भोपाल, 8 सितंबर 2026: हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश द्वारा कमलनाथ सरकार के एनेक्सचर R-4 को रद्द कर दिया गया है। यह एक ऐतिहासिक फैसला है क्योंकि इसके माध्यम से कांग्रेस की सरकार ने परिवीक्षाधीन कर्मचारियों की वेतन का नया फार्मूला (70-80-90%) सेट किया था। उल्लेखनीय है कि कमलनाथ अक्सर कहा करते थे कि, मेरी चक्की देर से पीसती है लेकिन महीन पीसती है। याद दिलाना जरूरी है कि कमलनाथ सरकार नहीं 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया था जो आज तक कोर्ट में उलझा हुआ है।
मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रिपरिषद के उस निर्णय को भी टिकने योग्य नहीं माना, जिसे 25 नवंबर 2019 के मेमो (एनेक्शर R-4) के जरिए लागू किया गया था। हाईकोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 12 और 14 का उल्लंघन माना और संबंधित व्यवस्था को रद्द कर दिया। इस सर्कुलर के आधार पर संबंधित विभाग द्वारा किए गए संशोधन भी निरस्त कर दिए गए हैं। इस फैसले का सीधा लाभ उन संबंधित शासकीय कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्हें 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त किया गया और प्रोबेशन अवधि में 70%, 80% और 90% न्यूनतम वेतनमान के आधार पर भुगतान किया गया था।
इस मामले में ऐसा पहली बार हुआ जब, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने 8 सितंबर 2026 को समान मुद्दे से जुड़ी कई रिट याचिकाओं पर साझा आदेश पारित किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित शासकीय कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य का पूरा वेतन दिया जाए। इस मामले को "हेमंत हेलोंडे अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन" के नाम से जाना जाएगा। यह एक लैंडमार्क जजमेंट है जो भारत के किसी भी राज्य में, किसी भी सरकार को परिवीक्षा अवधि के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतन का विशेष निर्धारण करने अथवा किसी भी प्रकार की कटौती करने से रोकता है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को सजा देने के नाम पर भी उसका पे-स्केल मनमाने तरीके से न्यूनतम वेतनमान से नीचे नहीं किया जा सकता। नियमों के तहत इंक्रीमेंट रोका जा सकता है या कर्मचारी को निचले पे-स्केल पर वापस भेजा जा सकता है, लेकिन सजा के नाम पर वेतनमान को मनमाने तरीके से कम करने का प्रावधान नहीं है।
एरियर का क्या होगा
इस विषय में कहा जा रहा है कि हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह पीड़ित कर्मचारियों को बकाया वेतन (एरियर) का भुगतान करें परंतु अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि, इस विषय में हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है और क्या कोई लास्ट डेट निर्धारित की गई है।

