नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026: भारतीय समाज में बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है, कहते हैं उनके आशीर्वाद से सभी पाप कट जाते हैं लेकिन केरल सरकार बुजुर्गों को बोझ समझती है। सरकार ने नियमित कर्मचारी और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते अपनी पॉलिसी के हिसाब से निर्धारित किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ऐसा ऐतिहासिक फैसला दिया है कि अब कोई भी राज्य सरकार, किसी पेंशनर्स के साथ अन्याय नहीं कर पाएगी।
Supreme Court Delivers Big Verdict on DA for Employees, Pensioners
केरल राज्य बनाम एम. विजयकुमार और अन्य: यह कानूनी लड़ाई केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा शुरू की गई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब केरल सरकार ने मार्च 2021 से KSRTC के सेवारत कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 14% की वृद्धि की, जबकि पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) में केवल 11% की वृद्धि की गई। पेंशनभोगियों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन बताते हुए केरल उच्च न्यायालय में चुनौती दी। केरल उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने शुरू में उनकी याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में खंडपीठ (Division Bench) ने पेंशनभोगियों के पक्ष में फैसला सुनाया और इसे भेदभावपूर्ण माना। इसके बाद केरल राज्य और KSRTC ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
Arguments by Counsels
केरल राज्य की ओर से (Senior Counsel Mr. Jaideep Gupta): ने तर्क दिया कि सेवानिवृत्त कर्मचारी और सेवारत कर्मचारी दो अलग-अलग वर्ग (different classes) हैं। इसलिए, इन दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग दरें तय करना समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने इसके समर्थन में वित्तीय कारणों और पिछले कानूनी उदाहरणों का हवाला दिया।
KSRTC की ओर से (Senior Counsel Mr. P.V. Dinesh): ने राज्य के तर्कों का समर्थन करते हुए कहा कि KSRTC वर्तमान में वित्तीय संकट (resource crunch) का सामना कर रहा है। निगम के वित्तीय स्वास्थ्य को देखते हुए पेंशनभोगियों को कम दर पर राहत देने का सचेत निर्णय लिया गया था।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ओर से (Senior Counsel Mr. V. Chitambaresh): ने तर्क दिया कि DA और DR दोनों का उद्देश्य मुद्रास्फीति (inflation) के प्रभाव को कम करना है। चूंकि मुद्रास्फीति दोनों वर्गों को समान रूप से प्रभावित करती है, इसलिए उनके बीच दरों में अंतर करने का कोई तार्किक आधार (no rationale) नहीं है।
The Verdict
Supreme Court of India के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा (Justice Manoj Misra) और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले (Justice Prasanna B. Varale) ने केरल राज्य और KSRTC की अपीलों को खारिज (Dismissed) कर दिया। न्यायालय ने माना कि महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का उद्देश्य एक ही है, मुद्रास्फीति के कारण होने वाली कठिनाई को कम करना।
Specific Observations
न्यायालय ने अपने निर्णय में कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं:
"Indisputably, inflation hits both serving and retired employees with equal force." (निस्संदेह, मुद्रास्फीति सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों दोनों पर समान बल के साथ प्रहार करती है)।
न्यायालय ने कहा कि
समानता एक गतिशील अवधारणा (dynamic concept) है और यह "मनमानेपन की कट्टर दुश्मन (sworn enemy of arbitrariness)" है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एक बार जब भत्ता देने और उसे मुद्रास्फीति के आधार पर बढ़ाने का निर्णय ले लिया जाता है, तो सेवारत और सेवानिवृत्त लोगों के बीच अलग-अलग दरें तय करना अनुच्छेद 14 के तहत भेदभावपूर्ण और मनमाना है।
इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें पेंशनभोगियों को भी सेवारत कर्मचारियों के समान ही 14% की दर से महंगाई राहत देने का निर्देश दिया गया था।

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