भोपाल, 23 जून 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में एक लालची पुलिस अधिकारी तैनात है। उसमें लॉजिक, कॉमन सेंस और जागरूकता की भी कमी है। कजलीखेड़ा पुलिस थाने में दर्द हुए एक मामले में यह सब कुछ एक्सपोज हो गया है।
Greedy Police Officer Under Scanner at CM House Bhopal
पुलिस अधिकारी का नाम है राजीव सिंह परिहार। उम्र 41 वर्ष, यानी नई नियुक्ति नहीं है। पद हेड कांस्टेबल यानी अनुभवी भी हैं। बैरागढ़ चीचली की अंशुल विहार कॉलोनी में रहते हैं। पुलिस के रजिस्टर में दर्ज मामले के अनुसार 18 जून को श्री राजीव सिंह परिहार सीएम हाउस में ड्यूटी पर से तभी उनके मोबाइल पर एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एक्सिस बैंक का रिलेशनशिप अधिकारी बताया और यह भी बताएं कि उनके क्रेडिट कार्ड में 10000 रिवॉर्ड पॉइंट इकट्ठे हो गए हैं जो 2 दिन बाद एक्सपायर हो जाएंगे। फिर उसने रिवॉर्ड प्वाइंट्स को तत्काल कैश करने का लालच दिया और गूगल सर्च के माध्यम से एक्सिस बैंक की वेबसाइट पर ले जाकर इस तरह की गतिविधियां करवाई ताकि खाताधारक थोड़ा परेशान हो जाए।
फिर अपनी तरफ से मदद करते हुए, व्हाट्सएप पर एक लिंक भेज दी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के घर में सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी ने अज्ञात व्यक्ति द्वारा व्हाट्सएप पर भेजी गई लिंक को क्लिक कर दिया, और अपनी जानकारी भी दर्ज कर दी। नतीजा बैंक अकाउंट में पड़े 1.80 लाख रुपए गायब हो गए। ठगी के मामले में तो पुलिस कार्रवाई कर लेगी। अपराधी को पकड़ लेंगे और पैसे भी वापस आ जाएंगे लेकिन इस मामले ने पुलिस अधिकारी की योग्यता पर सवाल खड़ा कर दिया है।
आरबीआई से लेकर अमिताभ बच्चन तक हर कोई जनता को समझा रहा है कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजी गई लिंक पर क्लिक न करें लेकिन मुख्यमंत्री के घर की सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी किसी नाबालिग बच्चे की तरह ठग के जाल में फंस गए। लालच में इतना अंधे हो गए कि, सुरक्षा के प्रारंभिक नियम ही भूल गए। रीवार्ड प्वाइंट रिडीम करने के लिए 48 घंटे का समय था, अपनी ब्रांच में अपने रिलेशनशिप मैनेजर से संपर्क कर सकते थे। यही बात तो बैंक वाले भी समझते हैं और साइबर पुलिस द्वारा जारी होने वाली एडवाइजरी में भी यही बात बताई जाती है।
श्री राजीव सिंह इतने भी जागरूक नहीं है, उनको ना अपने डिपार्टमेंट की एडवाइजरी के बारे में पता है, ना आरबीआई और बैंक की तरफ से आने वाले अलर्ट को गंभीरता से लिया और ना ही कॉमन सेंस का उपयोग किया। बस लालच में अंधे होकर क्लिक कर दिया। यदि कोई आम आदमी होता तो उसको पीड़ित कहा जाता लेकिन यहां ठगी का शिकार एक पुलिस अधिकारी हुआ है, और वह भी ऐसा पुलिस अधिकारी जो मुख्यमंत्री के निवास में तैनात है।

.webp)