बॉर्डर पर आग उगलने वाले टैंक जबलपुर से जाएंगे, सीएम और डिफेंस मिनिस्टर द्वारा प्रोजेक्ट का शुभारंभ

Updesh Awasthee
भोपाल, 27 अगस्त 2026:
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एयर स्ट्राइक तो आपको याद ही होगी। कैसे चंद मिनट्स में उनकी पूरी कॉलोनी को शमशान बना दिया था। उन लड़ाकू विमान ने मध्य प्रदेश की धरती ग्वालियर से उड़ान भरी थी। आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की धरती जबलपुर से बॉर्डर पर ऐसे टैंक भेजे जाएंगे, जो दुश्मन के गोला बारूद के सामने लोहे की दीवार बनकर खड़े रहेंगे और दुश्मन के रेंज में आते ही ऐसी आग उगलेंगे कि, दफन करने के लिए बॉडी के पूरे टुकड़े भी नहीं मिलेंगे। 

रक्षाबंधन के ठीक पहले रक्षा प्रोजेक्ट का शुभारंभ 

भारतीय सेना (इंडियन आर्मी) को और भी ज्यादा पावरफुल और सेल्फ-रिलायंट (आत्मनिर्भर) बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षाबंधन फेस्टिवल से ठीक एक दिन पहले, मध्यप्रदेश के जबलपुर में, देश की रक्षा के एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया गया है। सीएम डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने जबलपुर की आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की व्हीकल फैक्ट्री में ₹475 करोड़ से अधिक की लागत वाली 'टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना' का शिलान्यास और भूमि-पूजन किया। इस नए प्रोजेक्ट से देश के रक्षा क्षेत्र (डिफेंस सेक्टर) का पूरा परिदृश्य बदलने वाला है।

टैंक ओवरहॉल प्रोजेक्ट क्यों है इतना खास?

जंग के मैदान में हमारे टैंक आज भी दुश्मनों के लिए काल और 'आरण वॉल' (लोहे की दीवार) बनकर खड़े रहते हैं। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने इस प्रोजेक्ट की इम्पोर्टेंस बताते हुए कहा कि भले ही आज के मॉडर्न वॉरफेयर में ड्रोन, मिसाइल और साइबर टेक्नोलॉजी का रोल बहुत बढ़ गया है, लेकिन ग्राउंड ऑपरेशन्स में जवानों को आगे बढ़ाने के लिए टैंक की प्रासंगिकता आज भी खत्म नहीं हुई है। इसीलिए अपनी आर्मी के टैंकों को लगातार अपग्रेड और अपडेट रखना बेहद जरूरी है। इस नए प्रोजेक्ट के चालू होने से अब देश की कुल टैंक ओवरहॉल कैपेसिटी प्रतिवर्ष 230 टैंक हो जाएगी। आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में हमारी सेना को 4004 टैंक मिले हैं।

इतिहास की सीख: टेक्नोलॉजी की कमी से टूटा था रानी दुर्गावती का विजय क्रम

सीएम डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के गौरवशाली इतिहास और रानी दुर्गावती के शौर्य को याद किया। उन्होंने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात साझा की कि रानी दुर्गावती अपने युद्ध में लगातार जीत रही थीं, लेकिन उस दौर में विरोधी सेना पहली बार तोप जैसी नई टेक्नोलॉजी और हथियार लेकर आई। भारतीय राजाओं ने उस समय पहली बार तोप देखी थी। तकनीक के इस अंतर के कारण हमारी वीरांगना का विजय क्रम टूट गया और उन्हें अपना बलिदान देना पड़ा। यही वजह है कि आज के समय में हमें टेक्नोलॉजी के मामले में हमेशा अपडेट रहना होगा ताकि इतिहास की गलतियां न दोहराई जाएं।

मध्यप्रदेश बनेगा देश का नया 'स्पेस, एयरो और डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हब'

डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने मध्यप्रदेश की सकारात्मक सोच की तारीफ करते हुए कहा कि सीएम डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य तेजी से तरक्की कर रहा है। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) 2025 के दौरान लागू की गईं पारदर्शी और उद्योग अनुकूल नीतियां (इंडस्ट्री-फ्रेंडली पॉलिसीज) बड़े निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
ग्वालियर-चंबल रीजन में बड़ा धमाका:  इस क्षेत्र में डिफेंस सेक्टर की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स में ₹16,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा रहा है। यह कदम एमपी को भविष्य में एक मजबूत डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाएगा।
वंदे भारत के कोच: भोपाल के पास बीईएमएल (BEML) कारखाने की मदद से अब राज्य में वंदेभारत सहित कई ट्रेनों के कोच तैयार किए जाएंगे।
गोदरेज का नया प्लांट: मालनपुर में हाल ही में लगभग ₹400 करोड़ की लागत वाले गोदरेज ग्रुप के कारखाने का लोकार्पण किया गया है।
रिकॉर्ड एक्सपोर्ट: आज मध्यप्रदेश का विदेशी निर्यात (फॉरेन एक्सपोर्ट) ₹76,000 करोड़ से भी अधिक हो चुका है।

डिफेंस सेक्टर में देश की 'रॉकेट स्पीड' ग्रोथ

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने भारत के डिफेंस सेक्टर में पिछले 12 सालों में हुई अभूतपूर्व प्रगति के कुछ शानदार आंकड़े साझा किए:
डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन: साल 2014 में हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन केवल ₹46,000 करोड़ का था, जो आज बढ़कर ₹1 लाख 80 हजार करोड़ तक पहुंच गया है।
डिफेंस एक्सपोर्ट: साल 2014 में भारत का रक्षा निर्यात करीब ₹1,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹39,000 करोड़ हो गया है।
भविष्य का टारगेट: भारत सरकार ने साल 2030 तक इस एक्सपोर्ट को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

लोकल युवाओं को मिलेगा रोजगार और नया ईकोसिस्टम

इस मेगा प्रोजेक्ट से न केवल भारतीय सेना मजबूत होगी, बल्कि जबलपुर नई टेक्नोलॉजी के साथ डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग का एक बड़ा सेंटर बनकर उभरेगा। इससे स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार (जॉब्स) मिलेंगे और छोटे उद्यमियों (स्मॉल बिजनेस ओनर्स) के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे।
डिफेंस मिनिस्टर ने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हमारे नौजवानों में टैलेंट की कोई कमी नहीं है; वे विदेशों में भी अपना झंडा गाड़ रहे हैं। जरूरत बस इस बात की है कि उन्हें सही टेक्नोलॉजी, अवसर और एक अच्छा ईकोसिस्टम प्रोवाइड कराया जाए।
(श्री आलोक शर्मा द्वारा लिखी गई यह रिपोर्ट जबलपुर में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की व्हीकल फैक्ट्री में आयोजित भव्य शिलान्यास समारोह के दौरान दी गई जानकारी पर आधारित है)। 

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