BHARAT में उच्च शिक्षा सुधार हेतु संसदीय समिति की 381वीं रिपोर्ट सरल हिंदी में पढ़िए

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 16 जून 2026:
शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उच्च शिक्षा विभाग के लिए अनुदान की मांगों (2025-26) पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा की। इस समाचार में हम समिति द्वारा प्रस्तुत की गई 381वीं रिपोर्ट को सरल हिंदी में प्रकाशित कर रहे हैं ताकि सभी विद्यार्थी रिपोर्ट को ठीक प्रकार से पढ़ सकें और निष्कर्ष तक पहुंच सकें। 

Institutions of Eminence Scheme status JNU: आठ साल बाद भी 20 में से केवल 12 संस्थान ही अधिसूचित

समिति ने पाया कि IoE योजना के लॉन्च होने के आठ साल बीत जाने के बाद भी अनिवार्य 20 संस्थानों में से केवल 12 को ही अधिसूचित किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सामाजिक विज्ञान और मानविकी (Social Sciences and Humanities) के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों, जैसे Jawaharlal Nehru University (JNU), को इस योजना में शामिल करने की सिफारिश पर विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। समिति ने शेष 8 संस्थानों को अधिसूचित करने के लिए एक time-bound roadmap तैयार करने का निर्देश दिया है।

AISHE survey data delay 2025: डेटा में देरी से नीति निर्माण और सामाजिक न्याय प्रभावित

समिति ने All India Survey of Higher Education (AISHE) के 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के डेटा प्रकाशन में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, तीन वर्षों की रिपोर्ट एक साथ जारी करने से वार्षिक सर्वेक्षण का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। समिति ने सिफारिश की है कि SC/ST/OBC और EWS नामांकन की सटीक निगरानी के लिए student-level data collection को जल्द से जल्द अपनाया जाए और प्रकाशन के लिए एक निश्चित वार्षिक समयसीमा (annual timeline) निर्धारित की जाए।

Interest subvention scheme for higher education students: शिक्षा ऋण के लिए आय सीमा को ₹8 लाख करने की मांग

संसदीय समिति ने वर्तमान वित्तीय सहायता ढांचे में "प्रणालीगत अपर्याप्तता" (systemic inadequacy) की पहचान की है। समिति का तर्क है कि PM-Vidyalaxmi scheme के तहत 3% ब्याज छूट (interest subvention) केवल 'क्वालिटी संस्थानों' के छात्रों को मिल रही है, जिससे बहुसंख्यक छात्र वंचित हैं। समिति ने जोर देकर कहा है कि PM-USP CSIS और अन्य सभी योजनाओं के लिए पारिवारिक आय सीमा को बिना किसी संस्थान-रैंकिंग की शर्त के समान रूप से बढ़ाकर ₹8 लाख वार्षिक किया जाना चाहिए।

Priority Sector Lending limit for education loans: ₹25 लाख की सीमा नाकाफी, ₹50 लाख की सिफारिश

उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत को देखते हुए समिति ने Priority Sector Lending (PSL) की वर्तमान सीमा पर सवाल उठाए हैं। हालांकि RBI ने इस सीमा को ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया है, लेकिन समिति का मानना है कि यह ₹50 लाख की उनकी अनुशंसित सीमा से काफी कम है। समिति ने विभाग को निर्देश दिया है कि वह वित्त मंत्रालय और RBI के साथ मिलकर collateral-free loans की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए PSL सीमा को ₹50 लाख तक ले जाने का प्रयास करे।

National Testing Agency reform roadmap HLCE: पेपर लीक और अनियमितताओं पर समिति सख्त

समिति ने National Testing Agency (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हालांकि मंत्रालय ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी (HLCE) का गठन किया है, लेकिन समिति का मानना है कि छात्रों की चिंता दूर करने के लिए इन सिफारिशों को लागू करने हेतु एक time-bound implementation roadmap सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है।

Credit guarantee fund scheme for education loans limit: ₹7.5 लाख की गारंटी सीमा में 2015 से कोई बदलाव नहीं

Credit Guarantee Fund Scheme for Education Loans (CGFSEL) की समीक्षा करते हुए समिति ने बताया कि ₹7.5 लाख की गारंटी कवर सीमा 2015 से स्थिर है, जबकि शिक्षा मुद्रास्फीति (inflation) चरम पर है। समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि गारंटी कवर को तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर ₹20 लाख किया जाए ताकि अधिक से अधिक छात्रों को बिना किसी हिचकिचाहट के ऋण मिल सके।

JNU Faculty Promotion Issues: योग्य शिक्षकों की पदोन्नति में वर्षों की देरी पर नाराजगी

रिपोर्ट में Jawaharlal Nehru University (JNU) का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वहां कई योग्य फैकल्टी सदस्यों की पदोन्नति (promotion) वर्षों से लंबित है। विभाग द्वारा इस पर दिए गए सामान्य जवाबों को खारिज करते हुए समिति ने निर्देश दिया है कि विशिष्ट मामलों की जांच की जाए और योग्य उम्मीदवारों को समय पर उनका हक दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई (expeditious action) की जाए।

Financial sustainability of IIIT PPP model: ₹128 करोड़ की पूंजीगत लागत को अपर्याप्त बताया

समिति ने पाया कि IIITs (PPP) के लिए स्वीकृत ₹128 करोड़ की पूंजीगत लागत 2010 से जमी हुई है और इसमें मुद्रास्फीति के अनुसार कोई समायोजन नहीं किया गया है। वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने के लिए यह राशि पूरी तरह अपर्याप्त है। समिति ने सभी 20 IIITs की व्यापक वित्तीय समीक्षा करने और वर्तमान मूल्य स्तरों के आधार पर एक बार की grant-based capital infusion का प्रस्ताव तैयार करने की सिफारिश की है।

ICSSR Research Institutes 7th Pay Commission: शोधकर्ताओं को नहीं मिल रहा सातवें वेतन आयोग का लाभ

समिति ने ICSSR से संबद्ध अनुसंधान संस्थानों और क्षेत्रीय केंद्रों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में हो रही निरंतर देरी पर नाराजगी जताई है। यह देरी संस्थानों की गुणवत्तापूर्ण शोधकर्ताओं को आकर्षित करने और बनाए रखने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। समिति ने विभाग को इस मामले को वित्त मंत्रालय के साथ सक्रियता से उठाने का निर्देश दिया है।

यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को न केवल बड़े बजटीय आवंटन की आवश्यकता है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र-केंद्रित वित्तीय नीतियों की भी तत्काल दरकार है। 

Annual Admissions Report for CFIs: एडमिशन में सामाजिक विविधता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत रिपोर्ट की मांग

संसदीय समिति ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण सिफारिश की है कि Jawaharlal Nehru University (JNU) सहित सभी केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों (Centrally Funded Institutions) को अपनी शैक्षणिक और कार्यकारी परिषद में एक विस्तृत annual admissions report पेश करनी चाहिए। इस रिपोर्ट में छात्रों के लिंग, जाति, सामाजिक, जातीय पृष्ठभूमि, ग्रामीण-शहरी मूल और आर्थिक वर्ग का स्पष्ट विवरण होना चाहिए। समिति का मानना है कि इससे यह निगरानी करना आसान होगा कि क्या संस्थान वास्तव में समावेशी और विविधतापूर्ण बने हुए हैं।

Discretionary Funds for Research Professors: शोध की स्वतंत्रता के लिए प्रोफेसरों को मिले वित्तीय अधिकार

समिति ने विशेष रूप से विज्ञान के क्षेत्रों में कार्यरत प्रोफेसरों की academic freedom (अकादमिक स्वतंत्रता) को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त समर्थन की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रयोगशालाओं के लिए छोटे और मध्यम स्तर के भुगतान हेतु बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन से मंजूरी लेने की आवश्यकता बौद्धिक अभिव्यक्ति में बाधा उत्पन्न करती है। इसके समाधान के लिए समिति ने प्रोफेसरों को discretionary funds (विवेकपूर्ण निधि) उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है ताकि शोध कार्य बिना प्रशासनिक देरी के सुचारू रूप से चल सकें।

CABE Meetings Education Policy 2026: केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के लिए CABE की नियमित बैठकें अनिवार्य

शिक्षा के समवर्ती विषय (concurrent subject) होने के नाते, समिति ने केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत एकता पर जोर दिया है। रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि Central Advisory Board of Education (CABE), जो शिक्षा पर सबसे बड़ा परामर्शदाता निकाय है, की बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं। समिति ने सिफारिश की है कि बेहतर समन्वय और unified thinking on education policy के लिए CABE की बैठकें वर्ष में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से बुलाई जानी चाहिए।

Marquee Institute for Higher Education in Northeast: पूर्वोत्तर भारत के लिए विशिष्ट 'दिग्गज संस्थान' और शोध केंद्र की योजना

प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिपादित 'पूर्वोदय' (Purvodaya) की भावना के अनुरूप, समिति ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में उच्च शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की मांग की है। समिति ने पाया कि इस क्षेत्र की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और जनजातीय संस्कृति को देखते हुए वहां विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और मानविकी के लिए कम से कम एक marquee institute (दिग्गज संस्थान) विकसित किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में, TISS Guwahati को उसके क्षेत्रीय शोध और दाखिला नीति के कारण एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा गया है।

Usage Tracking for One Nation One Subscription Journals: ONOS योजना की लागत प्रभावशीलता और संसाधनों का उचित उपयोग

समिति ने सरकार की 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' (ONOS) योजना का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया है। हालांकि यह योजना 13,000 पत्रिकाओं (journals) तक पहुंच प्रदान करती है, लेकिन समिति का तर्क है कि CRRI जैसे विशिष्ट शोध संस्थानों के लिए यह देखा जाना चाहिए कि वे इन संसाधनों का कितना प्रभावी उपयोग कर रहे हैं। INFLIBNET’s Infistats portal के माध्यम से डेटा ट्रैक करने की सिफारिश की गई है ताकि अनावश्यक लागत को कम किया जा सके और योजना के ढांचे में समय-समय पर सुधार किया जा सके।

Accountability of Department of Higher Education: विभाग के अस्पष्ट जवाबों पर संसदीय समिति की कड़ी आपत्ति

रिपोर्ट के विभिन्न हिस्सों में समिति ने इस बात पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए जवाब अक्सर specificity (विशिष्टता) की कमी रखते हैं। कई मामलों में विभाग ने केवल नियमों की पुनरावृत्ति की है या अधूरे जवाब दिए हैं। समिति ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि भविष्य में विभाग के उत्तर व्यापक, निर्णायक और समस्या-समाधान की दिशा में ठोस होने चाहिए, न कि केवल सामान्य प्रक्रियाओं का उल्लेख मात्र।

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