भोपाल पुलिस भी गजब है! खाली कारतूस मिला लेकिन CCTV में रिकॉर्ड नहीं हुआ इसलिए FIR नहीं लिखी

Updesh Awasthee
भोपाल, 11 सितंबर 2026:
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 निर्धारित करती है कि यदि पुलिस को यह सूचना मिले कि किसी ने अनारक्षित क्षेत्र पर फायरिंग की है, तो यह एक गंभीर अपराध है और मामले को दर्ज करके विवेचना करना चाहिए, लेकिन भोपाल की रातीबढ़ थाना पुलिस का फंडा कुछ और है। घटनास्थल पर खाली कारतूस मिला है लेकिन CCTV में कोई फायरिंग करता हुआ दिखाई नहीं दिया। इसलिए मामला दर्ज नहीं किया गया। मतलब मामला दर्ज करने के लिए CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग, घटनास्थल पर मिले कारतूस से ज्यादा इंपोर्टेंट है। 

कारोबारी संतोष सिंह तोमर का कहना है कि उन्होंने, भोपाल के रातीबढ़ थाना क्षेत्र के गोरेगांव में अवैध प्लॉटिंग की शिकायत की है। इस हिसाब से वह एक व्हिसल ब्लोअर है और उन्हें संरक्षण मिलना चाहिए। श्री तोमर का कहना है कि, गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात करीब ढाई बजे आधा दर्जन से ज्यादा बदमाश SUV से उनके घर पहुंचे और गेट के बाहर दो राउंड फायर किए। इसके बाद जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। कारोबारी ने गांव में रहने वाले लखन मारण पर संदेह जताया है। संतोष सिंह तोमर के मुताबिक लखन मारण इलाके में अवैध रूप से प्लॉटिंग कर रहे थे। इसकी उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत के बाद से ही विवाद चल रहा था। कारोबारी का आरोप है कि उन्हें पहले फोन पर धमकी दी गई थी कि न तो उन्हें कारोबार करने दिया जाएगा और न ही इलाके में रहने दिया जाएगा। उनका दावा है कि धमकी के कुछ समय बाद ही बदमाश उनके घर के बाहर पहुंचे और वारदात को अंजाम दिया।

SUV से पहुंचे बदमाश, CCTV में कैद हुआ घटनाक्रम

फरियादी के अनुसार रात करीब ढाई बजे SUV से आधा दर्जन से अधिक लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि बदमाशों ने गेट के बाहर लगातार फायर किए और धमकाते हुए मौके से भाग गए। घटना के बाद इलाके में पुलिस बल पहुंचा और मौके की जांच की गई। जांच के दौरान पुलिस को एक खाली कारतूस मिला है। CCTV कैमरे ने रिकॉर्ड किया है कि एक SUV वहां से निकली थी।

फुटेज में कोई व्यक्ति गोली चलाते हुए दिखाई नहीं दे रहा है

कारोबारी का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई। थाना प्रभारी रासबिहारी शर्मा ने बताया कि अभी तक गोली चलने की पुष्टि नहीं हुई है। CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। फुटेज में कोई व्यक्ति गोली चलाते हुए दिखाई नहीं दे रहा है। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर उन्होंने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत दी है। 

इस पूरे घटनाक्रम में बस एक पॉइंट है जो समाचार को विशेष और उल्लेखनीय बना देता है। इस मामले में पुलिस CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग पर विश्वास कर रही है लेकिन घटनास्थल पर मिले खाली कारतूस पर विश्वास नहीं कर रही है। जबकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत फिजिकल एविडेंस (जैसे कारतूस) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। डिजिटल एविडेंस, सत्य को सशक्त कर सकते हैं, लेकिन अंतिम सत्य नहीं होते। 

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