भोपाल, 13 जुलाई 2026: पूरे मध्य प्रदेश में नगर निगम और नगर पालिकाएं अपने नागरिकों को वाटर सप्लाई करती हैं लेकिन भोपाल नगर निगम यह काम नहीं करता। इसके कारण भोपाल में हजारों लोगों को हर तीसरे दिन टैंकर मंगवाना पड़ता है। सांसद आलोक शर्मा और महापौर मालती राय ने अपने चुनाव में इसकी घोषणा की थी लेकिन वादा पूरा नहीं किया और अब हाई वोल्टेज ड्रामा कर रहे हैं।
बात क्या है
बात ऐसी है कि, भोपाल की लगभग 900 रेजिडेंशियल सोसायटी में नगर निगम द्वारा वाटर सप्लाई नहीं किया जाता। भोपाल में निगम की पॉलिसी है कि, जो बिल्डर कॉलोनी बनाएगा, वही कॉलोनी में पानी का इंतजाम भी करेगा। शुरुआत में बात अच्छी लगी लेकिन अब बिल्डरों द्वारा बनाई गई कॉलोनियां, रेजिडेंशियल सोसायटी को हैंडोवर कर दी गई है और रेजिडेंशियल सोसाइटियों को पता चल रहा है कि बिल्डर ने ट्यूबवेल उत्खनन में, पाइप लाइन के नेटवर्क में या फिर वॉटर टैंक में गड़बड़ी की है। कुछ कॉलोनी में वाटर लेवल नीचे चला गया है। इसलिए ठीक प्रकार से पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। हर कॉलोनी को पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की यह पॉलिसी, भोपाल की समस्या बनती जा रही है।
सांसद और महापौर ने क्या वादा किया था
सांसद श्री आलोक शर्मा और महापौर श्रीमती मालती राय ने अपने चुनाव में पब्लिक से प्रॉमिस किया था कि वह नगर निगम के जरिए हर घर को डायरेक्ट वाटर सप्लाई देंगे। मतलब सभी 900 कॉलोनी में नगर निगम द्वारा वॉटर पाइपलाइन नेटवर्क फैलाया जाएगा और नगर निगम की ओर से वाटर सप्लाई किया जाएगा जैसा नगर निगम को हैंडोवर की गई कॉलोनियों में किया जा रहा है।
तो अब हाई वोल्टेज ड्रामा क्या है
हाई वोल्टेज ड्रामा यह है कि, दोनों ने अपना वादा पूरा नहीं किया, और पब्लिक के सामने वादा खिलाफ बनने से बचने के लिए, पब्लिक के साथ राजनीति खेल गए। पिछले दिनों एक प्रस्ताव बना कर शासन को भेज दिया गया। इसके लिए 874 करोड रुपए की मांग की गई। स्वाभाविक है कि यह प्रस्ताव जिस तरह से भेजा गया था, उसको रिजेक्ट ही होना था। वह रिजेक्ट होकर आ गया। अब दोनों नेता अपने अधिकारियों को डांट रहे हैं, हमको क्यों नहीं बताया। अखबारों में खबरें छपपा रहे हैं। पब्लिक को बता रहे हैं कि देखो हम कितने मासूम हैं, हमने तो पूरी कोशिश की थी, हमको तो पता ही नहीं है, हमारे साथ ही धोखा हो गया है।
वादा पूरा करने के लिए क्या करना था?
श्री आलोक शर्मा और श्रीमती मालती राय को अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए थी। मतलब शासन को प्रस्ताव भेजने से पहले भोपाल के सभी विधायकों को साथ में लेकर, और विभागीय मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गी की मौजूदगी में, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मुलाकात करनी चाहिए थी और यह बताना चाहिए ताकि, भोपाल की 900 प्राइवेट कॉलोनियों में नर्मदा जल योजना कितनी जरूरी है। मध्य प्रदेश में नेताओं को जो काम करना होता है, उसके लिए पहले मीटिंग होती है, सहमति बनती है, उसके बाद प्रस्ताव भेजा जाता है। जो काम नहीं करना होता है, इसका प्रस्ताव अधिकारियों के माध्यम से भेजा जाता है।
फ्रैक्चर ठीक नहीं हुआ और फफोले भी पड़ गए
इस मामले में प्रॉब्लम सॉल्व नहीं हुई और दूसरी प्रॉब्लम शुरू हो गई है। नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने बताया है कि निजी नल कनेक्शन योजना को आउटसोर्स मॉडल के माध्यम से लागू किया जाएगा। मतलब प्राइवेट कंपनी, रेजिडेंशियल सोसायटी के साथ मिलकर काम करेगी। मतलब भोपाल की 900 कॉलोनियों में वाटर सप्लाई का काम नगर निगम नहीं बल्कि प्राइवेट कंपनी करेगी और रेजिडेंशियल सोसायटी, उसकी नोडल एजेंसी होगी।

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