किसी के भी घर, ऑफिस या निजी संपत्ति क्षेत्र में पुलिस या सरकार की कोई भी एजेंसी तलाशी और जब्ती की कार्रवाई करती है तो पहले केवल सर्च वारंट अनिवार्य हुआ करता था लेकिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत सरकार ने ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग को भी अनिवार्य कर दिया है। दिनांक 25 दिसंबर 2023 के बाद पुलिस या किसी भी एजेंसी द्वारा कोई भी तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई है तो, उसकी ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग होना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं है तो पुलिस टीम अथवा एजेंसी के लोग BNSS की धारा 105 का उल्लंघन कर रहे हैं।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 105: सरल हिंदी में
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 105 एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधुनिक प्रावधान है, जो पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी (Search) और जब्ती (Seizure) की कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। BNSS के कानूनी प्रावधानों के आधार पर इस धारा का विवरण निम्नलिखित है:
BNSS धारा 105: तलाशी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग
इस धारा के तहत, पुलिस जब भी किसी स्थान की तलाशी लेती है या किसी संपत्ति को जब्त करती है, तो उस पूरी प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करना अब कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
रिकॉर्डिंग केवल तलाशी की ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित प्रक्रियाओं की भी होनी चाहिए:
- जब्त की गई संपत्तियों की सूची (Seizure List) तैयार करना।
- उस सूची पर गवाहों (Witnesses) के हस्ताक्षर लेने की प्रक्रिया।
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम: यह रिकॉर्डिंग किसी भी ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक साधन के माध्यम से की जा सकती है। कानून में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इसके लिए मोबाइल फोन का उपयोग भी प्राथमिकता के आधार पर किया जा सकता है।
मजिस्ट्रेट को सूचना: तलाशी और जब्ती की यह रिकॉर्डिंग बिना किसी देरी के संबंधित मजिस्ट्रेट (जैसे जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट) को भेजी जानी चाहिए।
मतलब, ऐसा नहीं है कि पुलिस ने ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग करके अपने पास रख लिया और बाद में उसको एडिट करने के बाद कोर्ट में पेश किया। पुलिस अथवा किसी भी जांच एजेंसी को तत्काल, सारी रिकॉर्डिंग मजिस्ट्रेट के पास जमा करनी होगी।
इस प्रावधान का उद्देश्य और लाभ
यह पुलिस द्वारा की जाने वाली किसी भी मनमानी या फर्जी बरामदगी (planting of evidence) की संभावना को कम करता है।
साक्ष्य की शुद्धता: डिजिटल रिकॉर्डिंग न्यायालय में एक ठोस साक्ष्य के रूप में कार्य करती है, जिससे गवाहों के बाद में मुकरने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश कम हो जाती है।
नागरिक अधिकारों की सुरक्षा: यह सुनिश्चित करता है कि पुलिस तलाशी के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रही है।
स्पेशल नोट: तलाशी अथवा जब्ती के दौरान पुलिस अथवा कोई भी एजेंसी आपसे आपके सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग बंद करने के लिए नहीं कह सकता। यदि वह ऐसा कहता है, और ऐसा कहते हुए कैमरे में रिकॉर्ड हो जाता है, तो न केवल उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी बल्कि उसको दंडात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा।

