भोपाल, 4 अगस्त 2026: राव उदय प्रताप सिंह, मूल रूप से कांग्रेस के नेता हैं और भाजपा में शामिल हुए थे। आजकल मोहन सरकार में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या श्री उदय प्रताप सिंह अभी भी कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं? सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि उनके मंत्री रहते स्कूल शिक्षा विभाग में जितनी गड़बड़ी और आंदोलन प्रदर्शन हुए हैं, उतने किसी मंत्री के कार्यकाल में नहीं हुए। यह बताने की जरूरत नहीं की हर आंदोलन सरकार को थोड़ा बहुत ही सही लेकिन नुकसान तो पहुंचना है। अब प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2025, जो आनंदपूर्वक संपन्न हो रही थी, उसमें अड़ंगा लगा दिया। अन्यायपूर्ण आदेश जारी कर दिया। 800 परिवार नेगेटिव हो गए। एक और प्रदर्शन होने वाला है।
मामला क्या है
ये पूरा मामला प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 से जुड़ा हुआ है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों की नियुक्ति के लिये डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 18 जुलाई से शुरू की और 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी ने नियुक्ति पत्र प्रदान किये। लेकिन इसी भर्ती के सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य विभाग के दोहरे मापदण्ड के कारण अधर में लटक गया है।
एप्लीकेशन के क्लॉज़ 49 में स्पष्ट लिखा है, लास्ट ईयर वाले फॉर्म भर सकते हैं
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब उन्होंने फॉर्म भरा था तो फॉर्म के क्लॉज़ 49 में स्पष्ट लिखा था कि "इस परीक्षा में भाग लेने वाले जो आवेदक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता अर्जित करने की परीक्षा के अंतिम वर्ष में हैं, वे भी परीक्षा में बैठने के लिए मान्य होंगे। ऐसे आवेदकों को उस तिथि को अंकसूची /उपाधि धारित किया जाना अनिवार्य होगा जिस तिथि को उनके परीक्षण हेतु शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्र मांगें जाएंगे।"
रूल बुक में भी यही लिखा है
ESB द्वारा जारी प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 की रुलबूक के अध्याय 1 के क्लॉज़ 3 में स्पष्ट लिखा है- आवेदन पत्र कर्मचारी चयन मंडल भोपाल और विभाग के निर्देशानुसार होगा।इस आधार पर आवेदन फॉर्म में लिखा क्लॉज़ 49 वैध है।
रिजल्ट के बाद एलिजिबिलिटी का नियम बदल दिया
इसी नियम के आधार पर, जो उनके आवेदन फॉर्म में लिखा था, हजारों अभ्यर्थियों ने अन्तिम वर्ष में अध्ययनरत रहते हुए इस परीक्षा में बैठे और मेरिट में भी आये। लेकिन जब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय आया तो विभाग ने नियम ही बदल दिए, विभाग द्वारा 17 जुलाई 2026 को निकाले गए आदेश (क्र./UCR/C/.../2025-26/1438 भोपाल, दिनांक 17-07-2026 प्राथमिक शिक्षक नियोजन 2026 चयनित आवेदकों के लिये निर्देशिका) के क्लॉज़ 9.3 में अचानक नियम बदल दिया। लिख दिया कि आवेदकों की अंतिम वर्ष की अंकसूची/उपाधि की तिथि फॉर्म भरने की अंतिम दिनांक 25 अगस्त 2025 होनी चाहिए।
वर्ग 1-2 में भी यही नियम है
बता दें, वर्ग 1 और वर्ग 2 की भर्ती में भी यही नियम है कि अभ्यर्थी अंतिम वर्ष में अध्ययनरत होते हुए फॉर्म भर सकता है ,परीक्षा दे सकता है और डॉक्युमनेट वेरिफिकेशन की डेट को ही अभ्यर्थी के पास उसकी डिग्री पूर्ण होना विभाग वैध मानता है ना कि फॉर्म भरने की अंतिम तिथि को।
ट्राइबल वालों को आदेश वापस लेना पड़ा था
इसी प्रकार की स्थिति ट्राइबल विभाग की वर्ग 1 (2023) की भर्ती में बनी थी, जहां ट्राइबल विभाग ने 9 अगस्त 2024 को आदेश निकाला कि अभ्यर्थी को फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 27.01.2023 तक अभ्यर्थी को परीक्षा अंकसूची /उपाधि धारित किया जाना अनिवार्य होगा ना कि सत्यापन हेतु उपस्थिति दिनांक तक। ये नियम आधिकारिक नियम पुस्तिका के विपरीत था, अभ्यर्थियों के विरोध के बाद ये नियम जो कि अवैध था, बाद में हटा लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत
D.Y.चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने प्रकाश पाठक एवं अन्य बनाम राजस्थान हाइकोर्ट वाद 2024 में निर्णय दिया कि सरकारी नोकरी के भर्ती के नियम बीच में बदले नहीं जा सकते। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने के. मंजुश्री बनाम आंध्र प्रदेश राज्य वाद में स्पष्ट रूप से कहा है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन या पात्रता के मानदंडों को बदला नहीं जा सकता, क्योंकि ऐसा करना खेल खेले जाने के बाद उसके नियमों को बदलने के समान होगा, जो कानूनन अस्वीकार्य है।
मध्यप्रदेश हाइकोर्ट भी भर्ती से जुड़े एक मामले में कह चुका है कि बीच भर्ती में नियम नहीं बदले जा सकते।
बैठी भैंसों में लाठी क्यों मारी?
"बैठी भैंस में लाठी मारना" हरियाणा की एक कहावत है। इसका मतलब होता है कि जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है तो फिर न्यूसेंस क्रिएट करने की क्या जरूरत है। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ने प्राथमिक शिक्षक चयन प्रक्रिया को डिस्टर्ब कर दिया है जबकि यह निर्विघ्न पूरी होने वाली थी। सवाल उठता है कि ऐसा क्यों किया गया। क्या लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक, एक अयोग्य अधिकारी हैं? या फिर उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री के कहने पर, के इशारे पर अथवा को खुश करने के लिए, दुर्भावना पूर्वक ऐसा किया है। ताकि जनता में सरकार की निंदा की जाए और कॉकरोच जनता पार्टी के लोगों को एक मुद्दा मिल जाए?
क्या उदय प्रताप सिंह कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं?
सवाल तो बनता है क्योंकि, अतिथि शिक्षक वाले विवादित बयान से लेकर प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के ताजा आदेश तक, ऐसा हमेशा हुआ है। ऑनलाइन ई-अटेंडेंस के मामले में भी आदेश और निर्देश इस प्रकार से निकल रहे हैं, ताकि व्यवस्था बने या ना बने लेकिन मध्य प्रदेश के 5 लाख शिक्षक परिवारों में, सरकार के खिलाफ नाराजगी जरूर बननी चाहिए। अतिथि शिक्षकों को तंग करके, उनको अतिथि और पराया बताकर, मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख परिवारों को सरकार के खिलाफ कर दिया था। कहा तो यह भी जा रहा है कि सरकार ने दतिया में श्री उदय प्रताप सिंह को खिचड़ी बनाने के लिए भेजा था, वह खिचड़ी जलाकर लौटे हैं।
श्री उदय प्रताप सिंह, मूल रूप से पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मित्र हैं। उनकी मित्रता के कारण ही कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए थे। इसलिए यह भी हो सकता है कि वह, बिल्कुल वही कर रहे हैं जो दतिया में कुछ लोगों ने किया....।

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