श्राद्धपक्ष अथवा पितृपक्ष प्रारंभ हो चुका है। भारतीय सनातन परंपरा में यह 15 दिन का समय अपने पूर्वजों की स्मृति एवं उनके मोक्ष हेतु दान अनुष्ठान इत्यादि के लिए आरक्षित किया गया है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के कारण करोड़ों लोग इस बारे में नहीं जानते, इसलिए हम बता रहे हैं कि, यदि आप हिंदू हैं और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखते हैं तो कृपया इन आठ नियमों का पालन जरूर करें:-
इन 8 नियमों का पालन अवश्य करें
- पितृपक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को पान, दूसरे के घर पर खाना और शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए साथ ही पूरे पितृपक्ष में ब्रह्राचर्य के व्रत का पालन करना चाहिए।
- पितृपक्ष में कभी भी लोहे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इन दिनों पत्तल एवं मिट्टी के बर्तानों पर स्वयं और ब्राह्राणों को भोजन करवाना उत्तम माना गया है।
- पितृपक्ष में कोई भी शुभ कार्य या नयी चीजों की खरीददारी नहीं करनी चाहिए।
- पितृपक्ष में हमारे पितर किसी भी रुप में श्राद्ध मांगने आ सकते हैं इसलिए किसी जानवर या भिखारी का अनादर नहीं करना चाहिए।
- पितृपक्ष में बिना पितरों को भोजन दिए खुद भोजन नहीं करना चाहिए। जो भी भोजन बने उसमें एक हिस्सा गाय, कुत्ता, बिल्ली, कौआ को खिला देना चाहिए।
- श्राद्ध में बनाया जाने वाला भोजन घर की महिलाओं को नहीं खिलाना चाहिए।
- श्राद्ध में पुरुषों को दाढ़ी मूंछ नहीं कटवाना चाहिए। श्राद्ध के पिंडों को गाय, ब्राह्राण और बकरी को खिलाना चाहिए।
- चतुर्दशी को श्राद्ध नहीं करना चाहिए लेकिन जिस किसी की युद्ध में मृत्यु हुई हो उनके लिए चतुर्दशी का श्राद्ध करना शुभ रहता है।

