भोपाल, 17 जुलाई 2026: दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 के लिए चुनावी बिसात बिछ चुकी है। मुख्य प्रतिद्वंद्वियों (भारतीय जनता पार्टी के आशुतोष तिवारी और इंडियन नेशनल कांग्रेस के घनश्याम सिंह) द्वारा दाखिल किए गए शपथ पत्रों से उनकी शिक्षा, हथियारों के शौक और आपराधिक रिकॉर्ड की विस्तृत जानकारी सामने आई है। यहाँ दोनों प्रत्याशियों का तुलनात्मक विवरण दिया गया है:
1. शैक्षणिक योग्यता: आशुतोष राजनीतिज्ञ राजा साहब अर्थशास्त्र
अनुभव बनाम आधुनिक डिग्री शिक्षा के मामले में दोनों ही प्रत्याशी स्नातकोत्तर (Post Graduate) हैं।
आशुतोष तिवारी: इन्होंने वर्ष 2011 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर, झाँसी से राजनीति शास्त्र में एम.ए. की डिग्री हासिल की है।
घनश्याम सिंह: इनके पास शैक्षणिक अनुभव अधिक पुराना है। इन्होंने वर्ष 1976 में आगरा विश्वविद्यालय के किशोरी रमन कॉलेज, मथुरा से अर्थशास्त्र (Economics) में एम.ए. किया था।
2. आपराधिक रिकॉर्ड: राजा के दामन पर दाग, आशुतोष बेदाग
बेदाग छवि बनाम लंबित मामले शपथ पत्रों के अनुसार, दोनों उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास में बड़ा अंतर है:
आशुतोष तिवारी: इनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है और न ही इन्हें कभी किसी मामले में दोषी ठहराया गया है।
घनश्याम सिंह: इनके विरुद्ध कुल 3 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें मुख्य रूप से वर्ष 2020 के दो मामले शामिल हैं:
थाना कोतवाली दतिया (अपराध क्र. 453/2020): इसमें मारपीट, गाली-गलौज और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने (धारा 323, 294, 506, 427 आदि) के आरोप हैं।
थाना कोतवाली दतिया (अपराध क्र. 378/2020): यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान नियमों का उल्लंघन कर राजनीतिक रैली आयोजित करने से संबंधित है।
हालांकि, घनश्याम सिंह को भी अब तक किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।
3. हथियारों का विवरण: आशुतोष के पास दो-दो बंदूक
बंदूक और राइफल के शौकीन सुरक्षा या शौक के लिए दोनों ही उम्मीदवारों ने हथियार रखे हुए हैं:
आशुतोष तिवारी: इनके पास दो हथियार हैं। एक 1.12 बोर की गन (कीमत लगभग ₹35,000) और एक 2.32 बोर की गन (कीमत लगभग ₹30,000)।
घनश्याम सिंह: इनके पास 75,000 रुपये मूल्य की एक .315 बोर की राइफल है, जिसका लाइसेंस नंबर MP/DT/A/111/T-04/2011 है।
निष्कर्ष:
घनश्याम राजा और आशुतोष दोनों में से किसी ने भी जीवाजी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई नहीं की। उल्लेख जरूरी है कि उस जमाने में जीवाजी यूनिवर्सिटी की अपनी प्रतिष्ठा हुआ करती थी। आशुतोष तिवारी का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है, भाजपा वाले कहते हैं कि बड़े सीधे-साधे नेता हैं, लेकिन एक बात समझ में नहीं आ रही कि फिर 2-2 बंदूक लेकर क्यों चलते हैं। राजा के पास हथियार तो समझ में आता है, और फिर क्रिमिनल रिकॉर्ड भी है, लेकिन आशुतोष तिवारी जैसे संत को हथियारों की क्या जरूरत। श्री तिवारी को 2-2 बंदूकन का लाइसेंस मिला किस आधार पर? किससे दुश्मनी है? कैसी दुश्मनी है? जान का खतरा क्यों है? आत्मरक्षा की जरूरत क्यों है?।

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