जबलपुर, 7 जुलाई 2026: प्रमोशन में आरक्षण के 6 मामलो की आज दिनांक 7 जुलाई 26 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री, विवेक रूशिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंड पीठ द्वारा की गई। मामला मध्य प्रदेश के बहुचर्चित प्रमोशन में आरक्षण मामले में मंगलवार 7 जुलाई को हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान गरमागरम बहस हुई। सामान्य वर्ग की और से सरकार पर प्रमोशन की तैयारी और महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन से पीछे हटने का आरोप लगाया।
प्रमोशन में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट में तीखी बहस हुई सरकार ने महाधिवक्ता की अनुपलब्धता का हवाला देकर समय मांगा। सामान्य वर्ग ने महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन का वीडियो दिखाने की भी बात कही। अजाक्स संघ की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, ने कहा कि प्रमोशन पर माननीय हाईकोर्ट की कोई लिखित में रोक नहीं है, अधिवक्ता ने यह भी कहा कि याचिका कर्ता अपने मूल विभाग से दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ है, जो अपने मूल विभाग वापस जाना नहीं चाहते। जिनको संभावना है की यदि पदोन्नति होती है तो उन्हें उनके मूल विभाग जाना पड़ेगा। इसलिए याचिकाकर्ताओ द्वारा प्रमोशन नियमों को चुनोती दी गई है। वास्तविक रूप से इनकी याचिकाओं को देखा जाए तो नियमों के किसी भी प्रावधान को बताने में असफल रहे है कि किस प्रकार उक्त नियम असंवैधानिक है।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कोर्ट को यह भी बताया की आजक्स संघ की और से अप्रेल 2025 में याचिका दाखिल कर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशों के अनुरूप समस्त कर्मचारियों के प्रमोशन करने की राहत चाही गई थी, सरकार ने उक्त याचिका क्रमांक १६३८३/२०२५ के लंबित रहने के दौरान जून 2025 में पदौन्नति नियम बनाए गए है, जो सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को फेयरली यह भी बताया की उक्त नियमों के कुछ नियम हैं जो अनारक्षित पदों पर मेरिटोरियस कर्मचारियों को रोकता है फिर भी आजाक्स संघ उक्त नियमों के समर्थन में है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता जन्ह्बी पंडित ने महाधिवक्ता के नाम पर अगली तारीख पर सुनवाई का अनुरोध किया गया, साथ ही अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा यह भी कहा गया कि इस दिन मामले के गुण दोष पर कोई तर्क नहीं रखे जा सके। विस्तृत पक्ष महाधिवक्ता अगली सुनवाई में प्रस्तुत करेंगे। प्रमोशन आदेशों को लेकर सरकार पर आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने दावा किया कि पिछली रात विधानसभा से 15 विभागों के प्रमोशन आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने अदालत को यह बताने का प्रयास किया कि महाधिवक्ता द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष मौखिक आश्वासन दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक इन नियमों के तहत डीपीसी नहीं की जाएगी।
इन सारे तर्कों का खंडन करते हुए आजाक्स संघ की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय को अवगत कराया की माननीय न्यायालय के रिकॉर्ड के किसी भी आदेश पत्रिका में प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक से संबंधित कोई आदेश पारित नहीं किया गया है, ना ही पदोन्नति नियम 2025 के प्रवर्तन पर माननीय न्यायालय द्वारा किसी भी प्रकार की रोक लगाई गई है। मामलो की अगली सुनवाई दिनांक 13 जुलाई नियत की गई है।

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