अधिकारी को ब्लैकमेलिंग के आरोपी सोशल मीडिया एक्टिविस्ट की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 6 जुलाई 2026
: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में एक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट, प्रदीप कुमार जाटव, की अग्रिम जमानत (anticipatory bail) याचिका को खारिज कर दिया है, जिस पर एक महिला GST अधिकारी को ब्लैकमेल करने और जबरन वसूली का आरोप है। 

MP High Court denies anticipatory bail to journalist accused of blackmailing GST officer के इस मामले में अदालत ने पाया कि आरोपी ने अधिकारी का GST पंजीकरण आवेदन खारिज होने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी और डराने-धमकाने का प्रयास किया। न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता ने 30 जून के अपने आदेश में आरोपों की गंभीरता और प्रकृति को देखते हुए आरोपी को राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

Rejected GST registration leads to harassment and extortion charges

अभियोजन (prosecution) के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब जुलाई 2025 में वैध पहचान प्रमाण और अन्य अनिवार्य दस्तावेजों की कमी के कारण प्रदीप कुमार जाटव का GST पंजीकरण आवेदन खारिज कर दिया गया था। आवेदन में कमियां होने की जानकारी मिलने के बावजूद, जाटव बार-बार अधिकारी के कार्यालय जाता रहा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना पंजीकरण देने का दबाव बनाता रहा। बाद में, उसने दावा किया कि उसे लगभग ₹20 लाख का नुकसान हुआ है और अधिकारी से मुआवजे की मांग शुरू कर दी, जो कि rejected GST registration leads to harassment of public servant का एक चिंताजनक मामला है।

Social media defamation and ₹1 crore extortion demand against public official

दिसंबर 2025 से, आरोपी ने कथित तौर पर व्हाट्सएप (WhatsApp) पर झूठी और अपमानजनक सामग्री भेजना और उसे प्रकाशित करने की धमकियां देना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने फेसबुक पर अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनके परिवार के सदस्यों और निवास की तस्वीरें पोस्ट कर दीं। Social media defamation and extortion attempt against government officials के इस मामले में जब अधिकारी ने विरोध किया, तो आरोपी ने अपमानजनक सामग्री का प्रकाशन बंद करने के बदले ₹1 करोड़ की मांग की। उसने अधिकारी के नंबर ब्लॉक करने के बाद भी धमकियां जारी रखीं और उन्हें SC/ST Act के तहत झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी भी दी।

Legal consequences under Bharatiya Nyaya Sanhita for intimidating public servants

अदालत ने केस डायरी में मौजूद व्हाट्सएप चैट और अन्य सबूतों का संज्ञान लिया, जो 'अनुचित लाभ' (unlawful gain) प्राप्त करने के प्रयासों की ओर इशारा करते हैं। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) और 308(6) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो जबरन वसूली (extortion) से संबंधित हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने अपनी कमियों को दूर करने के बजाय एक लोक सेवक को डराने के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया है। न्यायमूर्ति गुप्ता ने स्पष्ट किया कि nature and gravity of the allegations को देखते हुए, वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 482 के तहत विवेकाधीन राहत प्रदान करने के पक्ष में नहीं हैं।

Court observations on misuse of social media by journalists for unlawful gain

सुनवाई के दौरान, आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह केवल कथित गैरकानूनी कार्यों को उजागर कर रहा था। हालांकि, शिकायतकर्ता और राज्य के वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने अपना अवैध काम करवाने में विफल रहने पर अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश की है। हाई कोर्ट ने अंततः पाया कि unauthorized exploitation of public servant’s position और ब्लैकमेलिंग के इस मामले में जमानत का कोई आधार नहीं बनता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने आरोपी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!