भोपाल समाचार, 22 जुलाई 2026: भारत सरकार ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन को दिल्ली वापस बुला लिया है। रिक्त पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी श्री अशोक वर्णवाल को मध्य प्रदेश शासन का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। हम आपको श्री वर्णवाल के बारे में नेगेटिव पॉजिटिव सब कुछ बता रहे हैं ताकि मध्य प्रदेश की जनता और कर्मचारी चंद सके कि उनका मुख्य सचिव कैसा है:-
श्री अशोक कुमार बर्णवाल (अशोक वर्णवाल) मध्य प्रदेश कैडर के 1991 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। 27 जनवरी 1967 को बिहार में जन्म हुआ। उम्र मात्र 59 वर्ष है मतलब मध्य प्रदेश के यंगेस्ट चीफ सेक्रेटरी हैं। माइनिंग इंजीनियरिंग में B.E. (स्नातक) और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। मतलब उत्खनन करना आता है। मध्य प्रदेश सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं और वर्तमान में अपर मुख्य सचिव (ACS), वन एवं वन्यजीव विभाग के रूप में कार्यरत हैं (1 जुलाई 2024 से)। उन्हें अन्य विभागों (जैसे पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, कृषि आदि) में भी अतिरिक्त प्रभार मिला है।
करियर की पॉजिटिव बातें
1991 बैच के अनुभवी अधिकारी हैं और करियर में जिला स्तर से लेकर राज्य एवं केंद्र स्तर तक विभिन्न जिम्मेदारियाँ संभाली हैं। जिला कलेक्टर के रूप में गुना, देवास और शहडोल जैसे जिलों में सेवा दे चुके हैं।
मुख्यमंत्री सचिवालय में अतिरिक्त सचिव/निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वित्त, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, बागवानी, शिक्षा मिशन आदि विभागों में प्रमुख सचिव/सचिव स्तर के पद पर काम कर चुके हैं।मार्कफेड (मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ) के प्रबंध निदेशक और केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में निजी सचिव/निदेशक स्तर के पद काम कर चुके हैं। अक्टूबर 2022 में अपर मुख्य सचिव (ACS) रैंक पर पदोन्नति हुई एवं वन, पर्यावरण, कृषि उत्पादन आयुक्त, सहकारिता आदि विभागों से जुड़े रहे।
मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल खुद को भगवान समझते हैं?
कोई बड़ा व्यक्तिगत भ्रष्टाचार या राष्ट्रीय स्तर का घोटाला सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है लेकिन, हाल के वर्षों में कुछ आलोचनाएँ और विवाद रहे हैं। इसी साल 2026 में वन/पर्यावरण विभाग से जुड़े एक मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कुछ अनुमतियों (permissions, खासकर 237 से संबंधित) को रद्द करने का आदेश दिया था। आरोप है कि अशोक बर्णवाल ने राज्य सरकार के निर्णय का हवाला देते हुए NGT के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया या उस पर सवाल उठाया। वकील विवेक तनखा (कांग्रेस से जुड़े) सहित कुछ सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया ने इसे “प्रशासनिक अनुशासनहीनता” या “NGT से ऊपर होने का दावा” बताया। NGT ने अधिकारियों पर “खुद को भगवान समझने” जैसी टिप्पणी भी की थी। यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम से जुड़ा है और सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन बताया गया।
इसके अलावा कुछ छोटी-मोटी बातें हैं लेकिन इतनी बड़ी प्रशासनिक सेवा में, थोड़े बहुत विवाद चलते रहते हैं। अभी तक किसी बड़े घोटाले का आरोप, या किसी अन्य मामले में जांच और सजा जैसी स्थिति नहीं है।

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