भोपाल, 9 सितंबर 2026: ज्यादातर सरकारी कर्मचारी, ड्यूटी पर होने के बाद भी ड्यूटी नहीं करते लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो ड्यूटी खत्म हो जाने के बाद भी ड्यूटी निभाते हैं। निकिता जोशी एक ऐसा ही नाम है। भोपाल में जब खुद को जूनियर भगवान बताने वाले एमबीबीएस स्टूडेंट्स, अपने स्टाइपेंड में 100% से अधिक के इंक्रीमेंट के लिए ट्रैफिक ब्लॉक कर रखा था तब, एक घायल बालक की जिंदगी में, मध्य प्रदेश पुलिस की महिला आरक्षक निकिता जोशी एक देवदूत की तरह आई और उसकी जान बचाई।
DCP ज़ोन-2 कार्यालय में पदस्थ महिला पुलिसकर्मी आरक्षक सुश्री निकिता जोशी ड्यूटी समाप्त कर शाम को अपने घर पहुंची थीं। इसी दौरान घर के सामने स्थित मंदिर परिसर से बच्चों के घबराए हुए चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए वे तत्काल मंदिर परिसर की ओर दौड़ीं। मंदिर के पीछे झाड़ियों में उन्होंने 6 वर्षीय बालक को अचेत अवस्था में पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर बालक के हाथ में बिजली का तार दिखाई दिया। बिना समय गंवाए निकिता जोशी ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए बालक का हाथ बिजली के तार से अलग किया।
तार हटते ही बालक ने आंखें खोलीं। बालक की स्थिति को देखते हुए निकिता जोशी ने उसे तत्काल अपनी गोद में उठाया और बिना विलंब अस्पताल पहुंचाया। समय पर उपचार मिलने से बालक की जान बच गई। बालक के परिजनों ने महिला पुलिसकर्मी की तत्परता, साहस और मानवीय संवेदनशीलता के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

