प्रति, श्रीमान आयुक्त महोदय, लोक शिक्षण संचालनालय। जैसा कि इस बार और विगत वर्षों में भी देखने में आया है कि दसवीं और बारहवीं का परीक्षा परिणाम कागजी स्तर पर 90% से अधिक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या हजारों लाखों में है लेकिन इन हजारों लाखों छात्र-छात्राओं में से JEE and NEET जैसे नेशनल स्तर पर होने वाले परीक्षा में कितने विद्यार्थी सफल हो पाते हैं? इसके आंकड़े बहुत ही चौकाने वाले हैं ऐसा क्यों है एक बड़ा सवाल है।
मध्य प्रदेश के जो बच्चे 10th 12th में 98 और 99% तक लेकर आते हैं उनमें से 99% बच्चों को jee, neet, cat, upsc जैसे एग्जाम में असफलता ही हाथ लगती है। मेरे ख्याल से इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इन बड़े एक्समन के स्तर में और मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा के स्थान में जमीन आसमान का फर्क है और ऊपर से एग्जाम पैटर्न भी बेहद फ्लैक्सिबल कर दिया है अर्थात तरफ तो सिलेबस बहुत लेजी है और ऊपर से एग्जाम में सिलेबस का केवल 10 से 20 परसेंट करने पर भी बहुत अच्छे मार्क्स आ जाते हैं।
श्रीमान जी से मेरा अनुरोध है की इन बड़े एक्साम के स्टैंडर्ड और स्कूली शिक्षा के बीच के अंतर अर्थात बड़ी खाई को कम करने के बारे में सोचा जाए। और कई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
धन्यवाद🙏
निवेदक
मनीष कुमार मंगल (मा. शिक्षक)
CE4082
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