Eastern Public School, Bhopal के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन और कलेक्टर से शिकायत

Updesh Awasthee
भोपाल, 26 मई 2026:
अपनी हाई क्लास एजुकेशन के लिए फेमस ईस्टर्न पब्लिक स्कूल के खिलाफ आज कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान शिकायत की गई। यही शिकायत सीएम हेल्पलाइन में भी की गई है। पेरेंट्स का कहना है कि, उनके बच्चों को समर कैंप के नाम पर स्कूल बुलाया जा रहा था। जब उन्होंने गर्मी की छुट्टी और कलेक्टर के आदेश का जिक्र करते हुए अपने बच्चों को समर कैंप में भेजने से मना किया तो बच्चों को बीच शिक्षा सत्र में टर्मिनेट कर दिया गया। 

Complaint Filed Against Eastern Public School Bhopal via CM Helpline and Collector Office

जनसुनवाई में पैरंट्स ने बताया कि, अत्यधिक गर्मी के कारण कलेक्टर द्वारा छुट्टी घोषित किए जाने के बावजूद समर कैंप के नाम पर बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा था। इसी के विरोध में पेरेंट्स ने 12 मई को एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था। जैसे ही इस ग्रुप पर हो रही चर्चा की जानकारी स्कूल प्रबंधन तक पहुंची, उन्होंने 15 मई को पेरेंट्स के साथ मीटिंग की। इस दौरान कुछ पेरेंट्स ने भीषण गर्मी का हवाला देते हुए कलेक्टर के आदेश के अनुसार स्कूल बंद करने की बात कही। इससे नाराज स्कूल प्रबंधन ने उन सभी पेरेंट्स के बच्चों को 17 मई को टर्मिनेशन मेल भेज दिया। 

हमारा स्कूल अपने नियमों के आधार पर चलता है

जनसुनवाई में अभिभावकों ने बताया कि जब उन्होंने छुट्टी को लेकर सवाल उठाए, तो प्रबंधन ने कहा कि प्राइवेट स्कूल अपने नियम खुद बनाते हैं। स्कूल प्रशासनिक आदेशों को महत्व नहीं देता और अपने नियमों के अनुसार ही काम करता है।

पेरेंट्स को मिले टर्मिनेशन लेटर का हिंदी अनुवाद

अस्सलामुअलैकुम, निकाले गए किसी भी छात्र ने स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। लेकिन माता-पिता स्कूल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे थे, जिससे 600 से अधिक बच्चों की शिक्षा और 150 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ रही थी। इसलिए बच्चों को अपने माता-पिता के गलत व्यवहार की कीमत चुकानी पड़ रही है, न कि स्कूल उन्हें नुकसान पहुंचा रहा है। स्कूल केवल उन्हीं बच्चों के लिए बनाया गया है, जिसमें मंसूर सर के जीवनभर के त्याग शामिल हैं।

स्कूल का निर्णय अंतिम है और यह उसकी नीति के अनुरूप है। साथ ही यह उस एडमिशन अंडरटेकिंग के अनुसार भी है, जिस पर सभी अभिभावक हस्ताक्षर करते हैं कि वे स्कूल की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। चाहे सक्रिय रूप से समर्थन करके या फिर चुप रहकर समर्थन करने के माध्यम से, जब उनके सामने स्कूल को नुकसान पहुंचाया जा रहा हो। जब आपके बच्चों के टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) तैयार हो जाएंगे, तब उन्हें लेने के लिए आपको बुलाया जाएगा। धन्यवाद।

हमने स्कूल का विरोध नहीं किया, बस बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता की थी

अमानुद्दीन खान ने बताया कि उनके दो बच्चों वफा साद खान (कक्षा 4) और अब्दुल रहमान साद खान (कक्षा 9) को भी स्कूल ने निकाल दिया है। बच्चों का स्कूल में नियमित एडमिशन था और लगभग एक साल की फीस पहले से जमा कर दी गई थी। इसके बावजूद बिना किसी सुनवाई या बातचीत के ई-मेल भेजा गया है। उन्होंने कहा- वाट्सऐप ग्रुप में स्कूल के खिलाफ कोई गलत बात नहीं हुई थी। सिर्फ गर्मी और बच्चों की तबीयत को लेकर चर्चा हुई थी। कोई विरोध या गलत भाषा इस्तेमाल नहीं हुई, फिर भी बच्चों को टारगेट किया गया।

बीच सत्र में निकालने से बच्चों की पढ़ाई पर संकट

परिजन का कहना है कि बीच सत्र में बच्चों को स्कूल से निकालने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नए स्कूल में एडमिशन कराना आसान नहीं है और इससे आर्थिक परेशानी भी बढ़ेगी। अभिभावकों ने कहा कि बच्चे मानसिक तनाव में हैं। वे बार-बार पूछ रहे हैं कि उन्हें स्कूल क्यों नहीं जाने दिया जा रहा है?

CM हेल्पलाइन और शिक्षा विभाग में भी शिकायत

मामले की शिकायत CM हेल्पलाइन, लोक शिक्षा विभाग और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से भी की गई है। अभिभावकों ने कहा कि वे आगे भी कार्रवाई जारी रखेंगे। उनका कहना है कि ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जो बच्चों की सेहत और प्रशासनिक आदेशों को नजरअंदाज करते हैं।

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