भोपाल, 17 जून 2026: यूजीसी विवाद तो आपको याद ही होगा। कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा के सदस्य श्री दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भेदभाव मिटाने के नाम पर भेदभाव बढ़ाने वाला कानून बनवा दिया था। पूरे देश में तनाव फैल गया था। 16 जून को एक बार फिर ऐसा ही कर दिया गया है। श्री दिग्विजय सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ जातिवाद का एक ऐसा बम प्लांट कर दिया है, जो इससे पहले केंद्र में कांग्रेस की सरकार को कमजोर कर चुका है।
निजी विश्वविद्यालयों में आरक्षण लागू करने हेतु कानून बनाने की सिफारिश
श्री दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 16 जून को 379वीं, 380वीं और 381वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें सरकार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को गड़बड़ बताया और कई सुझाव दिए। संसदीय स्थायी समिति का अपना महत्व होता है। उसकी रिपोर्ट और सुझावों पर अमल करना पड़ता है। श्री दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि निजी विश्वविद्यालयों में SC/ST और OBC वर्गों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। इसके समाधान के लिए समिति ने अनुच्छेद 15(5) के तहत निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने के लिए कानून बनाने की सिफारिश की है।
निजी विश्वविद्यालयों में आरक्षण लागू हुआ तो क्या होगा
- प्राइवेट यूनिवर्सिटी में मेरिट के आधार पर एडमिशन मिलते हैं। आरक्षण के कारण यूनिवर्सिटी की मेरिट पर असर पड़ेगा। आलोचक कहते हैं कि इससे "रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन" होता है।
- प्राइवेट यूनिवर्सिटी की फीस ज्यादा होती है। आरक्षण से एडमिशन तो मिल जाएगा लेकिन ट्यूशन फीस, कॉलेज की लाइब्रेरी और अन्य फीस, हॉस्टल, खाना, लैपटॉप आदि का खर्च खुद उठाना पड़ेगा। कॉलेज में शिक्षा का अधिकार अधिनियम तो लागू नहीं होता इसलिए सरकार को स्कॉलरशिप के नियम बदलने पड़ेंगे। या फिर प्राइवेट यूनिवर्सिटी सामान्य छात्रों की फीस बढ़ा देगी, ताकि आरक्षण से एडमिशन लेने वालों की फीस घटाई जा सके। मतलब आरक्षण से एडमिशन लेने वालों की फीस सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को अथवा उनके पेरेंट्स को देनी होगी।
- आरक्षण को लेकर कैंपस में विवाद शुरू हो जाएंगे और प्राइवेट यूनिवर्सिटी केंपस पॉलिटिक्स का अड्डा बन जाएंगे।
निजी विश्वविद्यालयों में आरक्षण का कानून कांग्रेस ने बनाया था, फिर लागू क्यों नहीं किया?
✒ कांग्रेस पार्टी ने शुरू से ही निजी विश्वविद्यालयों में आरक्षण लागू करने की कोशिश की। 2005 से पहले इस दिशा में सबसे पहला प्रयास किया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में P.A. Inamdar v. State of Maharashtra मामले में फैसला सुनाया की जिन स्कूलों कॉलेजों को सरकार से अनुदान नहीं दिया जाता उनके ऊपर सरकार अपनी आरक्षण पॉलिसी नहीं थोप सकती। कांग्रेस पार्टी को सुप्रीम कोर्ट का या फैसला पसंद नहीं आया।
✒ UPA-1 के समय संविधान में 93वाँ संशोधन किया गया। संसद ने संविधान (93वाँ संशोधन) अधिनियम, 2005 पारित किया, जिसे जनवरी 2006 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। इस संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 15 में नया अनुच्छेद 15(5) जोड़ा गया। इस प्रावधान का सार यह था कि:
राज्य कानून बनाकर SC, ST और सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए शैक्षणिक संस्थानों में विशेष प्रावधान कर सकता है, जिनमें निजी शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं, लेकिन अल्पसंख्यक संस्थान इससे बाहर रहेंगे।
✒ फिर संसद ने Central Educational Institutions (Reservation in Admission) Act, 2006 पारित किया। इस कानून ने:-
- SC के लिए 15%
- ST के लिए 7.5%
- OBC के लिए 27%
आरक्षण का प्रावधान किया और बड़ी चतुराई के साथ इस कानून को Central Universities, IIT, IIM, NIT आदि पर लागू कर दिया ताकि अगले चरण में यह निजी विश्वविद्यालयों और निजी अनुदानरहित संस्थानों पर लागू किया जा सके। इसके बाद प्राइवेट यूनिवर्सिटी वाले कांग्रेस के खिलाफ एकजुट हो गए और फिर कई प्रयासों के बावजूद कांग्रेस पार्टी के जातिवादी नेता प्राइवेट संस्थानों में आरक्षण लागू नहीं करवा पाए। कहा तो यह भी जाता है कि 2014 में, कांग्रेस की सरकार गिरने के पीछे, कई कारणों में यह भी एक महत्वपूर्ण कारण था।
मोदी सरकार के खिलाफ क्या साजिश हुई है
श्री दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि 'सेंट्रल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2006' (CEI Act) जो केवल केंद्रीय संस्थानों पर लागू है, सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटी और इंस्टिट्यूट पर लागू हो जाए। मतलब जो काम कांग्रेस के नेताओं का एक गुट UPA सरकार के समय नहीं कर पाया, और जिसके कारण कांग्रेस को देशभर में नुकसान हुआ, वही काम मोदी सरकार कर दे। यदि मोदी सरकार ने ऐसा किया तो, जिस विरोध का सामना कांग्रेस को करना पड़ा था, इस विरोध का सामना मोदी सरकार को भी करना पड़ेगा। इस प्रकार मोदी सरकार सामान्य जाति वर्ग में थोड़ा कमजोर पड़ जाएगी, और बताने की जरूरत नहीं कि 2029 में इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा।
After UGC Row, Digvijaya Singh Panel Lands in Fresh Controversy
कुल मिलाकर बात सिर्फ इतनी सी है कि, भारत में सरकार भाजपा की है लेकिन उच्च शिक्षा विभाग में आज भी कांग्रेस की पॉलिसी चल रही है। संसदीय समिति के अध्यक्ष श्री दिग्विजय सिंह बड़ी चतुराई के साथ अपनी रिपोर्ट में ऐसी सिफारिश कर देते हैं, जिसके आधार पर बनने वाले नियम और कानून कांग्रेस को फायदा और भाजपा को नुकसान पहुंचाते हैं। सरकार के खिलाफ विरोध खड़ा होता है।
#WATCH | दिल्ली: कांग्रेस MP दिग्विजय सिंह शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक में शामिल होने के लिए पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी (PHA) पहुंचे।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 1, 2026
बैठक का पहला एजेंडा शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ग्रांट्स की मांगों (2025-26) पर 364वीं रिपोर्ट… pic.twitter.com/23MxswE3Du

