AOM COLLEGE - UCO BANK BHOPAL घोटाला: 118 स्टूडेंट्स के फर्जी अकाउंट खुलवाए

Updesh Awasthee
भोपाल, 2 जुलाई 2026:
यदि कोई अधिकारी या मैनेजमेंट फर्जीवाड़ा करता है तो यह इंपॉर्टेंट नहीं रह जाता कि उसने क्या किया है क्योंकि वह कभी भी और कहीं भी फर्जीवाड़ा कर सकता है। CBI एक मामला दर्ज किया है जिसमें Academy of Management, Bhopal एवं UCO BANK की मिली भगत का आरोप है। FIR के अनुसार 118 स्टूडेंट्स के फर्जी बैंक अकाउंट खुलवाए गए, और उनमें ट्रांजैक्शन किया गया। इस प्रकार के बैंक अकाउंट का आतंकवादी गतिविधियों में भी उपयोग किया जा सकता था। 

UCO BANK के सीनियर मैनेजर प्रेम वर्मा के खिलाफ CBI में शिकायत

इस मामले का खुलासा यूको बैंक की तरफ से किया गया। भोपाल जोनल ऑफिस के डीजीएम व जोनल हेड लोकेश कुमार ने अपने स्तर पर जांच करने के बाद CBI कोई शिकायत की। इसमें बताया कि, यूको बैंक की हबीबगंज ब्रांच में तत्कालीन सीनियर मैनेजर श्री प्रेम वर्मा ने 118 स्टूडेंट्स के ऐसे खाते ओपन कर दिए, जिनकी जानकारी खुद स्टूडेंट्स को भी नहीं है। ना तो कोई विद्यार्थी ब्रांच में खाता खुलवाने के लिए आया और ना ही बैंक की तरफ से निर्धारित नियमों के अनुसार खाता खोलने से पहले खाताधारक को वेरीफाई किया गया। 

AOM BHOPAL के विनय मल्होत्रा, आदित्य मल्होत्रा सहित पांच आरोपी

शिकायत में बताया गया कि, एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज से जुड़े विनय मल्होत्रा, आदित्य मल्होत्रा, मनोज जैन, राम सिंह वर्मा और विनेश मेश्राम इस मामले में शामिल हैं। जितने भी फर्जी खाता खोले गए वह सब अकैडमी आफ मैनेजमेंट कॉलेज के MBA स्टूडेंट्स हैं। इन बैंक खातों में सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप ट्रांसफर की गई थी जो विद्यार्थियों की जानकारी के बिना निकाल ली गई। आरोप है कि इन लोगों ने छात्रों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए, अपने मोबाइल नंबर खातों से लिंक कराए, एटीएम कार्ड लिए और छात्रवृत्ति की राशि धोखाधड़ी से निकाली। 

AOM College UCO Bank Fraud: CBI FIR Filed in 118 Fake Student Account Case

CBI द्वारा दर्ज की गई FIR में बताया गया है कि, खाते खोलने के लिए अकाउंट ओपनिंग फॉर्म में छात्रों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए और गलत विवरण भरे गए। अनिवार्य केवाईसी सत्यापन भी नहीं किया गया। जांच में कॉलेज की ओर से जारी बताए गए बोनाफाइड प्रमाण-पत्र भी कथित तौर पर फर्जी पाए गए। 

खाताधारकों की लिखित अनुमति के बिना एटीएम कार्ड राम सिंह वर्मा को दिए गए। खातों में कॉलेज से जुड़े लोगों और उनके सहयोगियों के मोबाइल नंबर लिंक किए गए, जिससे छात्रवृत्ति की राशि आते ही ओटीपी लेकर उसी दिन रकम निकाल ली जाती थी।

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