मध्य प्रदेश में शिक्षकों की जासूसी कर रहा है विभाग, प्राइवेसी और भविष्य दोनों खतरे में

Updesh Awasthee
भोपाल, 8 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जो ई-अटेंडेंस का सिस्टम बलपूर्वक लागू किया गया है, असल में वह शिक्षकों की जासूसी कर रहा है। इसका खुलासा अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कर दिया है। यदि ऐसा है तो न केवल शिक्षकों की प्राइवेसी खतरे में है बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों का भविष्य भी खतरे में है जो शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करके सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनना चाहते हैं। 

हमको पता चल जाता है कौन कितने घंटे ऑनलाइन है: स्कूल शिक्षा मंत्री

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने, बैतूल जिले में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान पत्रकारों द्वारा ई-अटेंडेंस के विषय में किए गए सवाल का जवाब देते हुए जो कुछ भी कहा वह सबको पता है लेकिन उनके बयान में नोट करने वाली बात यह है कि उन्होंने कहा, "हमारे पास जो प्लेटफार्म है, उससे पता चल जाता है कि, यह माननीय शिक्षक दिन में कितने घंटे ऑनलाइन रहे।" 
सामान्य तौर से देखे तो यह बयान शिक्षकों की पोल खोल रहा है। जो शिक्षक नेटवर्क का रोना रो रहे हैं, उनका खुलासा हो रहा है कि वह नेटवर्क में है और ऑनलाइन है लेकिन तकनीकी तौर पर देखें तो यह एक साइबर क्राइम है। भोपाल के मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपर श्री गौतम किशोर इसका खुलासा करते हैं। 

एक्सपर्ट का स्टेटमेंट

श्री गौतम किशोर का कहना है कि, कोई भी मोबाइल एप्लीकेशन यूजर की अनुमति के बिना उसको किसी भी प्रकार से ट्रैक नहीं कर सकती। यदि कोई मोबाइल एप्लीकेशन यूजर की अनुमति के बिना यह डाटा कलेक्ट कर रही है कि वह कितनी देर तक ऑनलाइन था, तो यह न केवल निजता के हनन का मामला है बल्कि सरकारी स्तर पर इसको ऑनलाइन सर्विलांस भी कहा जाना चाहिए। 

पिछला उदाहरण

कोई तीन-चार साल पहले की बात है। कुछ वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा दुनिया भर के विद्वानों के बौद्धिक ज्ञान को उनकी अनुमति के बिना कॉपी किया गया और फिर एक दिन अचानक AI लॉन्च कर दिया गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पास अपनी कोई बुद्धि नहीं होती। वह इंटरनेट पर आपके द्वारा अपलोड किए गए फोटो, वीडियो और विचारों से सीखता है और फिर उन लोगों को उत्तर देता है जो AI के पहले तक आपके प्रशंसक हुआ करते थे। मतलब एक मशीन ने आपकी अनुमति के बिना "एकलव्य" की तरह आपसे शिक्षा ग्रहण की और फिर आपके प्रशंसकों को चुरा कर ले गया। 

ऑनलाइन ट्रैकिंग और सर्विलेंस से शिक्षकों को क्या नुकसान हो सकता है

  • उनके व्यक्तिगत जीवन की जानकारी डिपार्टमेंट को मिल जाएगी। अधिकारी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। 
  • हो सकता है सिस्टम यह भी पता लग रहा हो कि शिक्षक किस से बात करते हैं और किसके साथ क्या चैटिंग करते हैं। 
  • Hamare Shikshak मोबाइल एप्लीकेशन का स्वामित्व भले ही स्कूल शिक्षा विभाग के पास है परंतु इसका मेंटेनेंस करने वाले प्राइवेट कर्मचारी हैं। वह डाटा की चोरी कर सकते हैं। 
  • Hamare Shikshak मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा गूगल प्ले स्टोर पर घोषित किया गया है कि "this app doesn’t collect user data" जबकि स्कूल शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि, उनका सिस्टम शिक्षक की ऑनलाइन टाइम टेबल रिकॉर्ड कर रहा है। इसका मतलब गूगल प्ले स्टोर पर गलत घोषणा की गई है?
  • मोबाइल एप्लीकेशन की घोषणाओं में यह भी बताया गया है कि, कोई भी शिक्षक एप्लीकेशन द्वारा रिकॉर्ड किए गए अपने डेटा को कभी भी और किसी भी हालत में डिलीट नहीं करवा सकता।
  • यदि किसी साइबर क्रिमिनल ने डाटा चोरी कर लिया तो लाखों शिक्षकों को ब्लैकमेल किया जा सकता है, उनके बैंक अकाउंट खाली किया जा सकते हैं। 
  • यदि डिपार्टमेंट ने शिक्षकों को ऑनलाइन निगरानी में ले लिया है तो उनके पढ़ाने के तरीके को कॉपी करके AI की मदद से कोई ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है जिसमें विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की जरूरत ही ना पड़े। बस बच्चों को अनुशासन में बनाए रखने के लिए सुपरवाइजर काफी होगा।
  • यदि ऐसा हुआ तो मध्य प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती ही नहीं होगी। मतलब 100 शिक्षकों के स्थान पर केवल 20 शिक्षकों की भर्ती होगी।

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