जीतू पटवारी जी यह देखिए, फ्री में ट्रांसफर और प्रमोशन हुआ है, आवेदन तक नहीं करना पड़ा - New scam exposed

Updesh Awasthee
भोपाल, 26 जून 2026:
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी कहते हैं कि मध्य प्रदेश में ट्रांसफर इंडस्ट्री चल रही है। बिना रिश्वत दिए कोई ट्रांसफर नहीं हो रहा। रिश्वत की रकम सीधे मंत्री तक जा रही है, लेकिन हमारे पास सबूत है, फ्री में न केवल ट्रांसफर हुआ है, बल्कि प्रमोशन भी हुआ है, और डिपार्टमेंट का न्याय देखिए - शिक्षक को आवेदन तक नहीं करना पड़ा। ट्रांसफर भी यहां वहां नहीं उज्जैन हुआ है। वही उज्जैन जो 2028 में मालामाल होने वाला है। 

Jitu Patwari, Take a Look: Transfer and Promotion Granted Without Any bribe and Application

डिपार्टमेंट का नाम है जनजातीय कार्य विभाग, मंत्री श्री विजय शाह हैं और शिक्षक का नाम है मोहनलाल वर्मा। दिनांक 22 में को जारी की गई प्रमोशन विद ट्रांसफर लिस्ट में नंबर 19 पर इनका नाम है। इनको उ​मावि तारापुर जिला धार से प्रमोट करते हुए हुए प्राचार्य ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय लालपुर, उज्जैन ट्रांसफर किया गया है। इसके लिए किसी को एक पैसा रिश्वत नहीं दी गई। यहां तक की आवेदन भी नहीं किया गया। सब कुछ अपने आप हुआ है। प्रमोशन भी मिला है और उज्जैन जैसा शहर भी मिला है। प्रॉब्लम केवल इतनी सी है कि, यह गुड न्यूज़ मिलने के 2 साल पहले 11 अप्रैल 2024 को श्री मोहनलाल वर्मा का निधन हो चुका है। 

अब आप कहोगे कि डिपार्टमेंट को पता नहीं होगा, घर वालों ने बताया नहीं होगा। तो ऐसा भी नहीं है, परिवार ने डिपार्टमेंट को सूचना भी दी और डिपार्टमेंट ने कर्मचारी की मृत्यु के उपरांत दिए जाने वाले सभी प्रकार के लाभ भी दे दिए। मतलब पूरा हिसाब किताब हो चुका है, इसके बाद भी अवर सचिव जनजातीय कार्य विभाग मप्र शासन द्वारा ट्रांसफर कर दिया गया। 

यह नए किस्म का घोटाला है 

सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग धार नरोत्तम बरकड़े ने कहा कि, हमारा रिकॉर्ड अपडेट है। श्री मोहनलाल वर्मा का निधन हो चुका है और हमने उनके परिवार को सभी लाभ एवं सुविधाएं दे दिए। अब यह ट्रांसफर कैसे हो गया मुझे नहीं मालूम। इधर डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि, जैसे मेडिकल सीट मामले में घोटाले होते हैं, यह कुछ ऐसा ही घोटाला है। मृत कर्मचारी का ट्रांसफर कर देते हैं। जब तक खबर छपती है और जांच होती है तब तक ट्रांसफर पर फिर से प्रतिबंध लग जाता है, प्रक्रिया पूरी हो जाती है। अब मंत्रालय में बैठे अधिकारी के पास एक सीट खाली होती है, इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के बाद वह जिसको चाहे उसको ट्रांसफर कर सकता है। मतलब ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ जाकर भी ट्रांसफर कर सकता है क्योंकि प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रांसफर पॉलिसी शिथिल हो जाती है।

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