संविदा शिक्षकों के हित में ग्वालियर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मिलेगा नियमित के समान 90% वेतन

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 21 अप्रैल 2026
: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने संविदा शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश पारित किया है। माननीय न्यायमूर्ति आशीष श्रोती ने 1 अप्रैल, 2026 को याचिका क्रमांक 20500/2022 पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि वर्षों से कार्यरत संविदा शिक्षकों को राज्य सरकार की नीतियों के अनुरूप उचित वेतनमान प्रदान किया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता

यह याचिका श्रीमती वंदना मिश्रा और अन्य सहयोगियों द्वारा दायर की गई थी, जो मध्य प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 'मोबाइल रिसोर्स कंसल्टेंट' (विशेष शिक्षक) के रूप में कार्यरत हैं। याचिकाकर्ताओं में वंदना मिश्रा (गोहद, भिंड), शर्मिली शर्मा (मुरार, ग्वालियर), कल्पना मिश्रा (भिंड), आशारानी तिवारी (मुरार, ग्वालियर), रितेश देशमुख (गंजबासौदा, विदिशा), सुनील सिंह भदौरिया (अटेर, भिंड) और श्यामदास (कैलारस, मुरैना) शामिल हैं। इन सभी की नियुक्तियां वर्ष 2006 से 2008 के बीच 'राज्य शिक्षा केंद्र' के विज्ञापनों के माध्यम से हुई थीं।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष: याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राज बहादुर सिंह तोमर ने तर्क दिया कि ये शिक्षक पिछले 18 से 20 वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें शुरुआत में मात्र 5000 रुपये प्रति माह और 1000 रुपये मोबिलिटी सपोर्ट पर रखा गया था। उन्होंने मांग की कि सामान्य प्रशासन विभाग के 5 जून 2018 के परिपत्र के अनुसार, उन्हें नियमित पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन का 90% भुगतान किया जाना चाहिए। 

राज्य सरकार का पक्ष: सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता बृज मोहन पटेल ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति एक विशिष्ट परियोजना (Project) के तहत की गई थी और उनकी सेवा परियोजना की निरंतरता पर निर्भर है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि 2018 और 2023 की नीतियां परियोजना में काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू नहीं होती हैं और याचिकाकर्ताओं का वेतन पहले ही बढ़ाकर 33,100 रुपये किया जा चुका है। 

न्यायालय की विशेष टिप्पणी 
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता दिव्यांग बच्चों को शिक्षा प्रदान करने जैसा महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। न्यायालय ने विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि "तथ्य यह है कि वे 18-20 वर्षों से काम कर रहे हैं, यह दर्शाता है कि उनका कार्य निरंतर (Perennial) प्रकृति का है"। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत ही कार्य करता है, अतः उन पर सरकारी नीतियां लागू होती हैं। 

Gwalior High Court Landmark Verdict: Contract Teachers to Get 90% Salary of Regular Staff

न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
उत्तरदाता (राज्य सरकार) को निर्देश दिया गया है कि वे 5 जून 2018 के परिपत्र की कंडिका 1.14.5 के तहत याचिकाकर्ताओं को 5 जून 2018 से 21 जुलाई 2023 तक की अवधि के लिए 90% वेतन का लाभ प्रदान करें।
22 जुलाई 2023 के बाद की अवधि के लिए याचिकाकर्ताओं को नए परिपत्र के अनुसार वेतन का लाभ दिया जाए।
न्यायालय ने इस पूरी प्रक्रिया को आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने के 90 दिनों के भीतर पूर्ण करने का आदेश दिया है।

नियमितीकरण: नियमितीकरण के संबंध में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चूंकि दिव्यांग बच्चों के शिक्षकों के नियमितीकरण का मुद्दा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में (WP Civil No. 132/2016) लंबित है, इसलिए याचिकाकर्ताओं का यह दावा सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
इस निर्णय से प्रदेश के उन हजारों संविदा कर्मचारियों में न्याय की उम्मीद जगी है जो लंबे समय से समान कार्य के लिए समान वेतन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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