मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सतना में ससुराल वालों को वीडियो भेजने वाले को तुरंत जेल भेजने का आदेश

Updesh Awasthee
जबलपुर, 9 सितंबर 2026:
गंभीर अपराधों के आरोपी जमानत पर छूटने के बाद अक्सर स्वयं को एक स्वतंत्र नागरिक समझने लगते हैं, जबकि वास्तव में वह जमानत की शर्तों के अधीन जेल से बाहर होते हैं। हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश ने एक युवक की जमानत रद्द करके उसको तुरंत जेल भेजने का आदेश दिया, क्योंकि उसने युवती के वीडियो उसके ससुराल वालों को भेज दिए थे। उसको लगता था कि ऐसा करने से लड़की पर प्रेशर क्रिएट होगा और वह कोर्ट में अपने बयान बदल देगी। 

Bail Conditions Violation Cases in MP

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज गंभीर आपराधिक प्रकरण से संबंधित है। आरोपी को पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा M.Cr.C. No. 36396/2025 में आदेश दिनांक 1 सितंबर 2025 के माध्यम से BNSS की धारा 480(3) में निर्धारित शर्तों के अधीन जमानत दी गई थी। हालांकि, पीड़िता ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि रिहा होने के बाद आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है और अदालत द्वारा दी गई स्वतंत्रता (Liberty) का दुरुपयोग किया है।

Cyber Crime and Privacy Breach Allegations: फेक व्हाट्सएप आईडी से वीडियो भेजने और दबाव बनाने के आरोप

पीड़िता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी ने 'Sofi' और 'Sofia' नाम से फेक व्हाट्सएप आईडी (Fake WhatsApp ID) बनाकर पीड़िता की गोपनीयता (Privacy) का हनन किया और आपत्तिजनक वीडियो व मैसेज उसके ससुराल पक्ष (सास, ससुर और ननद) को भेजे। इसके अलावा, आरोपी पीड़िता पर अपने पक्ष में बयान देने के लिए लगातार अनुचित दबाव बना रहा था। इस संदर्भ में पीड़िता द्वारा पुलिस अधीक्षक सतना (SP Satna) के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी और सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर भी शिकायत की गई थी। 

Defense Claim on Lost Mobile Phone: आरोपी की खोए हुए मोबाइल की दलील को कोर्ट ने माना अप्रमाणिक

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष है और उसने कोतवाली सतना पुलिस स्टेशन में अपना मोबाइल खोने की शिकायत दर्ज कराई थी। बचाव पक्ष का दावा था कि किसी अन्य व्यक्ति ने वह मोबाइल पाकर यह मैसेज भेजे होंगे। हालांकि, रिकॉर्ड के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने सिम कार्ड ब्लॉक कराने या सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को सूचित करने का कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। माननीय अदालत ने इस दलील को पूरी तरह से काल्पनिक और अस्वीकार्य (Highly improbable and difficult to accept) करार दिया। 

Section 483(2) BNSS Bail Cancellation Rules: निष्पक्ष सुनवाई और पीड़िता की गरिमा की रक्षा पर हाई कोर्ट का फैसला

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि IPC की धारा 376 और 506 के मामलों में पीड़िता की पहचान, प्रतिष्ठा और गरिमा की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत पर रिहा व्यक्ति के लिए अदालती शर्तों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है और गवाहों को प्रभावित करने या निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) में बाधा डालने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि आरोपी का यह आचरण निष्पक्ष विचारण को प्रभावित करता है, इसलिए BNSS की धारा 483(2) के तहत उसकी जमानत निरस्त कर उसे तुरंत हिरासत में लेने के निर्देश दिए गए। 

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