श्रीयान इंडस्ट्रीज, भोपाल वालों की याचिका पर हाई कोर्ट का मोहन सरकार को नोटिस

Updesh Awasthee
जबलपुर, 17 अगस्त 2026
: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नजदीक मंडीदीप में स्थित मैसर्स श्रीयान इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (M/S Sriyaan Industries Private Limited) द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश शासन और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला महिला एवं बाल विकास विभाग में 10 करोड रुपए के सोया तेल और विटामिन की सप्लाई का है। डिपार्टमेंट द्वारा इसका पेमेंट नहीं किया गया है।

मामले का संक्षिप्त विवरण

याचिकाकर्ता, मैसर्स श्रीयान इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, ने मध्य प्रदेश राज्य और अन्य के विरुद्ध रिट याचिका क्रमांक 28774/2026 दायर की है। इस कंपनी के डायरेक्टर्स में NEETU KHANDELWAL, VIKAS KHANDELWAL, SONIA KHANDELWAL, SUMIT KUMAR KHANDELWAL, and JAGJEEWAN RAM SHARMA शामिल हैं। हालांकि, हाई कोर्ट के प्रारंभिक आदेश में विवाद के विस्तृत तथ्यों का उल्लेख नहीं है, लेकिन अदालती कार्यवाही से स्पष्ट है कि यह मामला सरकारी अनुबंधों या प्रशासनिक निर्णयों से उत्पन्न किसी विवाद से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता ने राहत के लिए सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। 

न्यायालय की कार्यवाही और पीठ

इस मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया (Acting Chief Justice Vivek Rusia) और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल (Judge Pradeep Mittal) की युगल पीठ (Division Bench) के समक्ष हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से: विद्वान अधिवक्ता श्री दिनेश सिंह चौहान ने पैरवी की।
राज्य सरकार की ओर से: शासकीय अधिवक्ता डॉ. एस. एस. चौहान उपस्थित हुए। 

दोनों पक्षों के तर्क और कानूनी पेच

सुनवाई के दौरान मुख्य ध्यान एक तकनीकी कानूनी बिंदु पर केंद्रित रहा - 'आर्बिट्रेशन क्लॉज' (Arbitration Clause) की उपलब्धता।
अक्सर सरकारी और निजी अनुबंधों में एक धारा होती है कि यदि कोई विवाद होता है, तो अदालत जाने से पहले उसे 'मध्यस्थता' (Arbitration) के माध्यम से सुलझाया जाएगा। 

न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि प्रतिवादी क्रमांक 2 (Respondent No. 2) द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही इस बात पर विचार किया जाएगा कि क्या इस मामले में 'आर्बिट्रेशन क्लॉज' की मौजूदगी के कारण यह याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है जहाँ न्यायालय यह देखता है कि वैकल्पिक उपचार (Alternative Remedy) मौजूद होने पर रिट क्षेत्राधिकार का उपयोग किया जाना चाहिए या नहीं।

न्यायालय का विस्तृत आदेश

माननीय उच्च न्यायालय ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
न्यायालय ने प्रतिवादियों को RAD (Registered Post with Acknowledgement Due) मोड के माध्यम से नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता को सात कार्य दिवसों के भीतर 'प्रक्रिया शुल्क' (Process Fee) जमा करने का निर्देश दिया गया है।
जैसे ही प्रतिवादियों पर नोटिस की तामील (Service) पूरी हो जाएगी, मामले को तुरंत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (List) किया जाएगा। 

विशेष टिप्पणी और विश्लेषण

न्यायाधीशों ने फिलहाल मामले के गुणों (Merits) पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है, लेकिन 'आर्बिट्रेशन क्लॉज' पर आपत्ति को भविष्य के लिए सुरक्षित रखकर यह संकेत दिया है कि न्यायालय अनुबंधात्मक कानूनों और रिट अधिकारिता के बीच के संतुलन का सूक्ष्मता से परीक्षण करेगा।

यह आदेश व्यापारियों के लिए एक सबक है कि अनुबंधों की शर्तों, विशेषकर विवाद समाधान तंत्र (Dispute Resolution Mechanism) पर सावधानीपूर्वक ध्यान देना चाहिए। वहीं, कानून के विद्यार्थियों के लिए यह केस 'प्रारंभिक आपत्तियों' (Preliminary Objections) और 'रिट याचिका की पोषणीयता' (Maintainability of Writ Petition) को समझने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

जैसे ही राज्य सरकार अपना जवाब दाखिल करेगी, इस मामले में छिपे और भी गहरे कानूनी तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

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