भोपाल समाचार, 13 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग ने वनरक्षक भर्ती परीक्षा के उम्मीदवारों के नाम एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। हालांकि वन विभाग की इस सूचना का कोई महत्व नहीं है क्योंकि, जो कुछ भी हो रहा है, यदि सफल हुआ तो इसको व्यापम घोटाला कहा जाएगा।
Madhya Pradesh Forest Guard Exam Alert: Department Has Announced for Candidates
वन विभाग की ओर से सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से विज्ञप्ति जारी की गई है। इसमें लिखा है कि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप्स एवं कुछ अनाधिकृत वेबसाइट्स के माध्यम से "वन रक्षक भर्ती" के नाम पर भ्रामक एवं फर्जी सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं। इन सूचनाओं में अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क अथवा चयन सुनिश्चित करने के नाम पर धनराशि की मांग की जा रही है, जो पूर्णतः धोखाधड़ी का प्रयास है।
वन विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा स्पष्ट किया जाता है कि वर्तमान में "वन रक्षक" पदों पर भर्ती की प्रक्रिया मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल के माध्यम से संचालित की जा रही है। भर्ती से संबंधित विस्तृत एवं प्रमाणिक जानकारी केवल अधिकृत वेबसाइट पर https://esb.mp.gov.in/ पर ही उपलब्ध है।
सभी अभ्यर्थियों एवं आम नागरिकों से अनुरोध है कि किसी भी अनाधिकृत वेबसाइट, एजेंट या व्यक्ति के माध्यम से आवेदन न करें। भर्ती के नाम पर किसी को भी धनराशि न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों एवं विभागीय नोटिफिकेशन पर ही विश्वास करें।
यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की फर्जी भर्ती या धोखाधड़ी से संबंधित कोई सूचना प्राप्त होती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना से संपर्क करें या वन विभाग के कार्यालय के दूरभाष नंबर 0755-2524000 पर सूचना दें। यह प्रेस विज्ञप्ति अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार के आर्थिक एवं मानसिक नुकसान से बचाने हेतु जनहित में जारी की गई है।
वन विभाग की विज्ञप्ति से पैदा हुए सवाल
नंबर एक: परीक्षा का आयोजन मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल भोपाल के द्वारा किया जा रहा है और उम्मीदवारों से जो लोग संपर्क कर रहे हैं वह परीक्षा में पास करने की गारंटी दे रहे हैं। यदि वह सही बोल रहे हैं तो उनकी मिली भगत कर्मचारी चयन मंडल से है। वन विभाग का परीक्षा में कोई रोल ही नहीं है। फिर क्या कारण है कि, कर्मचारी चयन मंडल की ओर से नहीं वन विभाग की ओर से विज्ञप्ति जारी हुई।
नंबर दो: वन विभाग ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। सवाल यह बनता है कि यदि किसी ने वन विभाग को सूचना दे भी दी, तो वन विभाग क्या कर लेगा। कर्मचारी चयन मंडल की जांच करने का अधिकार वन विभाग के पास नहीं है।
घटनाक्रम से पैदा हुआ डाउट
कहीं ऐसा तो नहीं, कोई सिंडिकेट बना था लेकिन अब डील फेल हो गई है। जबकि सिंडिकेट के एजेंट अभी भी उम्मीदवारों से संपर्क कर रहे हैं या फिर पहले ही कर चुके हैं।
ऐसा तो नहीं की सिंडिकेट में कैंडिडेट से संपर्क करने का काम जिसको दिया गया था, उसके साथ बात बिगड़ गई है। इसलिए अलर्ट जारी किया गया है।
बात जो भी हो लेकिन कैंडिडेट्स को एक बात याद रखना चाहिए। यदि घोटाले का खुलासा हो गया तो सबसे पहले कैंडिडेट्स को जेल जाना पड़ेगा।

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