बच्चों के इलाज के लिए पुलिस बुलानी पड़ी, बालाघाट मध्य प्रदेश का मामला

Updesh Awasthee
भोपाल, 12 अगस्त 2026:
मध्य प्रदेश की स्थापना देना 1 नवंबर 1956 से लेकर आज तक जितनी भी सरकारों ने बालाघाट में जन जागृति के लिए पैसा खर्च किया है। सभी योजनाओं की जांच होनी चाहिए। बच्चे, गंभीर रूप से बीमार हैं। बीमारी का पता नहीं चल पा रहा है। 6 बच्चों की मौत हो चुकी है लेकिन लोग डॉक्टर के पास जाने को तैयार नहीं है। बच्चों का इलाज करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। अस्पताल पर पुलिस का पहरा है ताकि कोई अपने बच्चों को लेकर भाग न जाए। 

बालाघाट के बच्चों में कौन सी बीमारी फैल रही है?

कोई कल्पना नहीं कर सकता लेकिन यह सत्य है। मध्य प्रदेश के बालाघाट में, बच्चों में एक अज्ञात बीमारी फैल रही है। तेज बुखार होता है, शरीर पर लाल धब्बे दिखाई देते हैं, बच्चे पेट दर्द की शिकायत करते हैं, मुंह में छाले हो गए हैं और कभी-कभी झटके भी लगते हैं। बच्चों का शरीर कमजोर होता जा रहा है लेकिन उनको भूख नहीं लग रही है। वह कुछ भी खाने को तैयार नहीं है। डॉक्टर समझ नहीं पा रहे हैं कि यह कौन सी बीमारी है और इसकी दवाई क्या होगी। दो दिन पहले जब आंकड़े कलेक्ट किए गए तो अस्पतालों में 100 से ज्यादा बच्चे भर्ती थे और ग्रामीणों ने नहीं, डॉक्टर ने बताया है कि छह बच्चों की मौत हो चुकी है। यहां ग्रामीण, डॉक्टरों की शिकायत नहीं कर रहे, उनके खिलाफ कोई प्रोटेस्ट नहीं कर रहे, बल्कि डॉक्टर लोग मीडिया को बुलाकर अपनी परेशानी बता रहे हैं। 

इट वाज एक्स्ट्रीमली डिफिकल्ट टू एक्सेस द टेर्रेन: CMHO

बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. परेश उपलप ने कहा “इट वाज एक्स्ट्रीमली डिफिकल्ट टू एक्सेस द टेर्रेन,”। इसका मतलब होता है, दूरदराज के गाँवों (घने जंगल और छोटी पहाड़ियों वाले इलाकों) तक पहुँचना बहुत मुश्किल हो रहा है। उनका बच्चा बीमार है लेकिन वह अस्पताल नहीं आ रहे हैं। जब हम बड़ी मुश्किल से उनके पास तक पहुंच रहे हैं तो वह अपने बच्चों को लेकर जंगल में छुप जाते हैं। कुछ बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन उनमें से भी कुछ ऐसे निकले जो अपने बच्चों को चोरी छुपे अस्पताल से लेकर भाग गए। हालत यह हो गई है कि, स्वास्थ्य विभाग की टीम की सुरक्षा और बच्चों को अस्पताल लाने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है। अस्पताल का स्टाफ किसी को बलपूर्वक नहीं रोक सकता, और फिर पैरामेडिकल स्टाफ से कोई डरता भी नहीं है, इसलिए अस्पताल में पुलिस गार्ड लगाना पड़ रहा है। 

खून के नमूने ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स (कोलकाता) और ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (पुणे) भेजे गए हैं।

कुल मिलाकर अभी तक (छह बच्चों की मौत और 100 बच्चों की गंभीर स्थिति के बावजूद) ना तो बीमारी का पता चल पाया है और ना ही बच्चों की हेल्थ में रिकवरी दिखाई दे रही है। स्थिति गंभीर है एवं समय के साथ और अधिक गंभीर होती जा रही है।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!