SAGAR कलेक्टर के विरुद्ध हाईकोर्ट में अवमानना याचिका: देव दत्तात्रेय लोक न्यास का कानूनी संघर्ष

Updesh Awasthee
जबलपुर, 17 जून 2026:
सागर जिले के गौरझामर स्थित देव दत्तात्रेय लोक न्यास (Dev Dattatreya Public Trust) की संपत्ति पर हो रहे अतिक्रमण और प्रशासन की कथित अनदेखी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। न्यासियों द्वारा सागर कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, देवरी एस.डी.एम. (SDM) मुनब्बर खान और तहसीलदार श्रीमती प्रीती चौरसिया के विरुद्ध मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में Contempt Petition against Sagar District Administration (न्यायालय अवमानना याचिका) दायर की गई है। ट्रस्टियों का आरोप है कि जिला प्रशासन न केवल अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दे रहा है, बल्कि लोक न्यास परिसर में चल रही अवैध और अनैतिक गतिविधियों को रोकने में भी विफल रहा है।

Allegations of Land Mafia Encroachment on Dev Dattatreya Trust Property in Sagar

न्यासियों ने जिला प्रशासन पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भू-माफियाओं के साथ मिलकर ट्रस्ट की संपत्ति को नष्ट (Destruction of trust property by land mafia) करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन को पूर्व में सागर कलेक्टर, एस.पी. और एस.डी.एम. देवरी को इस विषय में कई लिखित आवेदन और अभ्यावेदन (Representations) दिए गए थे, लेकिन भू-माफियाओं के विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। इसके विपरीत, न्यासियों का दावा है कि प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को हटाने के बजाय मंदिर के पुजारी और एक दर्जन से अधिक भक्तों पर ही दंडात्मक कार्यवाही शुरू कर दी है।

Illegal Actions against Devotees and Violation of 2012 High Court Stay Order

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एस.डी.एम. मुनब्बर खान द्वारा तहसीलदार के माध्यम से मंदिर के पुजारी और भक्तों के विरुद्ध CrPC Section 107-116 restrictive action (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107-116 की प्रतिबन्धात्मक कार्यवाही) की गई है। जबकि, हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2012 में एक अंतरिम आदेश पारित कर ट्रस्ट की संपत्ति पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। इन आदेशों की अवहेलना करते हुए न्यास की जमीन पर बिना किसी सक्षम स्वीकृति के illegal shopping complex construction on trust land (शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का अवैध निर्माण) कर लिया गया है।

Supreme Court Upholds Restoration of Trustees in Dev Dattatreya Trust Case

प्रशासनिक स्तर पर अनियमितताओं का सिलसिला यहीं नहीं थमा। एस.डी.एम. देवरी द्वारा बिना किसी कानूनी आधार के ट्रस्ट रजिस्टर से चार न्यासियों के नाम हटा दिए गए थे, जिसे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 'अवैधानिक' करार दिया था। इस निर्णय पर Supreme Court verdict on Dev Dattatreya Trust members (सर्वोच्च न्यायालय की मुहर) भी लग चुकी है, इसके बावजूद एस.डी.एम. मुनब्बर खान द्वारा इन न्यायिक आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया और ट्रस्ट की जमीनों के सीमांकन (Measurement) के अनुरोध को भी अनसुना कर दिया गया।

Legal Proceedings under Article 215 against Sagar Administration Officers

प्रशासन के इस अड़ियल रवैये से व्यथित होकर न्यासियों ने संविधान के अनुच्छेद 215 और Contempt of Courts Act Section 12 के तहत याचिका क्रमांक 3764/2026 दाखिल की है। इस याचिका के माध्यम से दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की मांग की गई है। साथ ही, न्यासियों ने Registrar Public Trust Sagar से वित्तीय वर्ष 2001 से 2025-26 तक का पूरा आय-व्यय का हिसाब (Audit accounts) उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है, ताकि ट्रस्ट की आर्थिक स्थिति पारदर्शी हो सके।

Legal Representation and RTI for Trust Accounts in MP High Court

इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में न्यासियों की ओर से RPS Law Associates के वरिष्ठ अधिवक्ता यशवंत सिंह लोधी, अभिलाषा सिंह और काजल विश्वकर्मा पैरवी कर रहे हैं। यह मामला अब न केवल एक धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति बचाने का है, बल्कि यह जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और न्यायिक आदेशों की गरिमा बनाए रखने से भी जुड़ा हुआ है। भक्तगण और क्षेत्र की जनता अब हाईकोर्ट के रुख पर अपनी नजरें टिकाए हुए है।

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