भोपाल, 17 अगस्त 2026: अपनी मांगों को लेकर चयनित शिक्षकों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन आज 8वें दिन में प्रवेश कर गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) अपने ही द्वारा निर्धारित 'क्लॉज 49' का पालन नहीं कर रहा है, जिससे सैकड़ों पात्र उम्मीदवारों का भविष्य और नौकरी संकट में आ गई है।
क्या है क्लॉज 49 का विवाद?
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के अनुसार, जब उन्होंने परीक्षा के लिए फॉर्म भरा था, तो आवेदन पत्र के क्लॉज 49 में यह स्पष्ट प्रावधान था कि जो आवेदक अपनी शैक्षणिक योग्यता के अंतिम वर्ष में हैं, वे भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। शर्त केवल यह थी कि उन्हें डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन (दस्तावेज सत्यापन) की तिथि तक अपनी अंकसूची या उपाधि धारित करना अनिवार्य होगा। हालांकि, अब जब नियुक्ति से पहले दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई है, तो विभाग ने अचानक पात्रता की शर्तों में बदलाव कर दिया है। विभाग का अब यह कहना है कि अभ्यर्थियों के पास आवेदन की तिथि तक ही शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र होना चाहिए।
अभ्यर्थियों के कानूनी तर्क
प्रदर्शनकारियों ने विभाग के इस रवैये को 'दोहरा मापदंड' करार दिया है और निम्नलिखित विधिक तर्क प्रस्तुत किए हैं:
नियमों की वैधता: रूल बुक के नियम क्रमांक 3, 3.17 और 3.20 के अनुसार, आवेदन पत्र में दी गई शर्तें और प्रारूप कानूनी रूप से प्रभावी और बंधनकारी हैं।
विभाग के अधिकार: अभ्यर्थियों का कहना है कि नियम 49 जैसे प्रावधान जोड़ने का अधिकार स्वयं विभाग के पास सुरक्षित था, इसलिए अब उससे पीछे हटना गलत है।
सीएम और शिक्षा मंत्री से गुहार
अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकलने पर उन्होंने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। चयनित शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और क्लॉज 49 का पालन नहीं किया गया, तो वे अब भूख हड़ताल शुरू करने पर मजबूर होंगे।

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