डाक कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान: NUPE ने दिया नोटिस, जानें क्या हैं प्रमुख मांगें

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026:
केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व वाले भारतीय डाक विभाग में देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान हो गया है। नेशनल यूनियन ऑफ पोस्टल एम्प्लॉइज (NUPE), पोस्टमैन एवं एमटीएस ग्रुप 'सी' ने अपनी लंबित मांगों और विभागीय आश्वासनों के पूरा न होने के विरोध में 2 दिसंबर 2026 से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस जारी किया है। यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव निसार मुजावर द्वारा डाक विभाग के सचिव को भेजे गए आधिकारिक नोटिस में औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 22(1) के तहत चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल की घोषणा की गई है। 

एक साल से आश्वासन न पूरा होने पर बढ़ा आक्रोश

यूनियन के अनुसार, 20 अगस्त 2025 को डाक विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मिले सकारात्मक आश्वासनों के बाद 22 अगस्त 2025 से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को दो महीने के लिए टाल दिया गया था। हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा दिए गए आश्वासनों को अमलीजामा नहीं पहनाया गया, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यरत डाक कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। 

चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम

अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पूर्व यूनियन ने देशभर में चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है:
  • 6 अक्टूबर 2026: कार्य समय के पश्चात देश के सभी मंडलीय कार्यालयों (Divisional Offices) के समक्ष शाम को विरोध प्रदर्शन।
  • 7 एवं 8 अक्टूबर 2026: सभी पोस्टमैन और एमटीएस कर्मचारियों द्वारा दो दिनों तक काली पट्टी (Black Badges) बांधकर काम करना।
  • 4 नवंबर 2026: सभी सर्कल कार्यालयों (Circle Offices) पर महाधरना व प्रदर्शन।
  • 23 नवंबर 2026: जंतर-मंतर, नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर महाधरना और डाक विभाग को ज्ञापन सौंपना।
  • 2 दिसंबर 2026 से: यदि विभाग द्वारा मांगों का समयबद्ध निस्तारण नहीं किया जाता है, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी।

क्या हैं डाक कर्मचारियों की मुख्य मांगें?

यूनियन द्वारा प्रेषित मांग-पत्र (Charter of Demands) में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मुद्दे उठाए गए हैं:
  • वर्तमान I.D.C. / C.D.C. वितरण व्यवस्था को तुरंत समाप्त कर पुरानी विकेंद्रीकृत (पिनकोड आधारित) वितरण प्रणाली को पुनः लागू किया जाए।
  • डाक कर्मचारियों से निजी कंपनियों का व्यावसायिक कार्य (जैसे मुंबई रीजन में ब्लिंकइट डिलीवरी या महानगर गैस लिमिटेड की मीटर रीडिंग आदि) करवाना तुरंत बंद किया जाए और केवल मूल डाक कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
  • डाक जीवन बीमा (PLI/RPLI) और नए खाते खोलने के अवास्तविक लक्ष्य तय कर कर्मचारियों पर दबाव बनाना बंद किया जाए। बिक्री व मार्केटिंग गतिविधियों के लिए अलग से कुशल 'सेल्स फोर्स' का गठन किया जाए।
  • 12 अगस्त 2025 को गठित कैडर पुनर्गठन समिति की अंतिम रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपी और लागू की जाए।
  • नियम-38 के तहत लंबित स्थानांतरण आवेदनों को मंजूर किया जाए और इसके लिए लागू 66.66% स्टाफ क्षमता की अनिवार्य शर्त हटाई जाए।
  • आधिकारिक काम के लिए निजी फोन या दोपहिया वाहन के इस्तेमाल का दबाव न बनाया जाए।
  • कर्मचारियों को आधिकारिक स्मार्टफोन, दोपहिया वाहन खरीदने हेतु ₹1,25,000 तथा फोन हेतु ₹15,000 का ब्याज मुक्त अग्रिम दिया जाए।
  • ईंधन प्रतिपूर्ति दर बढ़ाकर ₹9–₹10 प्रति किलोमीटर की जाए और पोस्टमैन/एमटीएस स्टाफ को ₹1 करोड़ का चिकित्सा-सह-दुर्घटना बीमा प्रदान किया जाए।
  • डीएसएस (DSS) ऐप में सर्वर समस्याओं को दूर कर ऑफलाइन कार्य करने की सुविधा दी जाए।
  • पोस्टमैन व एमटीएस के सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए तथा मंडलों के विलय या सर्कलों के अनावश्यक विभाजन पर रोक लगाई जाए। इसके अतिरिक्त प्रशासनिक कार्यालयों की तर्ज पर 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग भी रखी गई है।

उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की अपील

हड़ताल नोटिस की प्रतियां भारत के प्रधानमंत्री, संचार मंत्री, श्रम आयुक्त और दिल्ली पुलिस को भी प्रेषित की गई हैं। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि वार्ता के माध्यम से समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जाता है, तो उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रशासनिक या सार्वजनिक असुविधा की पूरी जिम्मेदारी डाक विभाग की होगी।

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