MP OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट में बड़ी बहस: 51% आबादी को मात्र 14% आरक्षण, यह कैसा न्याय?

Updesh Awasthee
जबलपुर, 23 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के मामले को लेकर कानूनी लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। 23 जुलाई 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष सातवें दिन की सुनवाई हुई, जिसमें ओबीसी पक्ष ने अपनी दलीलों से सरकार और विरोधियों को कठघरे में खड़ा कर दिया। 

संख्या के अनुपात में न्याय की मांग

याचिकाकर्ता 'एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस' की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने कोर्ट में पुरजोर तरीके से यह बात रखी कि ओबीसी वर्ग के साथ आनुपातिक न्याय नहीं हो रहा है। उन्होंने प्रदेश के जनसंख्या और आरक्षण के आंकड़ों को पेश करते हुए बताया कि:
SC वर्ग: आबादी 15.6% है और आरक्षण 16% दिया जा रहा है।
ST वर्ग: आबादी 21.01% है और आरक्षण 20% मिल रहा है।
सामान्य वर्ग (EWS): आबादी मात्र 13% है, फिर भी उन्हें 10% आरक्षण मिल रहा है।
OBC वर्ग: आबादी 51% है, लेकिन आरक्षण मात्र 14% पर सिमटा हुआ है।

सिर्फ ओबीसी आरक्षण से ही आपत्ति क्यों है? 

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जब सरकार ने इस विसंगति को दूर करने के लिए आरक्षण 27% किया, तो सवर्ण वर्ग और सरकारी अधिकारियों ने सैकड़ों याचिकाएं लगाकर इसे चुनौती दे दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सभी को सिर्फ ओबीसी आरक्षण से ही आपत्ति क्यों है? 

सरकार के पास नहीं है कोई जवाब!

बहस के दौरान यह बड़ी बात निकलकर सामने आई कि मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक कोर्ट को यह स्पष्ट नहीं किया है कि आरक्षण का यह प्रतिशत किस फॉर्मूले या आधार पर निर्धारित किया गया है। सरकार 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' (Proportional Representation) की सही परिभाषा देने में भी विफल रही है। 

OBC के वकीलों को EWS आरक्षण पर आपत्ती

ओबीसी अधिवक्ताओं ने EWS (Economically Weaker Section) आरक्षण को लागू करने के तरीके पर भी गंभीर संवैधानिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत EWS का लाभ सभी वर्गों के गरीबों को मिलना चाहिए, लेकिन राज्य सरकार ने इसे केवल 'सवर्ण वर्ग' के लिए सीमित कर दिया है, जो कि असंवैधानिक है। इसके अलावा, EWS आरक्षण को 'हॉरिजॉन्टल' (Horizontal) के बजाय 'वर्टिकल' (Vertical) लागू किया गया है, जिससे हर वर्ग को आवंटित सीटों में 10% का नुकसान हो रहा है। 

अगली सुनवाई मंगलवार को

ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और अन्य विशेषज्ञों की टीम पैरवी कर रही है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई, मंगलवार को तय की है, जहाँ ओबीसी पक्ष अपनी बहस जारी रखेगा। 

Summary 
This news report covers the ongoing legal battle in the Jabalpur High Court regarding OBC reservation in Madhya Pradesh. On July 23, 2026, during the 7th day of the hearing, advocates argued that providing only 14% reservation to a 51% OBC population is a violation of equality. The report highlights the disparity between population and reservation percentages for SC, ST, and General categories. It also challenges the unconstitutional implementation of EWS reservation as 'Vertical' instead of 'Horizontal'. The bench of Justice Anand Pathak and Justice Vinay Saraf will continue the hearing on July 28, 2026. This case is pivotal for Proportional Representation (Anupatik Pratinidhitv) and social justice in India.

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