इंदौर, 2 जुलाई 2026: हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार से पूछा है कि, जब स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 40% पद रिक्त हैं तो शिक्षक भर्ती क्यों नहीं कर रहे हैं। केंद्र सरकार से पूछा है कि जब मध्य प्रदेश सरकार स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन नहीं करवा पा रही है, तो आप कोई एक्शन क्यों नहीं ले रहे हैं?
MP Teacher Recruitment: PIL by BL Jain
यह जनहित याचिका सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बीएल जैन द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिषेक तुगनावत ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और लाखों विद्यार्थियों को संविधान एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में मंजूर 2.89 लाख शिक्षकों के पदों में से 1.15 लाख पद रिक्त हैं, यानी लगभग 40% पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि 1,895 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है।
CAG REPORT 2025 जनहित याचिका का आधार
याचिका में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रदेश के 83,514 स्कूलों में से लगभग 5 हजार स्कूलों के भवन जर्जर और बच्चों के लिए असुरक्षित हैं। 3,400 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, जबकि करीब 10 हजार स्कूल बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से भी वंचित हैं। 40 हजार स्कूलों में बाउंड्रीवाल नहीं है और हजारों विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है। कई स्कूल आज भी झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं।
प्रदेश में 59 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर नहीं
याचिका में यह भी कहा गया कि डिजिटल शिक्षा की बात करने वाले प्रदेश में 59 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं पिछले दस वर्षों में सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की संख्या में 22 लाख से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में प्रदेश की आबादी बढ़ी है। इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में गिरते विश्वास का संकेत बताया गया।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2026 में सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय तथा छात्राओं के लिए निःशुल्क सैनिटरी पैड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अनेक स्कूलों में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।
सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया गया
याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर पर्याप्त खर्च नहीं किया जा रहा, जबकि अन्य मदों में बड़े पैमाने पर राशि खर्च की जा रही है। साथ ही निर्माण और मरम्मत कार्यों में भ्रष्टाचार तथा सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया गया है।
MP Teacher Recruitment: High Court Asks Government Why Vacancies Remain Unfilled
कोर्ट से प्रदेश के बच्चों के शिक्षा संबंधी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कराने की मांग की गई है। बुधवार 1 जुलाई 2026 को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों सरकारों (केंद्र एवं राज्य) को 17 अगस्त तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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