CM डॉ मोहन ने पंखे के माध्यम से बच्चों को फिजिक्स के तीन सिद्धांत समझाए, वह लोग MEAM बना रहे हैं जिनको समझ नहीं आए

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 22 अगस्त 2026:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्कूली विद्यार्थियों को पंखे की तीन पंखुड़ियां के माध्यम से फिजिक्स के तीन सिद्धांत समझाए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मजे की बात यह है कि, इस वीडियो को लेकर वह लोग MEAM बना रहे हैं जिनको फिजिक्स के सिद्धांत समझ नहीं आए। बात सही भी है, जिन लोगों ने स्कूल में पढ़ाई नहीं की उनका क्या पता, पढ़े लिखे लोगों की बातों का अर्थ क्या होता है। किसी का मजाक उड़ाना सबसे सरल काम है लेकिन विषय को समझना और सीखना सबसे अच्छा काम है। अपन यही करेंगे।

CM Mohan Yadav Explains 3 Physics Principles Using a Fan

डॉ मोहन यादव, आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं परंतु जब मुख्यमंत्री नहीं भी थे तब भी वह शिक्षा को लेकर इसी प्रकार की बातें किया करते थे। उनमें गजब का गुण है, वह फिजिक्स और अंतरिक्ष के सिद्धांतों को इतनी सरल भाषा में समझा देते हैं कि, उनसे सीखने वाला कभी भूल नहीं सकता। वायरल वीडियो में डॉक्टर मोहन यादव विद्यार्थियों से पूछ रहे हैं कि यह पंखा चल रहा है, क्या हवा दे रहा है। फिर वह बताते हैं कि यह पंखा हवा नहीं दे रहा, पंखा हवा पैदा नहीं करता, हवा तो पहले से कमरे में मौजूद होती है, पंखा उसको एक दिशा में तेज गति से बहा देता है। इस प्रकार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने, लगभग 30 सेकंड के वीडियो में फिजिक्स के तीन सिद्धांत समझा दिए। वह कौन से सिद्धांत हैं, हम बता देते हैं:- 

पंखा खुद हवा पैदा नहीं करता

पंखा कमरे में मौजूद हवा को ही तेज़ गति से घुमाता है। और एक दिशा में फेंक देता है। जब यह हवा हमारे शरीर से टकराती है, तो त्वचा पर मौजूद पसीने को सुखाती है (वाष्पीकरण/Evaporation)। इससे हमारे शरीर को ठंडक का अहसास होता है। इस प्रक्रिया के पीछे भौतिक विज्ञान (Physics) और इंजीनियरिंग (Aerodynamics) का बहुत सुंदर मेल है।

1. भौतिक विज्ञान (Scientific Principles) के तीन सिद्धांत

जब पंखा चलता है, तो हमारे शरीर को ठंडा महसूस कराने में तीन मुख्य वैज्ञानिक सिद्धांत काम करते हैं: 
संवहन (Convective Heat Transfer): हमारे शरीर का तापमान (लगभग 37 डिग्री सेल्सियस) आसपास की हवा से ज़्यादा होता है। इसलिए शरीर अपने चारों ओर की हवा को गर्म कर देता है। अगर हवा रुकी रहे, मतलब हवा का प्रवाह ना हो, तो गर्म हवा की एक परत हमारे शरीर को ढँक लेती है। जिसके कारण हमको गर्मी लगने लगती है। पंखा इस गर्म हवा की परत को हटाकर लगातार नई और अपेक्षाकृत ठंडी हवा हमारे संपर्क में लाता है। 

वाष्पीकरण द्वारा शीतलन (Evaporative Cooling): हमारे शरीर से लगातार पसीना निकलता रहता है। जब पंखे की हवा इस पसीने के संपर्क में आती है, तो पसीना तेज़ी से भाप (वाष्प) बनकर उड़ता है। पसीने को भाप बनने के लिए ऊर्जा (Gupt Ushma / Latent Heat) चाहिए होती है, जो वह हमारे शरीर से खींचता है। इससे त्वचा का तापमान तुरंत गिर जाता है और हमें ठंडक लगती है। 

पवन-शीतल प्रभाव (Wind Chill Effect): हवा की गति जितनी तेज़ होगी, वाष्पीकरण और संवहन की दर उतनी ही बढ़ जाएगी। यही कारण है कि पंखे की स्पीड बढ़ाने पर हवा ज़्यादा ठंडी महसूस होती है, भले ही कमरे का तापमान वही रहे। 

एरोडायनामिक्स और पंखे की तकनीक (Technology & Aerodynamics)

पंखा हवा को किस तरह खींचता और फेंकता है, इसके पीछे एरोडायनामिक्स काम करती है:
ब्लेड का झुकाव (Angle of Attack): पंखे की पत्तियाँ (Blades) बिल्कुल सपाट नहीं होतीं; वे एक खास कोण पर थोड़ी मुड़ी या झुकी होती हैं।
दाब का अंतर (Bernoulli's Principle & Pressure Difference): जब पंखे का मोटर घूमता है, तो झुकी हुई पत्तियाँ हवा को नीचे की ओर धकेलती हैं। इससे ब्लेड के ऊपर का हवा का दबाव कम (Low Pressure) हो जाता है और नीचे का दबाव बढ़ (High Pressure) जाता है। इस दाब-अंतर (Pressure Difference) के कारण ऊपर और आसपास की हवा लगातार नीचे की तरफ खिंची चली आती है और एक हवा का प्रवाह (Airflow) बनता है।

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