ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 29 मई 2026: इस महीने के अंतिम दिन यानी 31 तारीख को, मतलब आज से ठीक 2 दिन बाद आसमान में एक बेहद दुर्लभ घटना होने वाली है। आप एक ऐसे चंद्रमा के दर्शन कर पाएंगे जो अत्यंत दुर्लभ है। आज का चंद्रमा आपको बड़ी आसानी से दिख जाएगा परंतु 31 तारीख के चंद्रमा के दर्शन करने के लिए आपको अपनी आंखों को ज्यादा परिश्रम करना पड़ेगा और हो सकता है टेलिस्कोप की जरूरत भी पड़ जाए। इसके साथ एक और दर्शन होंगे, यदि आप सब कुछ देखने में सफल हुए तो खुद को सौभाग्यशाली घोषित कर सकते हैं।
ब्लू मून क्या होता है
दरअसल, अंग्रेजी कैलेंडर के 1 महीने में जब भारतीय पंचांग के अनुसार दो बार पूर्णिमा पड़ जाती है तो दूसरी वाली पूर्णिमा को अमेरिका के वैज्ञानिक ब्लू मून कहते हैं। इस मई महीने के पहले दिन 1 तारीख को पूर्णिमा थी और आखिरी दिन 31 तारीख को भी पूर्णिमा है। इसलिए कहा जा रहा है कि 31 तारीख को ब्लू मून दिखाई देगा।
दूसरी पूर्णिमा का चंद्रमा नीला नहीं दिखता तो फिर उसको ब्लू मून क्यों कहते हैं
मजे की बात तो यह है, महीने में दूसरी पूर्णिमा का चंद्रमा किसी भी दृष्टि से नीला नहीं दिखाई देता बल्कि पृथ्वी से नारंगी रंग का दिखाई देता है। फिर भी इसको ब्लू मून कहा जाता है। इसकी भी बड़ी मजेदार कहानी है:-
1937 में Maine Farmers' Almanac में "ब्लू मून" शब्द का इस्तेमाल ऋतु (season) में चार पूर्णिमाओं की तीसरी के लिए हुआ था (फसल कैलेंडर को सही रखने के लिए)। 1946 में Sky & Telescope पत्रिका के जेम्स ह्यू प्रुएट (James Hugh Pruett) ने इसे गलत समझकर महीने की दूसरी पूर्णिमा बता दिया। इस तरह के लोगों का अपना ईगो होता है। या अपनी गलती को भी सही साबित कर देते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। गलती को ठीक नहीं किया गया बल्कि रेडियो शो (StarDate, 1980) और Trivial Pursuit गेम (1986) के माध्यम से स्थापित कर दिया गया। तब से लेकर आज तक "ब्लू मून" की पहचान अपने फादर Maine Farmers' Almanac से नहीं बल्कि पड़ोसी अंकल James Hugh Pruett के अनुसार चली आ रही है।
इसको माइक्रोमून क्यों कहते हैं
यह बड़ा अच्छा सवाल है क्योंकि इसमें नॉलेज भी है। चंद्रमा तो चंद्रमा होता है, फिर इस वाली पूर्णिमा को माइक्रोमून क्यों कहते हैं। इसके पीछे का सिंपल रीजन यह है कि, पूरे वर्ष में यह पूर्णिमा एक ऐसी पूर्णिमा होती है जब चंद्रमा पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी (लगभग 252,360 मील) पर होता है। इसके कारण पृथ्वी से यह काफी धुंधला दिखाई देता है और इसका आकार 6% से लेकर 10% तक छोटा दिखाई देता है। इसलिए इसको माइक्रोमून कहते हैं।
दुर्लभ संयोग क्या है
वैज्ञानिकों के अनुसार ब्लू मून मतलब एक महीने में दो पूर्णिमा और माइक्रोमून का एक साथ होना एक दुर्लभ घटना है। जबकि ज्योतिष के अनुसार पूर्णिमा की रात में चंद्रमा के साथ मंगल, शनि, शुक्र और बृहस्पति जैसे ग्रहों के दर्शन होना एक दिव्य घटना है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह अत्यंत दुर्लभ दर्शन है। इसमें केवल बुध ग्रह के दर्शन नहीं होंगे लेकिन यह दर्शन केवल उसी व्यक्ति को हो पाएंगे, जिनकी कुंडली में बुध ग्रह पॉजिटिव और पावरफुल होगा।
इसके अलावा, चंद्रमा वृश्चिक राशि (Scorpius) तारामंडल के चमकीले तारे अंतायरेस (Antares) के करीब दिखाई देगा और दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में उसे ढक (occult) भी लेगा।
खगोल प्रेमियों के लिए अवसर
दुर्लभ दृश्य: यह एक ऐसा नजारा है जिसे देखने का मौका अगले ढाई साल तक (दिसंबर 2028 तक) दोबारा नहीं मिलेगा।
फोटोग्राफी का मौका: यदि आप मूनराइज (चंद्रोदय) के समय इसे देखते हैं, तो पृथ्वी के वायुमंडल के कारण यह नारंगी रंग का बेहद खूबसूरत दिखाई देता है, जो फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन है।
प्लैनेट परेड: एक ही समय में कई ग्रहों (जैसे बृहस्पति और शुक्र) को एक साथ देखने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।
लाइव स्ट्रीमिंग: जो लोग इसे सीधे नहीं देख पाएंगे, उनके लिए 'वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट' जैसे माध्यमों पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध होगी।
सतर्कता और सावधानी जरूरी
चंद्रमा के उदय होने का जादुई नजारा केवल कुछ ही मिनटों का होता है। यदि आप सही समय (सूर्यास्त के करीब 20 मिनट बाद) पर नहीं देखते, तो आप इसके खास रंगों और प्रभाव को मिस कर सकते है।

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