैं। मतलब मामला उनके जीवन और मृत्यु का नहीं है। बस पॉकेट मनी का है। यह लोग अपनी पॉकेट में नहीं डबल करवाना चाहते हैं।
तो फिर पब्लिक को परेशान क्यों कर रहे हैं
डेढ़ महीने पहले स्वास्थ्य मंत्री से मिलने गए थे। इनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री ने इनको आश्वासन दिया था जो पूरा नहीं हुआ। नीलम पार्क में धरना दे रहे थे, इससे किसी को प्रॉब्लम नहीं है। चाहे तो अपनी इंटर्नशिप छोड़ भी सकते हैं। यदि सीनियर डॉक्टर इनका समर्थन करना चाहते हैं तो वह VIP मेडिकल सर्विस छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री से लेकर विधायक तक, सब का इलाज बंद कर सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया। डीसीपी गुप्ता ने कहा कि पहले बात पूर्वी गेट की तरफ जाने की हुई थी, लेकिन इमरजेंसी गेट पर पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। बदले में पुलिस ने वाटर कैनन चला दी। बस इस बात से नाराज होकर भोपाल शहर का ट्रैफिक जाम करने लग गए हैं। अस्पतालों के दरवाजे बंद कर रहे हैं। मरीज का इलाज नहीं होने दे रहे हैं।
पिछले 12 घंटे में प्रदर्शनकारियों ने भारतीय संविधान, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का कई बार उल्लंघन कर दिया है। जबकि इनका कहना है कि यह शांतिपूर्वक और संविधान के दायरे में रहते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। सवाल सिर्फ इतना है कि यदि, स्वास्थ्य मंत्री से नाराजगी है, तो उनको बोल बंगले से बाहर निकलने से रोक दो। भोपाल में रहने वाले सभी मंत्रियों के बंगलो के दरवाजे पर जाकर बैठ जाओ, लेकिन पब्लिक को परेशान करने की क्या जरूरत है। लाखों लोग, हजारों बच्चे, और सैकड़ो मरीजों में दहशत फैलाने की क्या जरूरत है। अपने अधिकारों को पाने के लिए जनता के संविधानिक अधिकारों का हनन करने का अधिकार किसने दिया।

